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उत्तराखंड में आपदा में फंसे लोगों की मदद कर रहे बहादुरगढ़ के डॉ. प्रदीप

Tue, 09 Feb 2021 01:41 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Tue, 09 Feb 2021 01:41 AM IST
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Dr. Pradeep of Bahadurgarh helping people trapped in Uttarakhand disaster
उत्तराखंड के लोगों से बातचीत करती टीम। संवाद - फोटो : Bahadurgarh
बहादुरगढ़। उत्तराखंड के चमोली जिले के रैणी क्षेत्र में एक दिन पहले ग्लेशियर टूटने से हुई तबाही के दौरान लोगों को चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराने के लिए बहादुरगढ़ के गांव खरहर के निवासी व समाजसेवी डॉ. प्रदीप भारद्वाज अपनी टीम के साथ वहां पहुंच गए हैं। डॉ. प्रदीप रविवार रात को करीब 9 बजे उक्त क्षेत्र में पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि बाढ़ में पानी का बहाव इतना तेज था कि नदी में मिल रहे शवों के जिस्म से कपड़े तक गायब हैं।
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उत्तराखंड में ग्लेशियर टूटने के बाद, उसकी चपेट में आए लोगों के बारे में डॉ. प्रदीप भारद्वाज ने बताया कि रैणी गांव में वे अपनी मेडिकल टीम के साथ रविवार रात 9 बजे के लगभग पहुंचे थे। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, आईटीबीपी सहित तमाम बचाव दल रेस्क्यू में लगे थे। जिस तरह से बड़े-बड़े पत्थरों के टुकड़े, कीचड़ और पानी दिख रहा था, उस दृश्य ने केदारनाथ आपदा की याद ताजा कर दी।
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उन्होंने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि उन्होंने यहां पर 11 ऐसे शव देखें, जो कीचड़ में धंसे थे। ज्यादातर शवों पर कपड़े गायब थे। अनुमान है कि पानी के दबाव में ऐसा कुछ हुआ। शवों को देखा भी नहीं जा रहा था। शवों को पहचानना मुश्किल हो रहा है। मजदूरों के पास कोई आई कार्ड नहीं था। ऐसे मेें उनकी पहचान भी एक चुनौती होगी। शायद इसके लिए डीएनए की जरूरत पड़े। डॉ. प्रदीप भारद्वाज अपनी टीम के साथ रविवार को ही चमोली पहुंच गए थे।
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उन्होंने बताया कि आपदा के कारण कई लोगों के बीमार पड़ जाने के बाद उनकी टीम ऐसे गांवों में कैंप लगाकर मरीजों का इलाज कर रही है। डॉ. प्रदीप कहते हैं कि उन्होंने सोमवार को आसपास के गांवों में कैंप लगाए हैं। उन लोगों का इलाज किया जा रहा है जो दहशत और डिप्रेशन की स्थिति में हैं। डॉ. भारद्वाज ने बताया कि लगभग 17 गांवों के लोगों ने ये भयानक मंजर देखा। लोग दहशत में हैं। उस दृश्य के गवाह बने कुछ लोग भी ट्रॉमा में हैं और उन्हें भी चिकित्सकीय मदद की जरूरत पड़ेगी।

उन्होंने मरीजों के बारे में बताया कि सदमे में शामिल एक ऐसी महिला को ग्रामीण उनके पास लेकर आए, जो अब बोल भी नहीं पा रही है। हालांकि ग्रामीण बताते हैं कि इस घटना को देखने से पहले वह अच्छी तरह बोलती थी। महिला का ब्लड प्रेशर भी बढ़ा हुआ है, जबकि खाना-पीना सामान्य है। ऐसे सभी मरीजों की काउंसिलिंग की जा रही है। इसके अलावा गांव के कई बुजुर्ग लगातार ऐसे स्थानों पर बैठे हुए हैं, जहां से पूरे नदी क्षेत्र पर निगाह रखी जा सके।
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