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Haryana: टीकरी बॉर्डर सील होने के बाद पेट्रोल पंप पड़े खाली, कारोबार हुआ ठप
Fri, 16 Feb 2024 10:04 PM IST
भूपेंद्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, बहादुरगढ़ (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, बहादुरगढ़ (हरियाणा)
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Fri, 16 Feb 2024 10:04 PM IST
सार
टीकरी बॉर्डर से लेकर सेक्टर 9 मोड़ तक अधिकतर दुकानें बंद हैं। टीकरी बॉर्डर पर 5 पेट्रोल और सीएनजी पंप स्थित हैं। पांच पेट्रोल और सीएनजी पंप पर चार दिनों में सवा दो करोड़ से ज्यादा का नुकसान हो चुका है।
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टीकरी बॉर्डर पर स्थित पेट्रोल पंप पड़ा सूना।
- फोटो : संवाद
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विस्तार
किसानों को दिल्ली कूच से रोकने के लिए चार दिनों से पुलिस प्रशासन द्वारा टीकरी बॉर्डर और सेक्टर-9 मोड़ सील होने के कारण व्यापारियों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। दिल्ली स्थित टीकरी बॉर्डर क्षेत्र में पेट्रोल और सीएनजी पंप बंद हैं। वहीं बहादुरगढ़ में सेक्टर-9 मोड़ से टीकरी बॉर्डर तक की दोनों तरफ की दुकानदारों का कारोबार ठप हो गया है।
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टीकरी बॉर्डर पर पंप बंद होने से प्रतिदिन सवा दो करोड़ से ज्यादा का नुकसान संचालकों को हो रहा है। साथ ही पेट्रोल पंप पर काम करने वाले कर्मचारियों को भी अपना रोजगार बंद होने की चिंता सताने लगी है। पेट्रोल पंप खाली पड़े रहते हैं।
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टीकरी बॉर्डर पर दोनों तरफ मिलाकर पांच पेट्रोल और सीएनजी पंप हैं। एक पेट्रोल पंप पर काम करने वाले रिंकू सिंह और विक्की ने बताया कि यहां अब कोई भी गाड़ियां नहीं आ रही हैं। कर्मचारी पूरे दिन खाली खड़े रहते हैं।
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पेट्रोल पंप मालिक को लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है तो यहां काम करने वाले कुछ मजदूर को भी वापस भेज दिया गया है। कर्मचारियों को अपने काम धंधे की चिंता सताने लगी है। किसान आंदोलन कितना लंबा चलता है। इसका कोई अंदाजा नहीं है।
उन्होंने कहा कि पिछली बार भी सवा साल तक पेट्रोप पंप बंद होने के कारण मालिक को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ था। बाद में जब आंदोलन खत्म हुआ और पंप को चालू किया गया तो उसे ठीक करने में भी लाखों रुपये खर्च करने पड़े थे।
इनका कहना है कि सड़क पूरी तरह बंद कर देना कहीं से भी समस्या का समाधान नहीं है। सरकार और किसानों को बैठकर बात करनी चाहिए। इसका हल निकालना चाहिए। रास्ते बंद होने के कारण आम लोगों को अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
पंपों आम दिनों में भीड़ लगी रहती थी। अब ये सूने पड़े हैं। पेट्रोल पंप पर काम करने वाले कर्मचारियों ने बताया कि एक पंप पर प्रतिदिन पांच लाख रुपये की गैस बिक्री होती थी। जबकि चार लाख रुपये डीजल और पेट्रोल बिकता था, लेकिन चार दिनों से मशीनें ठप पड़ी हैं। कुल मिलाकर टीकरी बॉर्डर पर स्थित पांच पंपों पर प्रतिदिन 45 लाख रुपये का कारोबार होता था।