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Jhajjar-Bahadurgarh News: महंगी जमीन निवेश में बाधा, सस्ते प्लॉट और उचित पॉलिसी मांग रहे उद्यमी

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 25 Feb 2026 02:42 AM IST
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Expensive land hinders investment, entrepreneurs demand cheap plots and appropriate policies
फोटो-61: बहादुरगढ़ के पुराना औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित उद्योग। संवाद
बहादुरगढ़। औद्योगिक क्षेत्र बहादुरगढ़ व आसपास के इलाकों में जमीन की बढ़ती कीमतें नए निवेश में बाधा बन रही हैं। उद्यमियों का कहना है कि औद्योगिक इकाइयों के विस्तार और नए उद्योग स्थापित करने के लिए जमीन के दाम आसमान छू रहे हैं। वर्तमान में जमीन करीब 50 हजार रुपये प्रति वर्ग गज है।
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उद्यमियों ने राज्य सरकार से मांग की है कि बहादुरगढ़ में सस्ती दरों पर जमीन उपलब्ध कराई जाए और सभी आवश्यक अनुमतियां एकल खिड़की प्रणाली के माध्यम से शीघ्र प्रदान की जाएं। यदि प्रतिस्पर्धी दरों पर भूमि और प्रोत्साहन मिलें, तो बड़े पैमाने पर निवेश संभव है और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
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जमीन महंगी होने के कारण ही देश के टॉप-5 जुराब निर्माता न्यू होराइजन कंपनी के मालिक रवि चमड़या ने मजबूरी में आंध्रा प्रदेश में 12 एकड़ जमीन खरीदनी पड़ी। एक साल तक सस्ती जमीन न मिलने से आंध्रा प्रदेश में निवेश करने का मन बनाया।
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नए उद्योग स्थापित करने के लिए प्रदेश की एकल खिड़की प्रणाली भी निवेश के अनुकूल नहीं है। ऐसे में यहां के उद्यमी दूसरे राज्यों की ओर रुख कर रहे हैं। उद्यमियों का कहना है कि हरियाणा के विपरीत आंध्र प्रदेश, गुजरात समेत कई अन्य राज्यों में औद्योगिक जमीन अपेक्षाकृत सस्ती दरों पर उपलब्ध है।
वहां की सरकारें भी निवेश आकर्षित करने के लिए रियायती दरों पर भूमि, त्वरित स्वीकृतियां और सब्सिडी जैसी सुविधाएं भी दे रही हैं।



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बहादुरगढ़ व आसपास के क्षेत्रों में जमीन के दाम अधिक हैं। इस वजह से आंध्र प्रदेश में फैक्ट्री स्थापित कर रहा हूं। आंध्र प्रदेश में 4 हजार रुपये प्रति वर्ग गज के हिसाब से जमीन मिली। करीब 12 एकड़ में वहां पर प्लांट स्थापित किया जा रहा है और मात्र कुछ ही दिनों में सिंगल विंडो सिस्टम से सभी अनुमति भी मिल गई। निवेश पर सब्सिडी भी मिली। सरकार को एमएसएमई को बढ़ावा देने के लिए अलग से फंड व पर्याप्त सब्सिडी देनी चाहिए।

-रवि चमड़िया, जुराब निर्यातक, बहादुरगढ़।





प्रदेश सरकार बजट में घोषणाएं तो खूब करती है लेकिन धरातल पर लागू नहीं किया जाता। नए उद्योग के लिए पहले तो जमीन खरीदना ही काफी मुश्किल है और फिर इसके बाद आवश्यक अनुमति व एनओसी लेना भी जरूरी है। फिर मशीनरी खरीदने में ही काफी निवेश और समय लग जाता है। उत्पादन होते-होते एक से डेढ़ साल लग जाता है। ऐसे में सरकार को चाहिए कि कुछ ऐसा सिस्टम स्थापित किया जाए तो औद्योगिक निवेश के अनुकूल हो।

-प्रवीण गर्ग, उद्यमी, गणपति धाम, बहादुरगढ़।
औद्योगिक निवेश बढ़ेगा तो न केवल सरकार के राजस्व में बढ़ोतरी होगी बल्कि रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। सरकार को चाहिए कि जो उद्यमी निवेश करना चाहता है उसके लिए अलग से विशेष नीति बनाई जाए। एकल खिड़की से लेकर मशीनरी व जमीन पर सब्सिडी मुहैया कराई जाए। आर्थिक सहायता मिले तो औद्योगिक निवेश बढ़ेगा। गुजरात में भी हरियाणा से काफी सस्ती जमीन है। वहां पर औसतन करीब 14 हजार प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से जमीन औद्योगिक क्षेत्रों में आसानी से मिल जाती है।


-सुनील गर्ग, उद्यमी, एमआईई, बहादुरगढ़।

फोटो-61: बहादुरगढ़ के पुराना औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित उद्योग। संवाद

फोटो-61: बहादुरगढ़ के पुराना औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित उद्योग। संवाद

फोटो-61: बहादुरगढ़ के पुराना औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित उद्योग। संवाद

फोटो-61: बहादुरगढ़ के पुराना औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित उद्योग। संवाद

फोटो-61: बहादुरगढ़ के पुराना औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित उद्योग। संवाद

फोटो-61: बहादुरगढ़ के पुराना औद्योगिक क्षेत्र में स्थापित उद्योग। संवाद

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