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पहले से कम हुई आतिशबाजी, चार लोग झुलसे
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झज्जर। दीपावली पर्व पर इस बार पिछले वर्षों की अपेक्षा आतिशबाजी काफी कम करीब 50 फीसदी कम हुई है। इस बार लोगों में कुछ हद तक जागरूकता दिखाई दी। शहरी क्षेत्र में सोमवार रात आठ बजे के बाद पटाखों की आवाज आने लगी और करीब 11 बजे तक शांति हो गई थी। हालांकि ग्रामीण क्षेत्र में लोग मध्यरात्रि के बाद तक आतिशबाजी जारी रही। आतिशबाजी के कारण चार लोग झुलस कर झज्जर के सामान्य अस्पतात पहुंचे। इनमें से एक को चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद रोहतक पीजीआई रेफर कर दिया है।
क्षेत्र के दुजाना व अंबोली गांव में आतिशबाजी के चलते घासफूस में आग लग गई। जिस पर ग्रामीणों ने खुद के प्रयासों से ही काबू पा लिया। हालांकि दुजाना के ग्रामीणों की सूचना पर अग्निशमन की गाड़ी को भी दमकल केंद्र से रवाना कर दिया गया था। लेकिन गाड़ी के मौके पर पहुंचने से पहले ही लोगों ने काबू पा लिया और गाड़ी को बीच रास्ते से वापस भेज दिया गया।
दिवाली से पहले दिन शहर में वायु गुणवत्ता सूचकांक का स्तर 218 था। लेकिन दीपावली के एक दिन बाद वायु गुणवत्ता सूचंकाक का स्तर 329 तक पहुंच गया। जिसके चलते वाहन चालकों को आंखों में जलन महसूस हो रही थी। मंगलवार सुबह वायु गुणवत्ता सूचकांक 318 था व शाम को 329 तक स्तर पहुंच गया था। इस दौरान दमा व सांस के मरीजों को सांस लेने में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ा। वहीं क्षेत्र के भटेड़ा गांव से चार लोग मारपीट से संबंधित मामलों में घायल होने पर इलाज के लिए सामान्य अस्पताल में पहुंचे।
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क्षेत्र के दुजाना व अंबोली गांव में आतिशबाजी के चलते घासफूस में आग लग गई। जिस पर ग्रामीणों ने खुद के प्रयासों से ही काबू पा लिया। हालांकि दुजाना के ग्रामीणों की सूचना पर अग्निशमन की गाड़ी को भी दमकल केंद्र से रवाना कर दिया गया था। लेकिन गाड़ी के मौके पर पहुंचने से पहले ही लोगों ने काबू पा लिया और गाड़ी को बीच रास्ते से वापस भेज दिया गया।
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दिवाली से पहले दिन शहर में वायु गुणवत्ता सूचकांक का स्तर 218 था। लेकिन दीपावली के एक दिन बाद वायु गुणवत्ता सूचंकाक का स्तर 329 तक पहुंच गया। जिसके चलते वाहन चालकों को आंखों में जलन महसूस हो रही थी। मंगलवार सुबह वायु गुणवत्ता सूचकांक 318 था व शाम को 329 तक स्तर पहुंच गया था। इस दौरान दमा व सांस के मरीजों को सांस लेने में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ा। वहीं क्षेत्र के भटेड़ा गांव से चार लोग मारपीट से संबंधित मामलों में घायल होने पर इलाज के लिए सामान्य अस्पताल में पहुंचे।
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