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आखिर 12 साल में लड़ाई जीत ही गए किसान

Wed, 08 Jun 2016 01:44 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/झज्जर/बहादुरगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला/झज्जर/बहादुरगढ़ Updated Wed, 08 Jun 2016 01:44 AM IST
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Hindi story, land protest, jhajjhar/bahadurgrah
land protest - फोटो : Bureau
शहर से सटे 70 से अधिक किसान परिवारों की सुप्रीम कोर्ट में भी आखिर विजय हुई। देश की सबसे बड़ी अदालत ने 12 साल पहले कौड़ियों के भाव अधिग्रहीत की गई किसानों की जमीन का अधिग्रहण रद्द करने के हाईकोर्ट के फैसले पर मोहर लगा दी है। इससे ग्रामीणों की करोड़ों की जमीन कौड़ियों के भाव जाने से बच गई।
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 राज्य सरकार ने बहादुरगढ़ में हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हुडा) के सेक्टर विकसित करने के लिए वर्ष-2002 में नयागांव, बालोर व बहादुरगढ़ के किसानों की 1186 एकड़ जमीन एक्वायर की थी। बदले में नाममात्र की कीमत मिलने की वजह से कुछ किसानों ने पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में याचिका लगा दी और वर्ष-2012 में हाई कोर्ट ने किसानों की भूमि का अधिग्रहण रद्द करने का आदेश दिया था, लेकिन हुडा वर्ष-2012 में ही हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चला गया। अब दो साल की लड़ाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने हुडा की अपील को खारिज कर दिया है। जिससे किसान देश के सर्वोच्च न्यायालय में भी जीत गए हैं। वर्ष-2002 में मात्र तीन लाख रुपये प्रति एकड़ (ब्याज आदि समेत 4.68 लाख रुपये) में अधिग्रहीत की गई इस जमीन का बाजार भाव फिलहाल करोड़ों रुपये प्रति एकड़ में है। एसएलपी नंबर 10857 पर गत 11 मई को आए न्यायालय के फैसले पर जमीन के मालिक किसानों ने खुशी की लहर दौड़ गई है।
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इन किसानों की विजय
जिन किसानों की जमीन का अधिग्रहण रद्द करने के हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया है उनमें कुछ जमीन बहादुरगढ़ के विधायक नरेश कौशिक व पूर्व विधायक राजेंद्र जून की भी है। इनमें संभवत: सबसे ज्यादा करीब 50 एकड़ जमीन बालोर के राव लहरी सिंह की है। मुकदमा जीतने वाले बाकी किसानों व अन्य भू-मालिकों में श्रीराम यादव की 16 एकड़, करतार सिंह की 12, हरदयाल की 8, लीलू की 6, यशपाल की 3, नत्थीराम की 3, वीर सिंह की 4 और बिजेंद्र, प्रह्लाद, जगदीश दलाल, चांद सिंह व जूता फैक्ट्री रेशमा फुटवियर्स भी शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट में किसानों की तरफ से पैरवी वरिष्ठ वकील महावीर सिंह व उनके सहयोगियों ने की और फैसला न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ व रोहिनतन फाली नरीमन की पीठ ने दिया।
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इनके लिए अधिग्रहीत की थी हुडा ने जमीन
दरअसल, वर्ष-2002 में तत्कालीन सरकार ने शहर में हुडा की ओर से रिहायशी सेक्टर-1, 11, 12 व 13 विकसित करने के लिए यह 1186 एकड़ अधिग्रहीत की थी। हुडा ने इस जमीन को लेने के लिए 16 अप्रैल 2004 को सेक्शन-6 का नोटिस जारी किया और किसानों को अवार्ड सुना दिया। किसानों ने हाई कोर्ट में सीडब्लूपी दायर कर दी। जिस पर कोर्ट ने 2004 में ही स्थगनादेश दे दिया और 10 साल की लड़ाई के बाद 2014 में हाई कोर्ट ने हुडा द्वारा दिए गए भूमि अधिग्रहण के आदेश रद्द कर दिए थे। हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ हुडा ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की तो अब सुप्रीम कोर्ट ने 11 मई को हाई कोर्ट का फैसला सही ठहरा दिया है।


विजेता किसान बोले
हमारी जमीन कौड़ियों के भाव चली जाती तो हम सभी किसान उजड़ जाते। रोजगार का कोई साधन नहीं बचता। तत्कालीन सरकार ने हमारे साथ नाइंसाफी की थी, लेकिन हमारे साथ न्याय करने के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट और अब उच्चतम न्यायालय का भी शुक्रिया।
-श्रीराम यादव एवं अन्य किसान।
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