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एसएमओ कार्यालय में ताला जड़ नवजात का शव ले धरने पर बैठे परिजन
ब्यूरो/अमर उजाला, झज्जर
Updated Wed, 07 Sep 2016 11:33 PM IST
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प्रदर्शन
- फोटो : अमर उजाला
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मेरे साथ जैसा हुआ वो और किसी के साथ न हो, मुुझे इंसाफ चाहिए। यह कहकर मृतक नवजात का पिता रोने लगता है। बूढ़े दादा-दादी का भी रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार इलाज में लापरवाही बरतने वाले डॉक्टर पर कार्यवाही की मांग कर रहा है।
नाराज पीड़ित परिवार ने इसी मांग को लेकर मंगलवार सुबह सात बजे फिर एसएमओ कार्यालय पर ताला जड़ दिया और नवजात के शव को गोद में लेकर धरने पर बैठ गए। एसएमओ कार्यालय पर ताला जड़ने के चलते वहां ओपीडी रजिस्ट्रेशन स्टाफ सहित अन्य कर्मचारी भी अंदर नहीं जा सके। जिसके चलते परिसर में मरीजों और उनके तीमारदारों की भीड़ जमा हो गई। अस्पताल प्रांगण में धरना देने और एसएमओ कार्यालय पर फिर ताला जड़ने की सूचना विभाग के अधिकारियों को मिलने पर अस्पताल प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। आनन फानन मेें सूचना पुलिस को दी गई। थाना प्रभारी ने मौके पर पहुंच कर पीड़ित परिजनों को समझाने का प्रयास किया। लेकिन पीड़ित परिवार ने किसी की नहीं सुनी। बाद में डीएसपी राजीव कुमार मौके पर पहुंचे और परिजनों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन परिजन डॉक्टर के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग को लेकर अडे़ रहे। करीब सवा नौ बजे एसएमओ एनके गर्ग मौके पर पहुंचे और पूरे मामले की जांच करवाने और उचित कार्यवाही करने का आश्वासन देकर धरना उठवाया। करीब ढाई घंटे दिए गए धरने के चलते स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित रही और अस्पताल में अफरा तफरी का माहौल बना रहा।
आखिर क्या है मामला
पीड़ित विकेश निवासी गांव मारौत ने बताया कि उसकी पत्नी प्रीति की डिलीवरी होनी थी। जिसके चलते उसने नागरिक अस्पताल में भर्ती करवाया था। रविवार शाम 4 बजे डॉक्टर द्वारा चेकअप किया गया और रात 11 बजे डिलवरी होने की बात कही थी, लेकिन 11 बजे जिस डॉक्टर की ड्यूटी आई उसने लापरवाही बरती। उसकी पत्नी दर्द से चिल्लाती रही और डॉक्टर सोती रही। उन्होंने कहा कि बार-बार डॉक्टर को जगाने के बावजूद भी डॉक्टर नहीं जागी और बाद में उठकर धमकाते हुए बोली कि दो बजे से पहले कोई भी उसके पास नहीं आए। जिससे उसके जच्चा-बच्चा तबियत बिगड़ गई। बाद में सोमवार सुबह बच्चे को गंभीर हालत में पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया गया। लेकिन वहां भी जब बच्चे की हालत में सुधार नहीं हुआ तब परिजन रोहतक के एक निजी अस्पताल ले गए। जहां बच्चे ने दम तोड़ दिया था।
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क्या कहते हैं पीड़ित पिता विकेश
विकेश ने बताया कि न्याय की मांग को लेकर उन्होंने एसएमओ कार्यालय पर धरना दिया था। तब एसएमओ एन के गर्ग से उनकी बात हुई है, एसएमओ गर्ग ने पूरे मामले की जांच करवाने की बात कही है। विकेश ने बताया उनके परिजनों ने पहले नागरिक अस्पताल की टीम से जांच करवाने की बात एसएमओ को लिखित में दी है। अगर फिर भी उनकी संतुष्टि नहीं होती है तो पंचकूला मुख्यालय की टीम से जांच करवाई जाएगी। वो न्याय के लिए आखिरी दम तक लडे़ंगे। इसके लिए उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज को भी चिट्ठी लिखी है और वीरवार को सीएम विंडो पर भी डॉक्टर पर शिकायत दी जाएगी।
ओपीडी सेवाएं रही बाधित, मरीज रहे परेशान
धरने के चलते ओपीडी सेवाएं करीब डेढ़ घंटे तक बाधित रही। जिसके चलते मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। अस्पताल परिसर में अफरा तफरी का माहौल रहा और मरीज इधर-उधर भटकते नजर आएं।
