Jhajjar: कारगिल में शहीद हुए था झज्जर का जवान धर्मवीर,अंतिम चिट्ठी आज भी परिवार को कर देती है भावुक
शहीद धर्मवीर की याद में गांव ढाकला में उनकी प्रतिमा लगाई हुई है। 7 जुलाई को शहीद रामफल की बरसी है। इस दिन उनकी प्रतिमा के पास हवन यज्ञ का आयोजन किया जाएगा। उसके बाद प्रसाद का वितरण किया जाएगा।
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धर्मवीर की वीरांगना ने किया बच्चों का लालन-पोषण
चिट्ठी के ये शब्द आज भी विद्या देवी को याद हैं और उनको याद कर वह भावुक हो जाती हैं। शहीद धर्मवीर की वीरांगना कहती हैं कि उनकी एक बेटी और एक बेटा है। जब पति शहीद हुए तब बेटी दो साल और बेटा 6 माह का था। ऐसी विपरीत परिस्थितियों में भी कभी हौसला नहीं छोड़ा। अपने दम पर खड़े होकर बच्चों की परवरिश की। अब लोकेश वकील है जबकि बेटी सोनी डॉक्टर है।
लड़ाई से पहले छुट्टी पर आना था, लेकिन नहीं आ सके
विद्या देवी ने कहा कि पति शहीद धर्मवीर को मई-जून में छुट्टी पर घर आना था, लेकिन सीमा पर तनाव बना हुआ था। इस कारण छुट्टियां रद्द कर दी गई थीं। इसके बाद वह लड़ाई पर चले गए। वहां उनको पांव में गोली लगी थी, जिसके बाद भी वह लड़ते रहे और बाद में लड़ते हुए वह शहीद हो गए। साल 1999 के दौरान, सिपाही धर्मवीर सिंह की यूनिट को नियंत्रण रेखा पर जम्मू और कश्मीर में तैनात किया गया था।
सिपाही धर्मवीर सिंह की 17 जाट बटालियन, कर्नल यूएस बावा की कमान में 22 मई 1999 को मुश्कोह घाटी में शामिल की गई थी। बटालियन 79 माउंटेन ब्रिगेड (79 माउंटेन बीडीई) की कमान के तहत काम कर रही थी, जिसमें समग्र परिचालन नियंत्रण मेजर जनरल मोहिंदर पुरी के अधीन 8 माउंटेन डिव (माउंटेन डिवीजन) की ओर से किया जा रहा था। मुश्कोह में दुश्मन के ऑपरेशनों को रोकने और उनकी वापसी को तेज करने के लिए इसका कब्जा महत्वपूर्ण था। 79 माउंटेन ब्रिगेड ने ब्रिगेडियर आरके काकर की कमान में पीटी 4875 पर कब्जा करने के लिए एक साहसिक योजना बनाई, जिसमें आर्टिलरी समर्थन के साथ 17 जाट, 13 जेएके रिफ, 2 नागा, 12 महार और 21 पैरा (एसएफ) की मदद ली गई।
मेजर रितेश शर्मा के नेतृत्व में 17 जाट की चार्ली कंपनी ने व्हेल बैक की दिशा से 6 जुलाई की रात को पिंपल II पर हमला किया। हमले के शुरुआती चरण के दौरान, कैप्टन नैयर के कंपनी कमांडर मेजर रितेश शर्मा छर्रे लगने से घायल हो गए और उन्हें निकाला गया। कैप्टन नैयर जिन्हें कारगिल युद्ध के दौरान ही कैप्टन के पद पर पदोन्नत किया गया था ने कंपनी कमांडर का पद संभाला।
पाकिस्तानी घुसपैठियों ने पीटी 4875 पर कई बंकरों का निर्माण किया था और कैप्टन नैयर के सैनिकों ने 4 दुश्मन बंकरों का पता लगाया, जो हमारे सैनिकों पर स्वचालित मशीनगनों से हमला कर रहे थे। कैप्टन नैयर और उनके सैनिकों ने सराहनीय साहस के साथ मुकाबला किया और पीटी 4875 पर सभी चार दुश्मन बंकरों को साफ कर दिया। सिपाही धर्मवीर सिंह और उनके साथियों ने 7 जुलाई 1999 को निर्धारित लक्ष्य पर कब्जा करने में सफलता प्राप्त की। हालांकि, मोप-अप ऑपरेशन में सिपाही धर्मवीर सिंह दुश्मन की गोलीबारी में घायल हो गए और वह शहीद हो गए।
7 जुलाई को शहीद की बरसी
शहीद धर्मवीर की याद में गांव ढाकला में उनकी प्रतिमा लगाई हुई है। 7 जुलाई को शहीद रामफल की बरसी है। इस दिन उनकी प्रतिमा के पास हवन यज्ञ का आयोजन किया जाएगा। उसके बाद प्रसाद का वितरण किया जाएगा।