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इकलौता बेटा नहीं रहा अब किसके सहारे काटेंगे जिंदगी
अमर उजाला झज्जर/ब्यूरो
Updated Thu, 25 Feb 2016 12:49 AM IST
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संदीप तो म्हारा इकलौता बेटा था। बड़े लाड़-प्यार से पाला था। उसकी शादी के बाद अब पोते-पोतियां हैं। अब भरे-पूरे इस परिवार की जिंदगी किसके सहारे कटेगी। दो बच्चों के सिर से बाप का साया उठ गया। हमारे बुढ़ापे की लाठी भी टूट गई।
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यह दर्द गांव अकहेड़ी मदनपुर निवासी संदीप के पिता सुंदर का है। संदीप की जाट आंदोलन के दौरान हुए उपद्रव में श्रीराम चौक पर पैरा मिलिट्री फोर्स की गोली लगने से मौत हो गई थी।
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इससे पहले उसे गंभीर हालत में रोहतक पीजीआई में दाखिल कराया गया, लेकिन डॉक्टर उसे बचा नहीं पाए। संदीप की मौत ने एक भरे पूरे परिवार को दो राहे पर ला खड़ा किया है।
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जाट आंदोलन के दौरान इसी गांव से संदीप के अलावा अर्जुन की भी मौत हुई है। गांव में जहां मातम पसरा है, वहीं इन मौतों से परिवार भी टूट गए हैं।
परिजन अब इन हालातों पर तो नहीं जाना चाहते कि उनके लाड़लों की मौत किन परिस्थितियों में हुई, लेकिन वे ये जरूर कह रहे हैं उनके बेटे तो बेकसूर थे।
हामनै नी बेरा था कर्फ्यू के हो सै
करीब 26 वर्षीय संदीप के पिता सुंदर के घर इकलौते बेटे की मौत पर शोक जताने वालों की भीड़ लगी है। गांव और रिश्तेदारियों से भी लोग ढांढस बंधाने पहुंच रहे हैं।
बेटे की मौत से दुखी सुंदर यही कहता है कि हामनै ने पता था कि झज्जर में के बखेड़ा खड़ा हो रहा है। कर्फ्यू तो हमने न देखा न सुना। दोनों बाप-बेटा खेती कर परिवार को पाल रहे थे।
संदीप को शहर में काम पर भेजा था। उपद्रव के बाद उसके आने की राह देख रहा था, वह तो नहीं आया लेकिन उसके मौत की खबर आई।
संदीप तीन बहनों में इकलौता भाई है। शादी के बाद एक बेटा-बेटी का पिता भी था। बच्चे अब किसके सहारे पलेंगे, इस पर सुंदर चिंतित है।
अर्जुन से थी परिवार को बड़ी उम्मीदें
अकहेड़ी मदनपुर निवासी समेसिंह के तीन बेटे थे। बड़ा लड़का धर्मेंद्र फौज में है और देश की सीमाओं की रक्षा को समर्पित है। मंझला जगबीर व छोटा अर्जुन अभी पढ़ रहे थे।
अर्जुन की जाट आरक्षण आंदोलन में हुई मौत से पूरा परिवार सदमे में है। उससे परिवार को बड़ी उम्मीदें थी। अर्जुन भी सरकारी नौकरी के लिए एक तरफ टेस्ट की तैयारी कर रहा था, दूसरी तरफ डिस्टेंस एजूकेशन से बीए भी।
20 फरवरी को शहर में कंप्यूटर की कक्षा लगाने आया था। आंदोलनकारी व पुलिस के बीच भिड़ंत के बाद चली गोलियों का शिकार हो गया। पोस्टमार्टम हुआ तो रिपोर्ट आई कि चाकू छुरी से मरा है।
परिवार ने जाम लगाया तो दोबारा पोस्टमार्टम हुआ और खुलासा हुआ कि अर्जुन की मौत गोली लगने से हुई है। समेसिंह ने कहा कि पहले ही जख्म मिले हैं, पुलिस ने सरकार की शह पर इन पर नमक छिड़कने का काम किया।