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Jhajjar-Bahadurgarh News: प्रथम नवरात्र से मां की अखंड ज्योत जलाकर की घट स्थापना
Fri, 04 Oct 2024 05:20 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Fri, 04 Oct 2024 05:20 AM IST
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झज्जर। नवरात्र के पहले दिन वीरवार को शहर के सभी मंदिरों में मां के जयकारे गूंजते रहे। कलश स्थापना के साथ नवरात्र का शुभारंभ हो गया। मां के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की गई।
इस दौरान मंदिरों में अखंड ज्योत जलाई गई। शहर के मंदिरों में श्रद्धालुओं ने पूजन-अर्चना कर मंगलकामना की। मंदिरों में आए श्रद्धालुओं ने जय माता के जयकारे लगाए। नवरात्र के पहले दिन सिद्ध बाबा प्रसाद गिरि मंदिर, श्री राम मंदिर, मढ़ी दुर्गा माता मंदिर, श्री गोपाल मंदिर, श्री लेखराज मंदिर, श्री दुर्गा मंदिर, श्री प्रेम मंदिर, चौरासी घंटे वाले मंदिर, श्री बूढ़ा महादेव मंदिर, मां वैष्णो चौक, चौपटा बाजार शिव मंदिर में पूजा-अर्चना करने के लिए श्रद्धालु पहुंचे।
सिद्ध बाबा कांशीगिरि मंदिर के पंडित पवन कौशिक ने बताया कि नौ दिनों में देवी के नौ रूपों की विशेष आराधना होती है। इसमें पहले दिन मां दुर्गा की शैलपुत्री के रूप में पूजा की जाती है। मां शैलपुत्री हिमालय राज की पुत्री हैं। इसलिए मां को शैलपुत्री कहा जाता है।
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-अखंड ज्योत का महत्व
कौशिक ने कहा कि नवरात्र के दौरान अखंड ज्योत जलाने का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यतानुसार नवरात्र के दौरान अखंड ज्योत जलाने से साधक की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मान्यतानुसार घरों में कलश स्थापना के बाद अखंड ज्योत जलाई जाती है। अखंड ज्योति से घर में खुशहाली आती हैं। माता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। मनोकामना पूर्ण होती है।
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इस दौरान मंदिरों में अखंड ज्योत जलाई गई। शहर के मंदिरों में श्रद्धालुओं ने पूजन-अर्चना कर मंगलकामना की। मंदिरों में आए श्रद्धालुओं ने जय माता के जयकारे लगाए। नवरात्र के पहले दिन सिद्ध बाबा प्रसाद गिरि मंदिर, श्री राम मंदिर, मढ़ी दुर्गा माता मंदिर, श्री गोपाल मंदिर, श्री लेखराज मंदिर, श्री दुर्गा मंदिर, श्री प्रेम मंदिर, चौरासी घंटे वाले मंदिर, श्री बूढ़ा महादेव मंदिर, मां वैष्णो चौक, चौपटा बाजार शिव मंदिर में पूजा-अर्चना करने के लिए श्रद्धालु पहुंचे।
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सिद्ध बाबा कांशीगिरि मंदिर के पंडित पवन कौशिक ने बताया कि नौ दिनों में देवी के नौ रूपों की विशेष आराधना होती है। इसमें पहले दिन मां दुर्गा की शैलपुत्री के रूप में पूजा की जाती है। मां शैलपुत्री हिमालय राज की पुत्री हैं। इसलिए मां को शैलपुत्री कहा जाता है।
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-अखंड ज्योत का महत्व
कौशिक ने कहा कि नवरात्र के दौरान अखंड ज्योत जलाने का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यतानुसार नवरात्र के दौरान अखंड ज्योत जलाने से साधक की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। मान्यतानुसार घरों में कलश स्थापना के बाद अखंड ज्योत जलाई जाती है। अखंड ज्योति से घर में खुशहाली आती हैं। माता का आशीर्वाद प्राप्त होता है। मनोकामना पूर्ण होती है।