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किसानों के 15 किलोमीटर लंबे पड़ाव में जमकर बजी थालियां

Mon, 28 Dec 2020 01:53 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 28 Dec 2020 01:53 AM IST
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Farmers in 15 km long halt in plates rang
मन की बात नहीं सुनने के लिए थालियां बजाते किसान। संवाद - फोटो : Bahadurgarh
बहादुरगढ़। रविवार को टीकरी बॉर्डर-बहादुरगढ़ में फाजिल्का के वकील अमरीक सिंह की मौत हुई, तो किसानों के पूरे पड़ाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वक्तव्य मन की बात का थालियां, तालियां और गिटार आदि बजाकर विरोध किया गया। किसानों ने कहा कि प्रधानमंत्री हमारी सुनवाई नहीं कर रहे तो हम उनके मन की बात क्यों सुनें।
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टीकरी बॉर्डर पर किसानों की मुख्यसभा के मंच रविवार को दिन में 11 बजते ही किसानों ने थालियां और तालियां बजानी शुरू कर दी। नयागांव चौक की सभा में भी प्रधानमंत्री के भाषण के वक्त किसान लगातार शोर करते रहे। दिल्ली से आए कलाकार गुंजन और उनके साथियों ने किसानों को गिटार की धुन पर गाने सुनाए। कई जगह युवाओं ने प्रधानमंत्री के खिलाफ नारेबाजी की। किसान नेताओं ने कहा कि जब प्रधानमंत्री तीन काले कृषि कानूनों के मामले में किसानों की बात नहीं सुन रहे तो हम उनकी बात क्यों सुनें।
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हालांकि बाईपास पर पकौड़ा चौक के निकट उस स्थान पर सन्नाटे जैसी हालत रही जहां रविवार सुबह पंजाब के जिला फाजिल्का के किसान आंदोलकारी वकील अमरजीत सिंह की जहरीला पदार्थ खाने से मौत हो गई। फाजिल्का की जलालाबाद बार एसोसिएशन के सदस्य एडवोकेट अमरजीत फाजिल्का जिले के मंडी लाधूका के निवासी थे। वह 15 दिन से किसान आंदोलन में सक्रिय थे। उनके पास ही रहने वाले किसान जसप्रीत सिंह ने बताया कि एडवोकेट अमरजीत दूसरे किसानों को तीन कृषि कानूनों के प्रति जागरूक करते थे। वह कहते थे कि किसान पक्के संकल्प के साथ इस आंदोलन में डटे रहेंगे तो सरकार को ये कानून वापस लेने ही पड़ेंगे, एमएसपी भी मिलेगा।
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कैथल से आए किसान नेता इंद्रजीत, किसान सभा दिल्ली से युद्धवीर सिंह, निडानी के सरपंच दलीप सिंह और रोहतक से आए अहलावत 84 के प्रधान हरदीप सिंह ने टीकरी बॉर्डर पर हुई किसानों की मुख्य सभा के मंच से संबोधित कर आंदोलन को समर्थन दिया। सांपला से आए युवा बचाओ खेल बचाओ एसोसिएशन हरियाणा के अखाड़े के संचालक रामबीर पहलवान और उनके साथियों ने मशाल प्रदर्शन करके सरकार का ध्यान किसानों की मांगों की तरफ आकर्षित करने की कोशिश की।
बादली के पास ढांसा बॉर्डर पर भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी ने किसानों का जोश बढ़ाया। उन्होंने कहा कि सरकार चाहे तो बिना बातचीत भी समाधान हो सकता है। सोमवार 28 दिसंबर को होने वाली बातचीत पर कहा कि सरकार तीनों कानूनों को निरस्त कर दे तो किसान अपने घर वापिस लौट जाएंगे और बातचीत की जरूरत भी नहीं होगी। आंदोलन की नई रणनीति के बारे में उन्होंने बताया कि आंदोलन के साथ-साथ प्रदेश के सभी टोल अनिश्चित काल के लिए फ्री करवाए जाएंगे। रिलायंस और रामदेव के उत्पादों का बहिष्कार किया जाएगा।

ऑल इंडिया किसान खेत मजदूर संगठन से जुड़े किसान मजदूरों ने केंद्र सरकार के कृषि संबंधी कानूनों और बिजली बिल के विरोध में प्रदेश कमेटी सचिव जयकरण मांडोठी की अगुवाई में सेक्टर-9 मोड़ के पास प्रदर्शन किया। केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए इन चारों बिलों को रद्द करने की मांग की गई।
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