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बिजली संकट से उद्योगों को हो रहा भारी नुकसान

Thu, 01 Sep 2022 01:12 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 01 Sep 2022 01:12 AM IST
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Heavy losses to industries due to power crisis
बहादुरगढ़। बिजली की कमी से क्षेत्र के उद्योगों में उत्पादन पर बहुत बुरा असर पड़ रहा है। खासतौर से चौबीसों घंटे प्रोसेसिंग वाली इकाईयों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। फिलहाल तो हालत खराब है ही, पर्यावरण को स्वच्छ बनाए रखने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग एनसीआर में अधिक सख्ती बरत रहा है। आयोग ने आदेश दिए हैं कि एक अक्तूबर के बाद बिजली, पीएनजी और बायोमास फ्यूल के बिना उद्योग नहीं चलाए जा सकते। यानी, डीजल जनरेटर सेट चलाने पर भी रोक लग जाएगी। उक्त आदेश लागू होने पर उद्योगों पर पिछले साल की तरह तगड़ी मार पड़ेगी। भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। इससे बहादुरगढ़ के उद्यमी बहुत चिंतित हैं और सरकार से नियमित बिजली देने अथवा डीजी सेट चलाने की अनुमति देने की मांग की है।
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दरअसल, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने सभी उद्योगों को एक अक्तूबर से पहले अपना उत्पादन कार्य केवल पीएनजी और बायोमास फ्यूल आधारित ईंधन पर करने के आदेश दिए हैं। जबकि बहादुरगढ़ के सभी औद्योगिक क्षेत्रों में फिलहाल पीएनजी की आपूर्ति शुरू ही नहीं हुई है। उद्योगों को कनेक्शन मिलने में भी कठिनाई आ रही है। इस तरह औद्योगिक इकाइयों को कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। उद्योगों को 24 घंटे निर्बाध बिजली मिलती ही नहीं। जिस कारण उद्यमी फिलहाल तो डीजी सेट का प्रयोग कर लेेते हैं लेकिन आयोग के आदेश के अनुसार एक अक्तूबर से डीजी सेट पर भी रोक लग जाएगी। कॉन्फेडरेशन ऑफ बहादुरगढ़ इंडस्ट्रीज (कोबी) के प्रधान प्रवीण गर्ग ने बताया कि आयोग ने रेट्रोफिटेड कंट्रोल डिवाइस और ड्यूल फ्यूल वाले डीजी सेट चलाने की छूट दी है। लेकिन बहादुरगढ़ में इनका कोई भी सरकारी वेंडर नहीं है, ताकि डीजी सेट में यह डिवाइस लगवाया जा सके। पीएनजी का जेनसेट भी यहां उपलब्ध नहीं होता।
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बहादुरगढ़ के गणपति धाम औद्योगिक क्षेत्र के उद्यमी अशोक कुमार ने बताया कि दिन में छह-सात बार बिजली जाती है, जिससे उत्पादन पर बहुत बुरा असर पड़ता है। चौबीस घंटे प्रोसेसिंग वाली इकाईयों में तो भारी नुकसान होता है। पीएनजी की प्रमाणित किट और अन्य उपकरणों वाला भी कोई सरकारी वेंडर यहां नहीं है। जो हैं उनके मूल्य भी अधिक हैं। छोटी औद्योगिक इकाइयां इतने महंगे दामों को सहन नहीं कर सकती। ऐसे में आयोग द्वारा लिए गए फैसले को जमीनी स्तर पर लागू करने की संभावनाएं काफी कम हैं। आयोग की सख्ती से पिछले साल की तरह इस बार भी उद्योगों को भारी नुकसान होगा। कई औद्योगिक इकाइयां बंद हो सकती हैं। श्रमिकों के समक्ष भी रोजगार का संकट खड़ा हो सकता है। प्रतिदिन 24 घंटे पर्याप्त वोल्टेज वाली बिजली मिले अथवा डीजल जेनरेटर सेट चलाने की छूट दे दी जाए तो इस संकट से बचा जा सकता है।
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बहादुरगढ़ चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के वरिष्ठ उपाध्यक्ष विकास आनंद सोनी ने बताया कि शहर के आधुनिक औद्योगिक क्षेत्र की कई इकाईयों में पाइप लाइन बिछा ली गई है। पीएनजी कनेक्शन लेने के लिए प्रतिभूति राशि के साथ आवेदन कर चुकी हैं, लेकिन इन उद्योगों को गैस का कनेक्शन नहीं मिल पा रहा है। इसलिए मजबूरी में कोयले का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। यह बहुत महंगा भी पड़ता है। इस महीने में गैस कनेक्शन नहीं मिला तो एक अक्तूबर से उत्पादन बंद ही करना पड़ेगा। जिले के उद्योगों की 19 संस्थाओं के बड़े संगठन कोबी की तरफ से राज्य के उप मुख्यमंत्री एवं उद्योग मंत्री और संबंधित उच्च अधिकारियों को पत्र लिखकर भी उद्योगों के समक्ष चल रहे बिजली संकट से अवगत करवाया जा चुका है।

वर्जन
बहादुरगढ़ में छोटे-बड़े चार हजार से अधिक उद्योग चलते हैं। जिनमें करीब पांच लाख लोग काम करते हैं। हम सरकार को अरबों रुपये राजस्व भी देते हैं। इसलिए सरकार से ये अपेक्षा भी रखते हैं कि हमें नियमित रूप से बिजली मिले और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग जैसी एजेंसियां उद्योगों के हितों का भी ध्यान रखें। -प्रवीण गर्ग, प्रधान, कोबी
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