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किसानों को आंदोलन में बल देती है महापुरुषों की प्रेरणा

Tue, 05 Jan 2021 01:20 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 05 Jan 2021 01:20 AM IST
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farmer protest
एकाग्रता से वक्ताओं की बात सुनती महिलाएं। - फोटो : Bahadurgarh
बहादुरगढ़। तीन कृषि कानूनों को रद्द करवाने और कानून बनाकर कृषि उपजों के न्यूनतम समर्थन मूल्य सुनिश्चित करने की मांग को लेकर चल रहा किसान आंदोलन बेहद व्यवस्थित होने की वजह से ऐतिहासिक बन गया है। आंदोलन में भारतीय किसान यूनियन (एकता) डकौंदा समर्थक किसानों की व्यवस्था को देखने से सेना की याद आती है। यहां इन किसानों के पड़ाव में हर तरह की व्यवस्था देखने लायक है। आंदोलन में बेहतर व्यवस्था का श्रेय ये किसान महापुरुषों से मिलने वाली प्रेरणा को देते हैं।
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बहादुरगढ़ में दिल्ली-रोहतक बाईपास पर पकौड़ा चौक के निकट निर्माणाधीन ऑटो मार्केट का विशाल मैदान है। इसी मैदान में नजर आती हैं किसानों के ट्रैक्टर-ट्रालियों की बस्ती। इस पड़ाव को आंदोलकारियों ने नाम दिया है बीबी गुलाब कौर नगर। बताया गया है कि गुलाब कौर स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय रही। वह अंग्रेजों से टक्कर लेने वाले क्रांतिकारियों को हथियार उपलब्ध करवाती थी। यहां मौजूद किसान बलजिंदर सिंह ने बताया कि वे जीत के लिए आए हैं। जीत से पहले पीछे न हटने का संकल्प पक्का है। 26 नवंबर से शुरू हुए किसान आंदोलन के पहले ही हफ्ते में भारती किसान यूनियन (एकता) डकौंदा से जुड़े सैकड़ों किसान टीकरी बार्डर-बहादुरगढ़ पहुंच गए थे। जो किसान नेतृत्व के कहने तक बीबी गुलाब कौर नगर में रहेंगे। समय लंबा भी हो सकता है। इसलिए अनुशासन और व्यवस्था का पूरा ध्यान रखा गया है।
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बीबी गुलाब कौर नगर में हर सुबह जागरण के लिए 4 बजे ही लाउड स्पीकर पर जो बोले सो निहाल... सतश्री अकाल की आवाज सुनने को मिलती है तो अधिकतर किसान बिस्तर छोड़ देते हैं। साथ ही चाय की तैयारी शुरू हो जाती है। दैनिक क्रियाओं स्नानादि से निवृत्त होने के बाद गुरबाणी का पाठ किया जाता है। साथ-साथ नाश्ता बनता है और 9 बजे से पहले तकरीबन सभी किसान नाश्ता कर लेते हैं। इसके बाद शुरू होता है चर्चा और जागरूकता का दौर। ग्यारह बजे आरंभ हो जाती है कि किसानों की सभा। सभा मंच पर किसान नेताओं के अलावा, साहित्यकार, पत्रकार, वकील, कलाकार और अध्यापक भी किसानों को संबोधित करते हैं। कुछ किसान टीकरी बॉर्डर पर मुख्य सभाएं चले जाते हैं।
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तीन चार घंटे की सभा के बाद फिर शाम के भोजन की तैयारी शुरू हो जाती है। अपने घरों में रसोई घर से दूर रहने वाले किसान यहां खुश होकर सारे काम करते हैं। आलू गाजर की सब्जी काटते 64 वर्षीय किसान अमरीक सिंह कहते हैं सेवा के संस्कार हमारे खून में हैं। हम अपने लिए और दूसरों के लिए भोजन बनाते हैं और बर्तन भी साफ करते हैं।
बीबी गुलाब कौर नगर में हर तरह की व्यवस्था बेहतरीन रहती है। सभी किसान खुद सफाई करते हैं। गंदगी का कहीं नामोनिशान नहीं। लंगर में सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है। एक पंगत (भोजनार्थियों का बैच) के भोजन करने के बाद आधा घंटे का ब्रेक दिया जाता है। इसके बाद सफाई करके बुलाई गई दूसरी पंगत को लंगर परोसा जाता है।
युवा आंदोलनकारी अनुशासन में रहते हुए बेहद जोश रखते हैं। आंदोलनकारियों में ऊर्जा का संचार करते हैं। दिनभर नारे लगाते हैं। पूरे पड़ाव में रह रहे किसानों के लिए ट्रैक्टर टैंकर में भर पानी, मंडी से सब्जी और बाजार से राशन लाते हैं और रोजमर्रा के दूसरे काम करते हैं। युवा किसान हरेक ट्रैक्टर ट्रॉली के साथ ठीकरी पहरा देते हैं। संदीप सिंह ने कहा कि जिनको गुरु गोविंद सिंह जैसे गुरु मिले हों उनको काम से क्या घबराना। सरकार को मांगें तो हमारी माननी ही पड़ेंगी।
मानसा से आए कुलदीप सिंह ने बताते हैं कि हम भगत सिंह जैसे क्रांतिकारियों के वंशज हैं, कुर्बानी देकर भी अपने हकों के लिए लड़ेंगे। राजगुरु, सुखदेव, भगत सिंह से हमें समाज के लिए कुछ कर गुजरने की सीख मिलती है। अर्जन सिंह ने कहा कि गुरुओं ने हमें एकता का पाठ पढ़ाया है और एकता की ताकत के समक्ष सरकार के काले कानून टिक नहीं पाएंगे। बीबी गुलाब कौर नगर में काफी आंदोलनकारी प्रेरक पुस्तकों का अध्ययन भी करते हैं। इस कैंप में पढ़ने के लिए साहित्य प्रचुर मात्रा में मुफ्त उपलब्ध हो जाता है।
महिलाओं का कैंप में पूरा सम्मान है। महिलाएं भोजन बनाने में पुरुषों को मार्गदर्शन तो देती हैं, लेकिन अधिकतर काम पुरुष ही करते हैं। हरजीत कौर ने बताया कि पुरुष हमें पूरी इज्जत दे रहे हैं। लंगर का सारा काम वही करते हैं।

चरणजीत कौर कहती हैं कि हम आंदोलन की लंबी लड़ाई के लिए तैयार होकर आए हैं। हमने अपने इंतजाम पूरे कर लिए हैं। ठंड और बारिश की भी चिंता नहीं है। श्री गुरु नानक देव और श्री गुरु तेग बहादुर ने हमें धैर्य रखना सिखाया है। जीतकर ही जाएंगे।
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