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पूर्व सैनिक ने लॉकडाउन में अकेले ही 3 किलोमीटर मंदिर का रास्ता कर दिया साफ
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झज्जर। खुंगाई गांव के मंदिर के रास्ता बंद होने के कगार पर था। सड़क के दोनों तरफ झाड़ झंखाड़ उगे हुए थे तो एक पूर्व सैनिक ने दादा बिसर के मंदिर को जाने वाले करीब 3 किलोमीटर के रास्ते को पूरी तरह से साफ कर दिया है। 58 वर्षीय पूर्व सैनिक हरिप्रकाश ने लॉकडाउन में मंदिर के रास्ते को पूरी तरह से साफ कर स्वच्छ व सुंदर बना दिया है।
इतना ही नहीं रास्ते की सुंदरता बढ़ाने के लिए सड़क के दोनों तरफ खड़े पेड़ों को भी रंग रोगन करके पूरी तरह से रास्ते की सफाई कर डाली। मंदिर की तरफ जाने वाले दोनों सीमेंटेड रास्तों से अब आसानी से लोग आवागमन कर सकते हैं। खुंगाई निवासी पूर्व सैनिक हरिप्रकाश का कहना है कि जब लॉकडाउन लगा तो अचानक बैठे-बैठे उसने सोच लिया कि मंदिर को जाने वाले रास्ते को वह पूरी तरह से साफ करेगा और झाडू, कुल्हाड़ी व कस्सी लेकर वह हर रोज सुबह घर से निकलता और दोनों तरफ के रास्ते की सफाई में जुट गया। लॉकडाउन से लेकर अब तक उसने दोनों रास्तों को झाड़-झंखाड़ मुक्त करने के बाद सड़क के दोनों तरफ खड़े पेड़ों पर सफेदी व लाल रंग भी किया है। जिससे रास्ते की सुंदरता और बढ़ गई है। हरि प्रकाश का कहना है सड़क के दोनों तरफ के पेड़ों पर सफेदी व रंग करने के लिए करीब उसका ढाई हजार रुपये का खर्च आया है।
- 2006 में हुआ था सेना से सेवानिवृत्त
हरिप्रकाश वर्ष 2006 नवंबर में सेना से सेवानिवृत्त हुआ था। उसके बाद से हरिप्रकाश गांव में सामाजिक कार्यों में भाग लेते रहे हैं। खुंगाई गांव का धार्मिक स्थल बाबा बिसर का मंदिर है। जहां पर लोग मान्यता के अनुसार पूजा अर्चना करते हैं। लॉकडाउन में रास्ते की सफाई करने के बाद अब भी वह झाड़ू लेकर रास्ते की सफाई करते हैं। उनका कहना है कि स्वच्छता के लिए लोगों को आगे आना चाहिए खासकर युवा वर्ग को स्वच्छता की मुहिम में हिस्सेदारी करते हुए गांव व अपने घरों के आसपास की सफाई अवश्य करनी चाहिए।
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इतना ही नहीं रास्ते की सुंदरता बढ़ाने के लिए सड़क के दोनों तरफ खड़े पेड़ों को भी रंग रोगन करके पूरी तरह से रास्ते की सफाई कर डाली। मंदिर की तरफ जाने वाले दोनों सीमेंटेड रास्तों से अब आसानी से लोग आवागमन कर सकते हैं। खुंगाई निवासी पूर्व सैनिक हरिप्रकाश का कहना है कि जब लॉकडाउन लगा तो अचानक बैठे-बैठे उसने सोच लिया कि मंदिर को जाने वाले रास्ते को वह पूरी तरह से साफ करेगा और झाडू, कुल्हाड़ी व कस्सी लेकर वह हर रोज सुबह घर से निकलता और दोनों तरफ के रास्ते की सफाई में जुट गया। लॉकडाउन से लेकर अब तक उसने दोनों रास्तों को झाड़-झंखाड़ मुक्त करने के बाद सड़क के दोनों तरफ खड़े पेड़ों पर सफेदी व लाल रंग भी किया है। जिससे रास्ते की सुंदरता और बढ़ गई है। हरि प्रकाश का कहना है सड़क के दोनों तरफ के पेड़ों पर सफेदी व रंग करने के लिए करीब उसका ढाई हजार रुपये का खर्च आया है।
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- 2006 में हुआ था सेना से सेवानिवृत्त
हरिप्रकाश वर्ष 2006 नवंबर में सेना से सेवानिवृत्त हुआ था। उसके बाद से हरिप्रकाश गांव में सामाजिक कार्यों में भाग लेते रहे हैं। खुंगाई गांव का धार्मिक स्थल बाबा बिसर का मंदिर है। जहां पर लोग मान्यता के अनुसार पूजा अर्चना करते हैं। लॉकडाउन में रास्ते की सफाई करने के बाद अब भी वह झाड़ू लेकर रास्ते की सफाई करते हैं। उनका कहना है कि स्वच्छता के लिए लोगों को आगे आना चाहिए खासकर युवा वर्ग को स्वच्छता की मुहिम में हिस्सेदारी करते हुए गांव व अपने घरों के आसपास की सफाई अवश्य करनी चाहिए।
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