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गोल्डन मुस्कान: मनु भाकर ने 2016 में सीबीएसई की प्रतियोगिता में जीता था गोल्ड, फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा

Tue, 08 Mar 2022 01:41 AM IST
रोहतक ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर (हरियाणा) Published by: रोहतक ब्यूरो Updated Tue, 08 Mar 2022 01:41 AM IST
सार

मनू बचपन में निशानेबाजी के साथ मुक्केबाजी, एथलेटिक्स, स्केटिंग और जूडो कराटे भी खेलती थी। मनू जब दसवीं में पढ़ती थी तब यूनिवर्सल स्कूल गोरिया में शूटिंग रेंज बनीं।

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Five years of hard work took Manu to the Olympics
मनु भाकर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

हरियाणा के झज्जर की रहने वाली गोल्डन गर्ल के नाम से चर्चा में आई मनू भाकर आज किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। सीबीएसई 2016 नेशनल चैंपियनशिप में महिला वर्ग में उन्होंने पहला गोल्ड मेडल प्राप्त किया। उसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर कभी नहीं देखा। करीब पांच साल की मेहनत से पिछले साल ओलंपिक तक पहुंच गईं।

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मनु भाकर का जन्म 18 फरवरी 2002 को झज्जर के गोरिया गांव में हुआ था। इनके पिता रामकिशन भाकर इंजीनियर हैं और मां सुमेधा स्कूल में प्राचार्य रही हैं। मनू वर्ष 2017 में यूूूनिवर्सल स्कूल गोरिया से दसवीं पास की और 2019 में इसी स्कूल से बारहवीं तक की शिक्षा ग्रहण की। वह वर्तमान में श्रीराम कॉलेज दिल्ली में स्नातक की शिक्षा ग्रहण कर रही हैं।
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मनू बचपन में निशानेबाजी के साथ मुक्केबाजी, एथलेटिक्स, स्केटिंग और जूडो कराटे भी खेलती थी। मनू जब दसवीं में पढ़ती थी तब यूनिवर्सल स्कूल गोरिया में शूटिंग रेंज बनीं। जिसमें झाड़ली निवासी कोच अनिल जाखड़ प्रशिक्षण दिया करते थे। एक बार मनू शूटिंग रेंज में निशाना लगाने के लिए गईं।
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उन्होंने पहली बार में ही सटीक निशाना लगाया। इस पर कोच ने मनू से दूसरा निशाना लगाने के लिए कहा। उन्होंने दूसरा निशाना भी सही लगाया। उसके बाद कोच ने उन्हें ट्रेनिंग देनी शुरू की। मनू भाकर को अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी बनाने में मां ने हमेशा ही प्रोत्साहित किया है।

जब मनू की उम्र 18 साल से कम थी तब पिता ने अपनी नौकरी छोड़ दी। अपनी लाइसेंसी पिस्टल के साथ बेटी को प्रशिक्षण के लिए छोड़ने जाने लगे। किसी नाबालिग के लिए सार्वजनिक परिवहन में यात्रा के दौरान पिस्टल साथ ले जाना अवैध है। इसके लिए भाकर को 2012 ओलंपिक के बाद गठित किए गए राष्ट्रीय राइफल एसोसिएशन और भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) से मदद मिली।

मनू भाकर को देश के प्रतिष्ठित शूटर जसपाल राणा ने कोचिंग दी। साल 2017 में मनु ने केरल में नेशनल चैंपियनशिप में नौ स्वर्ण पदक जीतकर नया रिकॉर्ड बनाया। इसी वर्ष एशियाई जूनियर चैंपियनशिप में भाकर ने रजत पदक अपने नाम किया। मैक्सिको के गुआदालाजरा में 2018 अंतरराष्ट्रीय स्पोर्ट शूटिंग वर्ल्ड कप के 10 मीटर एयर पिस्टल फ़ाइनल में भाकर ने दो बार के चैंपियन अलेजांद्रा जवाला को हराया। इस जीत से वह वर्ल्ड कप में स्वर्ण पदक जीतने वाली सबसे कम उम्र की भारतीय खिलाड़ी बन गईं।

उन्होंने 2018 में आईएसएसएफ जूनियर विश्व कप में भी डबल स्वर्ण जीता। उसी वर्ष 16 साल की उम्र में उन्होंने 2018 राष्ट्रमंडल खेलों में महिलाओं की 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता। अपने स्कोर के साथ साथ उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों में नया रिकॉर्ड भी स्थापित कर किया।

मई 2019 में मनु ने म्यूनिख आईएसएसएफ़ विश्व कप में चौथे स्थान पर रहने के साथ 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में 2021 टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालिफाई किया। अगस्त 2020 में मनु भाकर को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने वर्चुअल पुरस्कार समारोह में अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया। हाल ही में मनू भाकर भीम अवार्ड के लिए चयनित हुई हैं।

मनू फिलहाल फरीदाबाद में अपनी मां के साथ रहकर डॉक्टर करणी सिंह शूटिंग रेंज में अभ्यास करती हैं। मां के हाथ का खीर चूरमा उन्हें बहुत पसंद है। भावी योजना के बारे में जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वे खेलो इंडिया, एशियन गेम्स, ओलंपिक में स्वर्ण पदक प्राप्त करने के लिए लगातार अभ्यास कर रही हैं।


मनू भाकर ने कहा कि पिछले ओलंपिक में वे पिस्टल में तकनीकी खराबी के कारण पदक प्राप्त नहीं कर पाई। जिसका उन्हें मलाल है, लेकिन अबकी बार ओलंपिक के साथ साथ एशियन गेम्स, खेेेलो इंडिया में स्वर्ण पदक प्राप्त करना एकमात्र लक्ष्य है। वे प्रतिदिन सुुबह-शाम योगा व मेडिटेशन करती हैं। हर उपलब्धि पर परिजनों खासकर दादी दयाकौर से आशीर्वाद लेना नहीं भूलती हैं।

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