पूरे मामले की जांच करवाई जाएगी। जांच के बाद जो भी दोषी मिलेगा। उसके खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। दोषियों को बक्षा नहीं जाएगा।
एन के गर्ग, एसएमओ, झज्जर।
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नाराज पीड़ित परिवार ने इसी मांग को लेकर मंगलवार सुबह सात बजे फिर एसएमओ कार्यालय पर ताला जड़ दिया और नवजात के शव को गोद में लेकर धरने पर बैठ गए। एसएमओ कार्यालय पर ताला जड़ने के चलते वहां ओपीडी रजिस्ट्रेशन स्टाफ सहित अन्य कर्मचारी भी अंदर नहीं जा सके। जिसके चलते परिसर में मरीजों और उनके तीमारदारों की भीड़ जमा हो गई। अस्पताल प्रांगण में धरना देने और एसएमओ कार्यालय पर फिर ताला जड़ने की सूचना विभाग के अधिकारियों को मिलने पर अस्पताल प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। आनन फानन मेें सूचना पुलिस को दी गई। थाना प्रभारी ने मौके पर पहुंच कर पीड़ित परिजनों को समझाने का प्रयास किया। लेकिन पीड़ित परिवार ने किसी की नहीं सुनी। बाद में डीएसपी राजीव कुमार मौके पर पहुंचे और परिजनों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन परिजन डॉक्टर के खिलाफ कार्यवाही करने की मांग को लेकर अडे़ रहे। करीब सवा नौ बजे एसएमओ एनके गर्ग मौके पर पहुंचे और पूरे मामले की जांच करवाने और उचित कार्यवाही करने का आश्वासन देकर धरना उठवाया। करीब ढाई घंटे दिए गए धरने के चलते स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित रही और अस्पताल में अफरा तफरी का माहौल बना रहा।
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आखिर क्या है मामला
पीड़ित विकेश निवासी गांव मारौत ने बताया कि उसकी पत्नी प्रीति की डिलीवरी होनी थी। जिसके चलते उसने नागरिक अस्पताल में भर्ती करवाया था। रविवार शाम 4 बजे डॉक्टर द्वारा चेकअप किया गया और रात 11 बजे डिलवरी होने की बात कही थी, लेकिन 11 बजे जिस डॉक्टर की ड्यूटी आई उसने लापरवाही बरती। उसकी पत्नी दर्द से चिल्लाती रही और डॉक्टर सोती रही। उन्होंने कहा कि बार-बार डॉक्टर को जगाने के बावजूद भी डॉक्टर नहीं जागी और बाद में उठकर धमकाते हुए बोली कि दो बजे से पहले कोई भी उसके पास नहीं आए। जिससे उसके जच्चा-बच्चा तबियत बिगड़ गई। बाद में सोमवार सुबह बच्चे को गंभीर हालत में पीजीआई रोहतक रेफर कर दिया गया। लेकिन वहां भी जब बच्चे की हालत में सुधार नहीं हुआ तब परिजन रोहतक के एक निजी अस्पताल ले गए। जहां बच्चे ने दम तोड़ दिया था।
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क्या कहते हैं पीड़ित पिता विकेश
विकेश ने बताया कि न्याय की मांग को लेकर उन्होंने एसएमओ कार्यालय पर धरना दिया था। तब एसएमओ एन के गर्ग से उनकी बात हुई है, एसएमओ गर्ग ने पूरे मामले की जांच करवाने की बात कही है। विकेश ने बताया उनके परिजनों ने पहले नागरिक अस्पताल की टीम से जांच करवाने की बात एसएमओ को लिखित में दी है। अगर फिर भी उनकी संतुष्टि नहीं होती है तो पंचकूला मुख्यालय की टीम से जांच करवाई जाएगी। वो न्याय के लिए आखिरी दम तक लडे़ंगे। इसके लिए उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज को भी चिट्ठी लिखी है और वीरवार को सीएम विंडो पर भी डॉक्टर पर शिकायत दी जाएगी।
ओपीडी सेवाएं रही बाधित, मरीज रहे परेशान
धरने के चलते ओपीडी सेवाएं करीब डेढ़ घंटे तक बाधित रही। जिसके चलते मरीजों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। अस्पताल परिसर में अफरा तफरी का माहौल रहा और मरीज इधर-उधर भटकते नजर आएं।
पूरे मामले की जांच करवाई जाएगी। जांच के बाद जो भी दोषी मिलेगा। उसके खिलाफ नियमानुसार कार्यवाही अमल में लाई जाएगी। दोषियों को बक्षा नहीं जाएगा।
एन के गर्ग, एसएमओ, झज्जर।