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Jhajjar-Bahadurgarh News: जिम्मेदारों के दफ्तर में लगे एक्सपायर फायर सिलिंडर
Wed, 20 Mar 2024 11:12 PM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Wed, 20 Mar 2024 11:12 PM IST
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झज्जर एडीसी कार्यालय में लगें हुए एक्सपायरी डेट के अग्निशामक यंत्र ।संवाद
झज्जर। लघु सचिवालय और सरकारी अस्पताल में रोजाना हजारों लोगों का आवागमन रहता है, लेकिन इन दोनों जगहों पर लगे अग्निशमन यंत्रों की तिथि एक्पायर हो चुकी है। लघु सचिवालय में डीसी से लेकर जिला स्तरीय प्रशासनिक और विभागीय अधिकारियों के कार्यालय हैं लेकिन हैरानी है कि जिले के जिम्मेदार भी इस तरफ ध्यान नहीं दे रहे।
लघु सचिवालय मेंडीसी, एसडीएम, जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी, जिला समाज कल्याण विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, तहसील, सरल केंद्र, एडीसी कार्यालय, जिला नगर आयुक्त कार्यालय, सीईओ जिला परिषद सहित कई कार्यालय है। यहां हजारों लोग अपने किसी न किसी काम से आते हैं। यही स्थिति सरकारी अस्पताल की है, जहां प्रतिदिन लगभग एक हजार लोग इलाज व अन्य कार्यों के लिए आते हैं। इसके बावजूद भी अग्निशमन यंत्रों की तरफ किसी का कोई ध्यान नहीं है। अधिकारी भी इसको गंभीरता से नहीं ले रहे। अधिकारियों की यह लापरवाही यहां पर काम के लिए आने वाले लोगों की जान पर भारी पड़ सकती है।
गर्मियों में हादसों का खतरा होता ज्यादा
अब गर्मियों का मौसम शुरू हो गया है। ज्यादा गर्मी होने के कारण कभी-कभी शार्ट सर्किट होने के कारण आग भी लग सकती है। क्योंकि इस दौरान बिजली उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ जाता है और शार्ट सर्किट का खतरा बना रहता है। लघु सचिवालय और सिविल अस्पताल में रोजाना सैकड़ों लोगों का आना जाना रहता है। ऐसे में अगर कोई बड़ी घटना विपरीत होती है तो उसके लिए कौन जिम्मेदार होगा।
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यह गैस होती सिलेंडर में
सिलिंडरों में दो प्रकार की गैस होती है। एक सीओ-टू (कार्बोन डाईआक्साइड) व दूसरी एबीसी नाम की गैस होती है। कार्बोन डायआक्साइड गैस बिजली के शार्ट सर्किट जैसी आग पर काबू पाती है। एबीसी नाम वाली गैस कपड़े, सोफे, फर्नीचर जैसी वस्तु को लगी आग पर काबू पाती है।
वर्जन
आग बुझाने वाले सिलिंडर चाहे किसी भी जगह लगे हो, वह सिर्फ एक साल तक अच्छा काम कर सकते हैं। लोगों को चाहिए कि वह एक साल का समय खत्म होते ही इसकी दोबारा रीफलिंग करवाए। यदि लघु सचिवालय और सरकारी अस्पताल में सिलिंडर एक्पायर हो चुके हैं तो फायर ऑफिसर को भेजकर चेकिंग करवाई जाएगी और संंबंधित विभाग को बदलवाने के लिए पत्र लिखा जाएगा।
राजेंद्र सिंह दहिया, सहायक मंडलीय फायर अधिकारी, झज्जर
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लघु सचिवालय मेंडीसी, एसडीएम, जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी, जिला समाज कल्याण विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, तहसील, सरल केंद्र, एडीसी कार्यालय, जिला नगर आयुक्त कार्यालय, सीईओ जिला परिषद सहित कई कार्यालय है। यहां हजारों लोग अपने किसी न किसी काम से आते हैं। यही स्थिति सरकारी अस्पताल की है, जहां प्रतिदिन लगभग एक हजार लोग इलाज व अन्य कार्यों के लिए आते हैं। इसके बावजूद भी अग्निशमन यंत्रों की तरफ किसी का कोई ध्यान नहीं है। अधिकारी भी इसको गंभीरता से नहीं ले रहे। अधिकारियों की यह लापरवाही यहां पर काम के लिए आने वाले लोगों की जान पर भारी पड़ सकती है।
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गर्मियों में हादसों का खतरा होता ज्यादा
अब गर्मियों का मौसम शुरू हो गया है। ज्यादा गर्मी होने के कारण कभी-कभी शार्ट सर्किट होने के कारण आग भी लग सकती है। क्योंकि इस दौरान बिजली उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ जाता है और शार्ट सर्किट का खतरा बना रहता है। लघु सचिवालय और सिविल अस्पताल में रोजाना सैकड़ों लोगों का आना जाना रहता है। ऐसे में अगर कोई बड़ी घटना विपरीत होती है तो उसके लिए कौन जिम्मेदार होगा।
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यह गैस होती सिलेंडर में
सिलिंडरों में दो प्रकार की गैस होती है। एक सीओ-टू (कार्बोन डाईआक्साइड) व दूसरी एबीसी नाम की गैस होती है। कार्बोन डायआक्साइड गैस बिजली के शार्ट सर्किट जैसी आग पर काबू पाती है। एबीसी नाम वाली गैस कपड़े, सोफे, फर्नीचर जैसी वस्तु को लगी आग पर काबू पाती है।
वर्जन
आग बुझाने वाले सिलिंडर चाहे किसी भी जगह लगे हो, वह सिर्फ एक साल तक अच्छा काम कर सकते हैं। लोगों को चाहिए कि वह एक साल का समय खत्म होते ही इसकी दोबारा रीफलिंग करवाए। यदि लघु सचिवालय और सरकारी अस्पताल में सिलिंडर एक्पायर हो चुके हैं तो फायर ऑफिसर को भेजकर चेकिंग करवाई जाएगी और संंबंधित विभाग को बदलवाने के लिए पत्र लिखा जाएगा।
राजेंद्र सिंह दहिया, सहायक मंडलीय फायर अधिकारी, झज्जर