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अवैध रूप से सील तोड़कर चल रही थी फैक्ट्री
Updated Wed, 21 Feb 2018 01:20 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़।
परनाला-निजामपुर मार्ग पर मंगलवार को सीएम फ्लाइंग द्वारा की गई फैक्ट्रियों पर छापेमारी के बाद यह सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर किस अधिकारी की परमिशन से ये फैक्ट्रियां चल रही थी और कितने समय से। इस सवाल से प्रदूषण विभाग के अधिकारियों के भी कान खड़े हो गए हैं। करीब ढाई वर्ष पहले इन फैक्ट्रियों को सील किया गया था। खास बात यह है कि प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड को भी ये नहीं पता था कि उनके द्वारा सील की गई फैक्ट्री कैसे चल रही है।
वर्ष 2015 में सील करने के बाद से यह फैक्ट्रियां अवैध रूप से चल रही थी। इन फैक्ट्रियों को बिना एनओसी के कैसे चलाया जा रहा था, इसका जवाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के अधिकारियों के पास नहीं था। इन फैक्ट्रियों के बोर्ड भी गलत नामों से लगाए गए थे। इस कारण फैक्ट्रियों के नामों तक का खुलासा नहीं हो पाया। टीम ने फैक्ट्रियों में छापा मारा तो पाया कि यहां भट्ठियां चल रही हैं और इनमें बैटरियों को पिघलाकर उससे निकलने वाले रांग से मैटल की नई प्लेट तैयार की जा रही है। कुछ फैक्ट्रियों में से इन प्लेटों को सप्लाई करने का काम भी किया जा रहा था। इन चारों फैक्ट्रियों को प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की तरफ से एसडीओ अजीत व डॉ. कीर्ति ने सील करने का काम किया।
क्या कहते हैं प्रदूषण विभाग के अधिकारी
प्रदूषण विभाग की वैज्ञानिक डॉ. कीर्ति ने बताया कि चारों फैक्ट्रियों को सील कर दिया है। इन फैक्ट्रियों को पहले भी साल 2015 में सील किया गया था, पर वह सील तोड़कर कैसे चल रही थी। इसकी जांच करवाई जाएगी।
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क्या कहते हैं खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारी
राधिका इंटरप्राइजेज व इंद्रप्रस्थ प्लास्टिक यह दोनों फैक्ट्री बैटरी को पिघलाकर उसका रांग निकालने वाले प्लांटों के पास ही थी। इस कारण वहां भी जांच की गई। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारी सपना ने बताया कि फैक्ट्रियों से मिले 8 सिलेंडरों को जब्त कर लिया गया है व फैक्ट्री संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई गई है। राधिका इंटरप्राइजेज के मालिक सतीश आहुजा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। सतीश आहुजा के खिलाफ लाइनपार थाना में ईसी एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है।
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बहादुरगढ़।
परनाला-निजामपुर मार्ग पर मंगलवार को सीएम फ्लाइंग द्वारा की गई फैक्ट्रियों पर छापेमारी के बाद यह सवाल खड़ा हो गया है कि आखिर किस अधिकारी की परमिशन से ये फैक्ट्रियां चल रही थी और कितने समय से। इस सवाल से प्रदूषण विभाग के अधिकारियों के भी कान खड़े हो गए हैं। करीब ढाई वर्ष पहले इन फैक्ट्रियों को सील किया गया था। खास बात यह है कि प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड को भी ये नहीं पता था कि उनके द्वारा सील की गई फैक्ट्री कैसे चल रही है।
वर्ष 2015 में सील करने के बाद से यह फैक्ट्रियां अवैध रूप से चल रही थी। इन फैक्ट्रियों को बिना एनओसी के कैसे चलाया जा रहा था, इसका जवाब प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड के अधिकारियों के पास नहीं था। इन फैक्ट्रियों के बोर्ड भी गलत नामों से लगाए गए थे। इस कारण फैक्ट्रियों के नामों तक का खुलासा नहीं हो पाया। टीम ने फैक्ट्रियों में छापा मारा तो पाया कि यहां भट्ठियां चल रही हैं और इनमें बैटरियों को पिघलाकर उससे निकलने वाले रांग से मैटल की नई प्लेट तैयार की जा रही है। कुछ फैक्ट्रियों में से इन प्लेटों को सप्लाई करने का काम भी किया जा रहा था। इन चारों फैक्ट्रियों को प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड की तरफ से एसडीओ अजीत व डॉ. कीर्ति ने सील करने का काम किया।
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क्या कहते हैं प्रदूषण विभाग के अधिकारी
प्रदूषण विभाग की वैज्ञानिक डॉ. कीर्ति ने बताया कि चारों फैक्ट्रियों को सील कर दिया है। इन फैक्ट्रियों को पहले भी साल 2015 में सील किया गया था, पर वह सील तोड़कर कैसे चल रही थी। इसकी जांच करवाई जाएगी।
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क्या कहते हैं खाद्य आपूर्ति विभाग के अधिकारी
राधिका इंटरप्राइजेज व इंद्रप्रस्थ प्लास्टिक यह दोनों फैक्ट्री बैटरी को पिघलाकर उसका रांग निकालने वाले प्लांटों के पास ही थी। इस कारण वहां भी जांच की गई। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के अधिकारी सपना ने बताया कि फैक्ट्रियों से मिले 8 सिलेंडरों को जब्त कर लिया गया है व फैक्ट्री संचालकों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई गई है। राधिका इंटरप्राइजेज के मालिक सतीश आहुजा को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। सतीश आहुजा के खिलाफ लाइनपार थाना में ईसी एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है।