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क्षेत्र में बढ़ रहे सर्पदंश के मामले
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सामान्य अस्पताल में सर्पदंश का ईलाज करवाती युवती।संवाद
- फोटो : Jhjhar
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झज्जर। गर्मी के मौसम में लगातार सर्पदंश के मामले बढ़ने लगे हैं। फिजिशियन न होने से चलते सामान्य अस्पताल में आने वाले सभी मरीजों को प्राथमिक उपचार देने के बाद रोहतक पीजीआई रेफर किया जा रहा है। पिछले दो दिनों में सामान्य अस्पताल में ग्रामीण क्षेत्र से दो व शहरी क्षेत्र से एक सर्पदंश का मामला सामने आया है। जिला मुख्यालय पर सर्पदंश के लिए एंटी डॉट तो उपलब्ध है लेकिन फिजिशियन नहीं होने के कारण मरीजों को रोहतक भेजा जा रहा है।
उमस भरी गर्मी के मौसम में सर्पदंश के ज्यादा मामले आते हैं। हर साल कई मामले सर्पदंश के विभाग के पास पहुंचते हैं। इन दिनों किसान बागान, खेतों और बगीचों में काम करने में जुटे हैं। इसी दौरान हरी घास के बीच छीपे सांप काट लेते हैं। अगर ऐसे में सामान्य अस्पताल में पूरा इलाज नहीं मिलता तो यह इनके लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
अब तक मई माह व जून माह में करीबन 20 मामले सर्पदंश के सामान्य अस्पताल में पहुंच चुके हैं। वहीं कई मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद भी बचाया गया है। यह भी देखने में आया है कि सामान्य अस्पताल में पूरा इलाज ना मिलने के कारण मरीजों को रोहतक रेफर किया जाता है। लोगों में फैली भ्रांति के कारण लोग सर्पदंश के मरीज को आसपास के सपेरों से इलाज कराना बेहतर समझ रहे हैं।
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वर्जन
हमारे पास स्नेक बाइट के लिए एंटीस्नेकविलम है। जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल किया जाता है। प्राथमिक उपचार के बाद मरीज की हालत को देखकर पीजीआई रोहतक रेफर किया जाता है।
- डॉ जयमाला, सिविल सर्जन, झज्जर।
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उमस भरी गर्मी के मौसम में सर्पदंश के ज्यादा मामले आते हैं। हर साल कई मामले सर्पदंश के विभाग के पास पहुंचते हैं। इन दिनों किसान बागान, खेतों और बगीचों में काम करने में जुटे हैं। इसी दौरान हरी घास के बीच छीपे सांप काट लेते हैं। अगर ऐसे में सामान्य अस्पताल में पूरा इलाज नहीं मिलता तो यह इनके लिए जानलेवा साबित हो सकता है।
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अब तक मई माह व जून माह में करीबन 20 मामले सर्पदंश के सामान्य अस्पताल में पहुंच चुके हैं। वहीं कई मरीजों को प्राथमिक उपचार के बाद भी बचाया गया है। यह भी देखने में आया है कि सामान्य अस्पताल में पूरा इलाज ना मिलने के कारण मरीजों को रोहतक रेफर किया जाता है। लोगों में फैली भ्रांति के कारण लोग सर्पदंश के मरीज को आसपास के सपेरों से इलाज कराना बेहतर समझ रहे हैं।
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हमारे पास स्नेक बाइट के लिए एंटीस्नेकविलम है। जरूरत पड़ने पर इस्तेमाल किया जाता है। प्राथमिक उपचार के बाद मरीज की हालत को देखकर पीजीआई रोहतक रेफर किया जाता है।
- डॉ जयमाला, सिविल सर्जन, झज्जर।