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हौसला पक्का है तो आशियाना भी बनेगा पक्का

Fri, 12 Mar 2021 02:16 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Fri, 12 Mar 2021 02:16 AM IST
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If the courage is strong then the house will also be confirmed
टीकरी बॉर्डर पड़ाव में पक्के आशियाने बनाने में जुटे किसान। - फोटो : Bahadurgarh
बहादुरगढ़। टीकरी बॉर्डर पड़ाव में किसानों ने गर्मी के मौसम को देखते हुए पक्के आशियाने बनाने शुरू कर दिए हैं। किसान सोशल आर्मी की ओर से टीकरी बॉर्डर पर एक 18×20 के कमरे का निर्माण किया गया है। इसमें कूलर और पंखे के साथ-साथ खिड़की की व्यवस्था भी की गई है। ऊपर पराली की छत बिछाई गई है जो गर्मी के मौसम में ठंडक का अहसास देगी। किसानों का कहना है कि कृषि कानूनों को रद्द कराने को लेकर किसानों का हौसला पक्का है तो अब आशियाना भी पक्का ही बनेगा। सरकार हमारी बात सुनने को तैयार नहीं है। हमने तो पहले ही कहा था कि हम यहां से तब तक नहीं लौटेंगे, जब तक कि हमारी मांगे नहीं मानी जाएंगी। इसलिए अब उन्होंने ईंटों के घर बनाने शुरू कर दिए हैं। यह किसानों का पक्का रैन बसेरा होगा।
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टीकरी बॉर्डर पर सड़क पर ही ईंटों और सीमेंट से घर बनाने वाले किसान गुरदीप सिंह, मनजीत और सतेंद्र का कहना है कि सरकार उनकी मांगों को मान नहीं रही है। ऐसे में वे भी अपने घर वापस जाने वाले नहीं है तो यहां पर रहने का इंतजाम किया जा रहा है। आने वाले दिनों में अन्य स्थानों पर भी पक्के आशियाने तैयार किए जाएंगे। खास बात यह है कि डबल स्टोरी घर भी बनाए जाएंगे। यहां पर कई जगह ईंटों और सीमेंट से कमरे तैयार कर दिए गए हैं। इन घरों के ऊपर पराली की छत बिछाई गई है जो गर्मी में ठंडक का अहसास देगी। किसानों का कहना है कि यह वातानुकूल घर होगा। इसकी दीवारें क्रंकीट की हैं, लेकिन छत पराली और घास-भूसे की होगी। तपती धूप में भी इसके नीचे बैठे लोगों को ठंडक का अहसास होगा। पिछले कई साढ़े तीन माह से नए कृषि कानून का विरोध कर रहे किसान अब भी दिल्ली की सीमाओं पर डटे हुए हैं। सर्दी और बारिश के दिनों में ये किसान तिरपाल और टीन के शेड बनाकर रह रहे थे, लेकिन गर्मी के दिनों में इसमें रह पाना मुश्किल है। लिहाजा यहां पर अब बड़ी तादाद में पक्का स्ट्रक्चर बनाने का काम किया जा रहा है। अमृतसर से आए गुरमीत सिंह ने बताया कि यहां पर बड़ी संख्या में दिन-रात ट्रैक्टरों के माध्यम से पंजाब और हरियाणा के कई शहरों से ईंटें और सीमेंट लाने का काम लगातार जारी है। दिन-रात हमारे बीच में ही काम करने वाले मिस्त्री इन घरों को बनाने रहे हैं।
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