फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Jhajjar/Bahadurgarh News ›   jhajjar, ambuence, jhajjar, news

दावे ही दावे हैं हकीकत में कुछ भ्री नहीं

Sat, 11 Jun 2016 12:19 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला/ झज्जर
ब्यूरो अमर उजाला/ झज्जर Updated Sat, 11 Jun 2016 12:19 AM IST
विज्ञापन
jhajjar, ambuence, jhajjar, news
मरीज - फोटो : bureau
लोगों के स्वास्थ्य के लिए समुचित सेवाओं का दावा करने वाली स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज की स्वास्थ्य सेवाएं कैसी हैं। इसका एक अंदाजा झज्जर जिले की एंबुलेंस सुविधा से लगाया जा सकता है। 10 लाख की आबादी वाले जिले में मरीजों को लाने ले जाने के लिए मात्र 14 एंबुलेंस हैं। वर्ष 2011 की जनगणना के बाद जिले की जनसंख्या तो बढ़ी है, एंबुलेंस की नहीं। हाल ही में डीघल गांव में हुई तीन मासूम बच्चों की मौत मामले में भी एंबुलेंस सुविधा न होना परिजनों को भारी पड़ा। वहीं, कुलाना गांव में हुई दुघर्टना में भी एंबुलेंस की सुविधा न मिलने के कारण दो छात्राओं की मौत हो गई थी। वहीं, बेरी के एक गांव में से एक गर्भवती महिला को ले जा रही एंबुलेंस की गाड़ी भी रास्ते में ही दम तोड़ गई। जिसके चलते परिजनों को परेशानी हुई थी।
विज्ञापन

आपातकालीन स्थिति में मरीजों को बढ़िया इलाज मिल सके, इसके लिए सरकार द्वारा एंबुलेंस की व्यवस्था की हुई है।

यह व्यवस्था कितनी दुरुस्त है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि जिले में 68 हजार की आबादी पर सिर्फ एक ही एंबुलेंस है। जी हां झज्जर जिले की आबादी दस लाख के करीब है और यहां 14 एंबुलेंस है। विभाग इन 14 एंबुलेंस के बलबूते ही समय पर सुविधा देने और सिर्फ 15 से 20 मिनट में दुघर्टना स्थल पर पहुंचने का दावा कर रहा है, लेकिन यह दावा बीते करीब एक माह में ही कई दफा फेल हो चुका है। डीघल में एंबुलेंस में सुविधाएं न होने के चलते जहां दो मासूमों की मौत हो गई थी, वहीं कुलाना गांव के पास भी हुई सड़क दुघर्टना में भी समय पर एंबुलेंस न मिलने के चलते दो छात्राओं ने दम तोड़ दिया था। इसके अलावा बेरी और बहादुरगढ़ में भी एंबुलेंस की कमी और उसमें सुविधा न होना मरीजों पर भारी पड़ी।
विज्ञापन


क्या है डब्ल्यूएचओ के नॉर्म्स
डब्ल्यूएचओ के नॉर्म्स के तहत एक एंबुलेेंस में एक ईएमटी एमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन की नियुक्ति होनी चाहिए ताकि, आपातकालीन स्थिति में मरीज की देखभाल उचित ढंग से की जा सके। साथ में एंबुलेंस में ऑक्सीजन सिलेंडर, ग्लूकोज व्यवस्था, आपातकालीन सभी दवाओं के अलावा, डिलीवरी केस में इससे संबंधित सभी दवाइयां होने का प्रावधान है।
विज्ञापन
विज्ञापन


जिले में कुल एंबुलेंस की संख्या-14
झज्जर- नागरिक अस्पताल में-3, बहारदुगढ़-नागरिक अस्पताल में-3, बेेरी- नागरिक अस्पताल -1, डीघल- सीएचसी-1, बादली- सीएचसी-1, ढाकला- सीएचसी-1, दूबलधन-सीएचसी-1, माछरौली- सीएचसी-1, मातनहेल-1, जमालपुर- सीएचसी-1



जिले भर में सीएचसी व उनके अंडर आने वाली पीएचसी
सीएचसी बादली- पीएचसी बाढ़सा, पीएचसी, जहांगीरपुर, पीएचसी, छुड़ानी।
सीएचसी ढाकला- पीएचसी पाटोदा, पीएचसी माछरौली, पीएचसी तुंबाहेडी, पीएचसी सिलानी।
सीएचसी डीघल- पीएचसी  दुजाना, पीएचसी भंभेवा, पीएचसी खरहर।
सीएचसी छारा- पीएचसी खोरड़ा, पीएचसी जसौरखेड़ी, पीएचसी मांडोठी, पीएचसी नूनामाजरा।
सीएचसी दूबलधन- पीएचसी जहाजगढ़, पीएचसी छुछकवास, पीएचसी माजरा डी
सीएचसी जमालपुर- पीएचसी बहू, पीएचसी मातनहेल, पीएचसी साल्हावास, पीएचसी बिरोहड़।



नई एंबुलेंस के लिए भी विभाग को सूचित किया जा चुका है। जल्द ही नई एंबुलेंस आने की उम्मीद है। उनका प्रयास यही है कि मरीजों को किसी तरह की परेशानी न हो। जाट आरक्षण आंदोलन के दौरान हुए उपद्रव में दो एंबुलेंसों को उपद्रवियों ने आग के हवाले कर दिया था। जिसके चलते भी परेशानी हुई है।
-श्रीराम सिवाच, सीएमओ, झज्जर।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed