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कृषि कानून रद्द नहीं हुए तो लौटा दूंगा राजीव गांधी खेलरत्न सम्मान : विजेंदर सिंह
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टीकरी बॉर्डर स्थित धरनास्थल पर किसानों को संबोधित करते अंतरराष्ट्रीय बॉक्सर विजेंदर सिंह। सं?
- फोटो : Bahadurgarh
केंद्र सरकार के नए कृषि कानूनों के खिलाफ जारी आंदोलन को समर्थन देने के लिए किसान संगठनों व विभिन्न राजनीतिक दलों नेता और खिलाड़ी भी आगे आ रहे हैं। टीकरी बार्डर पर किसानों का धरना लगातार 23वें दिन जारी रहा। शुक्रवार को धरना स्थल पर किसानों को समर्थन देने के लिए अंतरराष्ट्रीय बाक्सिंग खिलाड़ी विजेंदर सिंह भी टीकरी बॉर्डर पहुंचे। उन्होंने मंच से किसानों की सभा में मंच से किसानों की आवाज को बुलंद किया। साथ ही कहा कि किसानों से जुड़े तीनों कानूनों को केंद्र सरकार वापस नहीं लेगी तो वह अपना राजीव गांधी खेल रत्न अवार्ड लौटा देंगे और आंदोलनकारी किसानों को समर्थन जारी रखेंगे।
इससे पहले विजेंदर सिंह सिंघु बार्डर धरना स्थल पर जाकर किसानों को समर्थन दे चुके हैं। शुक्रवार को वह बहादुरगढ़ के साथ लगते टीकरी बॉर्डर पर किसानों के बीच पहुंचे। यहां उन्होंने किसानों की मांग को जायज ठहराया। सरकार से उन्होंने उक्त कानून निरस्त करने की मांग की। साथ में कहा कि अगर सरकार ने ये काले कानून वापस नहीं लिए तो वह अपना सर्वोच्च खेल पुरस्कार लौटा देंगे। उन्होंने पंजाब के किसानों द्वारा इस आंदोलन की अगुवाई करने को लेकर कहा कि पंजाब के किसानों को हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान के अलावा देश के अन्य राज्यों के किसानों का भी पूरा समर्थन मिला है। अब किसान एक मंच पर एकत्रित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि मैं यहां सिर्फ किसानों की सेवा करने आया हूं। खिलाड़ी होने के साथ-साथ वह एक किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं।
विजेंदर ने मंच से किसान एकता के नारे भी लगाए। उन्होंने कहा कि यह सुनकर दुख हुआ कि संत राम सिंह ने किसान आंदोलन के लिए कुर्बानी दी है। बाक्सर बोले, खिलाड़ी और जज्बाती आदमी हूं। गुस्सा भी आता है और बहुत दुख भी हुआ है। अभी सिर्फ एक ही बात कहता हूं कि हमारी कौम जान देने वाली नहीं है, बल्कि जान लेने वाली कौम है और अभी जान लेंगे सिर्फ तीन काले कानूनों की। उन्होंने कहा कि सरकार जो किसान कानून लेकर आई है वह गलत है और गलत को गलत कहने के लिए वह यहां पहुंचे है। अगर सरकार किसानों की मांगों को पूरा नहीं करती और उक्त कानून निरस्त नहीं करती तो वह किसानों के लिए अपना सर्वोच्च खेल पुरस्कार भी वापस कर देंगे। उन्होंने आंदोलनरत किसानों को समर्थन देने के साथ-साथ टीकरी बार्डर पर लंगर सेवा भी की। साथ में शांतिपूर्वक किसानों के डटे रहने पर उनकी प्रशंसा भी की।
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इससे पहले विजेंदर सिंह सिंघु बार्डर धरना स्थल पर जाकर किसानों को समर्थन दे चुके हैं। शुक्रवार को वह बहादुरगढ़ के साथ लगते टीकरी बॉर्डर पर किसानों के बीच पहुंचे। यहां उन्होंने किसानों की मांग को जायज ठहराया। सरकार से उन्होंने उक्त कानून निरस्त करने की मांग की। साथ में कहा कि अगर सरकार ने ये काले कानून वापस नहीं लिए तो वह अपना सर्वोच्च खेल पुरस्कार लौटा देंगे। उन्होंने पंजाब के किसानों द्वारा इस आंदोलन की अगुवाई करने को लेकर कहा कि पंजाब के किसानों को हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान के अलावा देश के अन्य राज्यों के किसानों का भी पूरा समर्थन मिला है। अब किसान एक मंच पर एकत्रित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि मैं यहां सिर्फ किसानों की सेवा करने आया हूं। खिलाड़ी होने के साथ-साथ वह एक किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं।
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विजेंदर ने मंच से किसान एकता के नारे भी लगाए। उन्होंने कहा कि यह सुनकर दुख हुआ कि संत राम सिंह ने किसान आंदोलन के लिए कुर्बानी दी है। बाक्सर बोले, खिलाड़ी और जज्बाती आदमी हूं। गुस्सा भी आता है और बहुत दुख भी हुआ है। अभी सिर्फ एक ही बात कहता हूं कि हमारी कौम जान देने वाली नहीं है, बल्कि जान लेने वाली कौम है और अभी जान लेंगे सिर्फ तीन काले कानूनों की। उन्होंने कहा कि सरकार जो किसान कानून लेकर आई है वह गलत है और गलत को गलत कहने के लिए वह यहां पहुंचे है। अगर सरकार किसानों की मांगों को पूरा नहीं करती और उक्त कानून निरस्त नहीं करती तो वह किसानों के लिए अपना सर्वोच्च खेल पुरस्कार भी वापस कर देंगे। उन्होंने आंदोलनरत किसानों को समर्थन देने के साथ-साथ टीकरी बार्डर पर लंगर सेवा भी की। साथ में शांतिपूर्वक किसानों के डटे रहने पर उनकी प्रशंसा भी की।
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