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कल संपूर्ण क्रांति दिवस मनाएंगे किसान, आज देहात में निकालेंगे बाइक रैली
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बहादुरगढ़। नयागांव चौक के पास वीरवार को भारतीय किसान यूनियन एकता (उगराहां) की सभा हुई। सभा में किसानों ने शनिवार 5 जून को संपूर्ण क्रांति दिवस मनाने की योजना बनाई। इस दिन भाजपा विधायकों व अन्य नेताओं के दफ्तरों के समक्ष तीन नए कृषि कानूनों की प्रतियां जलाई जाएंगी। बहादुरगढ़ में यह ऐसा प्रदर्शन एसडीएम कार्यालय पर होगा। इसमें भीड़ जुटाने के लिए आंदोलनकारी किसान एक दिन पहले शुक्रवार को आसपास के गांवों में बाइक रैली निकालकर ग्रामीणों का प्रदर्शन का न्योता देंगे।
वीरवार को भाकियू एकता (उगराहां) की सभा के मंच से किसानों को यूनियन के जिला संगरूर के प्रधान अमरीक सिंह गंढूआं समेत कई किसान नेताओं ने संबोधित किया। अमरीक सिंह ने कहा कि तीनों कृषि कानून पिछले साल 5 जून को बिल के रूप में आए थे। इनके एक साल पूरा होने पर रोष प्रकट करने के लिए संयुक्त किसान मोर्चो के आह्वान पर 5 जून को इन कानूनों की प्रतियां सार्वजनिक रूप से जलाई जाएंगी। बहादुरगढ़ में यह प्रदर्शन एसडीएम दफ्तर के आगे होगा। इसकी अधिक तैयारी के लिए शुक्रवार को मोटरसाइकिल और गाड़ियों में आसपास के गांवों में मार्च निकालकर प्रदर्शन का न्योता दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि राजनीतिक नेताओं को किसान मजदूरों की समस्याओं की कोई चिंता नहीं होती। जनता की वोट से जीतकर वे जनता के ही खिलाफ कानून बनाते हैं। किसानों की फसल नहीं बिकती तो मदद नहीं करते। बल्कि किसान संगठन ही धरने देकर लोगों के बड़े मसले हल करवाते हैं। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन छह महीने से चल रहा है, लेकिन सियासी दल कुछ नहीं कर रहे। पंजाब का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि 2006 में पंजाब की कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बरनाला के नजदीक तीन गांवों की जमीन एक कंपनी को दे दी और इसके खिलाफ संघर्ष करने वाले किसानों के विरुद्ध सरकार की सारी मशीनरी झोंक दी। उसके बाद 2007 में मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने भी यही कुछ किया। अंत में संगठन ने संघर्ष करके ही किसानों को इंसाफ दिलाया था।
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सहकारी सभाएं कर्मचारी यूनियन पंजाब के पूर्व प्रधान गुरमेल सिंह भरोवाल ने कहा कि केंद्र सरकार लोगों के साथ अन्याय कर रही है। कानून बनाकर किसानों की जमीन कॉर्पोरेट घरानों को कौड़ियों के भाव देना चाहती है। लेकिन किसान संगठन सरकार की मनमानी नहीं चलने देंगे। जिला बठिंडा के समिति मेंबर जगसीर सिंह झूंबा ने कहा कि संघर्ष करने वाले लोग कभी हारते नहीं। बलवंत सिंह मलसिया, सुखवंत सिंह और अमरजीत कौर समालसर ने भी सभा में विचार व्यक्त किए।
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वीरवार को भाकियू एकता (उगराहां) की सभा के मंच से किसानों को यूनियन के जिला संगरूर के प्रधान अमरीक सिंह गंढूआं समेत कई किसान नेताओं ने संबोधित किया। अमरीक सिंह ने कहा कि तीनों कृषि कानून पिछले साल 5 जून को बिल के रूप में आए थे। इनके एक साल पूरा होने पर रोष प्रकट करने के लिए संयुक्त किसान मोर्चो के आह्वान पर 5 जून को इन कानूनों की प्रतियां सार्वजनिक रूप से जलाई जाएंगी। बहादुरगढ़ में यह प्रदर्शन एसडीएम दफ्तर के आगे होगा। इसकी अधिक तैयारी के लिए शुक्रवार को मोटरसाइकिल और गाड़ियों में आसपास के गांवों में मार्च निकालकर प्रदर्शन का न्योता दिया जाएगा।
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उन्होंने कहा कि राजनीतिक नेताओं को किसान मजदूरों की समस्याओं की कोई चिंता नहीं होती। जनता की वोट से जीतकर वे जनता के ही खिलाफ कानून बनाते हैं। किसानों की फसल नहीं बिकती तो मदद नहीं करते। बल्कि किसान संगठन ही धरने देकर लोगों के बड़े मसले हल करवाते हैं। उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन छह महीने से चल रहा है, लेकिन सियासी दल कुछ नहीं कर रहे। पंजाब का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि 2006 में पंजाब की कांग्रेस सरकार के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने बरनाला के नजदीक तीन गांवों की जमीन एक कंपनी को दे दी और इसके खिलाफ संघर्ष करने वाले किसानों के विरुद्ध सरकार की सारी मशीनरी झोंक दी। उसके बाद 2007 में मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने भी यही कुछ किया। अंत में संगठन ने संघर्ष करके ही किसानों को इंसाफ दिलाया था।
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सहकारी सभाएं कर्मचारी यूनियन पंजाब के पूर्व प्रधान गुरमेल सिंह भरोवाल ने कहा कि केंद्र सरकार लोगों के साथ अन्याय कर रही है। कानून बनाकर किसानों की जमीन कॉर्पोरेट घरानों को कौड़ियों के भाव देना चाहती है। लेकिन किसान संगठन सरकार की मनमानी नहीं चलने देंगे। जिला बठिंडा के समिति मेंबर जगसीर सिंह झूंबा ने कहा कि संघर्ष करने वाले लोग कभी हारते नहीं। बलवंत सिंह मलसिया, सुखवंत सिंह और अमरजीत कौर समालसर ने भी सभा में विचार व्यक्त किए।