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Jhajjar-Bahadurgarh News: गोरिया के ग्रामीणों ने सांसद को प्रदूषण से बचाने को सौंपा ज्ञापन
Thu, 18 Dec 2025 02:22 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Thu, 18 Dec 2025 02:22 AM IST
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साल्हावास। गांव गोरिया में लगने वाले एथनॉल प्लांट को लेकर ग्रामीण सांसद दीपेंद्र हुड्डा से मिले और ज्ञापन सौंपा। ग्रामीण उमेश गोरिया, मनोज गोरिया, साधूराम, सतीश गोरिया, हवा सिंह गोरिया, प्रताप गोरिया, महावीर गोरिया, महावीर यादव ने बताया कि उनकी जमीन समतल व उपजाऊ जमीन है। यहां प्रदूषण बढ़ेगा ओर समस्या बढ़ेगी।
बताया गया कि 70 प्रतिशत जमीन छोटे और मार्जिनल किसानों के पास है, जिनके पास 2 हेक्टेयर तक जमीन है। मातनहेल ब्लॉक में 10 किलोमीटर के दायरे में छह प्लांट यानी दो सुपर क्रिटिकल कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट और चार सीमेंट प्लांट बन गए हैं। ये सभी प्लांट हवा, ध्वनि और पानी का प्रदूषण कर रहे हैं।
यह क्षेत्र औद्योगीकरण की वजह से बहुत ज्यादा प्रदूषित इलाका वाला क्लस्टर है। औद्योगीकरण की वजह से हवा की क्वालिटी बिगड़ गई है और प्रदूषण बढ़ रहा है। इसकी वजह से सांस से जुड़ी बहुत बीमारियां होने लगी हैं। अब यहां इथेनॉल प्लांट लगाया जा रहा है। इससे हवा, ध्वनि प्रदूषण, जल प्रदूषण, पर्यावरण संबंधी मुद्दे और जैव-विविधता को खतरा बढ़ेगा।
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इथेनॉल बनाने के दौरान एसीटैल्डिहाइड, फॉर्मेल्डिहाइड और एक्रोलीन जैसी खतरनाक गैसें निकलती हैं। इस प्लांट से निकलने वाला गंदा पानी आसपास के तालाबों और खेती के खेतों को गंदा कर देगा क्योंकि इसकी निकासी के लिए जगह व नाला नहीं है। किसानों से जमीन धोखे से ली गई है। इस पर सीएलयू एवं सीटीई भी नहीं मिली है।
बताया कि नियमों को अनदेखी करते हुए निर्माण कार्य आरंभ करवा दिया है। अब उनकी मांग है कि इस प्लांट को यहां से हटवाया जाए। सांसद ने उचित आश्वासन दिया कि जल्द ही पर्यावरण मंत्री से कमेटी को मिलवाया जाएगा। इस मामले को लोकसभा में उठाने का आश्वासन दिया है।
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बताया गया कि 70 प्रतिशत जमीन छोटे और मार्जिनल किसानों के पास है, जिनके पास 2 हेक्टेयर तक जमीन है। मातनहेल ब्लॉक में 10 किलोमीटर के दायरे में छह प्लांट यानी दो सुपर क्रिटिकल कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट और चार सीमेंट प्लांट बन गए हैं। ये सभी प्लांट हवा, ध्वनि और पानी का प्रदूषण कर रहे हैं।
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यह क्षेत्र औद्योगीकरण की वजह से बहुत ज्यादा प्रदूषित इलाका वाला क्लस्टर है। औद्योगीकरण की वजह से हवा की क्वालिटी बिगड़ गई है और प्रदूषण बढ़ रहा है। इसकी वजह से सांस से जुड़ी बहुत बीमारियां होने लगी हैं। अब यहां इथेनॉल प्लांट लगाया जा रहा है। इससे हवा, ध्वनि प्रदूषण, जल प्रदूषण, पर्यावरण संबंधी मुद्दे और जैव-विविधता को खतरा बढ़ेगा।
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इथेनॉल बनाने के दौरान एसीटैल्डिहाइड, फॉर्मेल्डिहाइड और एक्रोलीन जैसी खतरनाक गैसें निकलती हैं। इस प्लांट से निकलने वाला गंदा पानी आसपास के तालाबों और खेती के खेतों को गंदा कर देगा क्योंकि इसकी निकासी के लिए जगह व नाला नहीं है। किसानों से जमीन धोखे से ली गई है। इस पर सीएलयू एवं सीटीई भी नहीं मिली है।
बताया कि नियमों को अनदेखी करते हुए निर्माण कार्य आरंभ करवा दिया है। अब उनकी मांग है कि इस प्लांट को यहां से हटवाया जाए। सांसद ने उचित आश्वासन दिया कि जल्द ही पर्यावरण मंत्री से कमेटी को मिलवाया जाएगा। इस मामले को लोकसभा में उठाने का आश्वासन दिया है।