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किसानों और मजदूरों की बात कब करेंगे पीएम

Tue, 01 Jun 2021 12:52 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 01 Jun 2021 12:52 AM IST
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farmer protest in
किसान बोले : किसानों और मजदूरों की बात कब करेंगे पीएम
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संवाद न्यूज एजेंसी
बहादुरगढ़।
तीन कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों ने सोमवार को नयागांव चौक के पास बीबी गुलाब कौर नगर में सभा का आयोजन किया। सभा को संबोधित करते हुए भारतीय किसान यूनियन एकता (उगराहां) के सचिव सिंगारा सिंह मान ने कहा कि न जाने प्रधानमंत्री अपने मन की बात प्रोग्राम में किसानों और मजदूरों की बात कब करेंगे।
सिंगारा सिंह मान ने कहा, दरअसल किसानों के बारे में प्रधानमंत्री के मन की बात यही है कि वह किसानों की जमीन कॉर्पोरेट घरानों को कौड़ियों के भाव देना चाहते हैं और इसी उद्देश्य से उन्होंने तीन नए कृषि कानून बनाए हैं। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार हरेक मोर्चे पर विफल रही है। सरकार ने नोटबंदी के समय कहा था कि विदेशों से काला धन वापस आएगा, लेकिन मेहनती लोगों की जेबें खाली करा कर उन्हें लाइनों में खड़ा कर दिया। किसानों को बैंकों के डिफाल्टर होना पड़ा। सरकार ने जीएसटी के बहाने जरूरी वस्तुओं पर भी कमर तोड़ टैक्स लगा दिए। प्रधानमंत्री ने कहा था कि उनकी सरकार हर साल दो करोड़ लोगों को रोजगार देगी, लेकिन इसके उलट रोजगार पहले की अपेक्षा भी घटा है। सरकार की तरफ से कहा जा रहा है कि किसानों की आमदनी दोगुनी हो जाएगी मगर इसके उलट किसान मजदूर आत्महत्या करने पर मजबूर हो गए हैं। कामगार लोग अधिक ऋणी हो रहे हैं। मान ने कहा कि सरकार का मानव अधिकार आयोग कुंभकरणी नींद सो रहा है और उसे दिल्ली की ड्योढ़ी पर अपने हकों के लिए संघर्ष कर रहे लोग दिखाई नहीं दे रहे।
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जिला संगरूर प्रधान अमरीक सिंह गढूआं ने मुख्यमंत्री मनोहर लाल के इस बयान को हास्यास्पद कहा कि किसानों के संघर्ष से कोरोना वायरस फैल रहा है। उन्होंने कहा कि कोरोना को काबू करने के लिए सरकार ने पुख्ता प्रबंध नहीं किए। जरूरत अनुसार डॉक्टरों और स्टाफ की भर्ती नहीं की गई। पर्याप्त आक्सीजन प्लांट नहीं लगाए गए। अस्पतालों, वेंटिलेटर और आईसीयू का अभाव रहा। उन्होंने कहा कि किसानों की भीड़ से कोरोना फैलता है तो पिछले दिनों अस्पताल के उद्घाटन के बहाने मुख्यमंत्री द्वारा भीड़ जुटाने से क्या कोरोना कम हो रहा था। जनता अपने हकों के लिए संघर्ष करती है तो जनता को कोरोना फैलाने का दोष दिया जाता है। किसान नेता ने कहा कि सरकार को तीनों नए कृषि कानून वापस लेने ही पड़ेंगे। सोमवार को सभा संचालन की जिम्मेवारी मनप्रीत सिंह सिंघावाला ने संभाली। मनोहर सिंह सिंघावला, गुरदेव सिंह पटियाला, बिट्टू, हरमन दीप सिंह टल्लेवाल और गुरचरण सिंह चहल ने भी संबोधित किया।
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-फोटो 5 : सभा में अपने विचार व्यक्त करते अमरीक सिंह गढूआं।
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