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Jhajjar-Bahadurgarh News: 20 प्रतिशत महंगी मिल रहीं कॉपी- किताबें, फिक्स वेंडर से ही लेने का दबाव बना रहे स्कूल

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 28 Mar 2026 01:43 AM IST
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Copies and books are getting 20 percent more expensive, schools are pressuring people to buy only from fixed vendors.
-फोटो 84 : जितेंद्र यादव, बसंत विहार
अमर उजाला अभियान....
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-अभिभावक बोले- बढ़ती महंगाई में बच्चों को पढ़ाना हो रहा मुश्किल, स्कू





संवाद न्यूज एजेंसी

बहादुरगढ़। पिछली साल की अपेक्षा इस वर्ष कॉपी-किताबों की कीमतों में 15 से 20 प्रतिशत तक वृद्धि हो गई है जिससे अभिभावकों का बजट गड़बड़ाने लगा है। अभिभावकों का तर्क है कि महंगाई में बच्चों को पढ़ाना मुश्किल हो रहा है। वहीं स्कूल फिक्स वेंडर से ही कॉपी- किताबें खरीदने का दबाव बना रहे हैं।

एक अप्रैल से स्कूलों में नया सत्र शुरू हो जाएगा इसको लेकर स्कूलों में तैयारियां शुरू हो गई हैं। विद्यार्थियों के परीक्षा परिणाम की घोषणा की जा रही है। वहीं नए दाखिले वाले छात्रों के लिए कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। अधिकतर स्कूलों ने अभिभावकों को परीक्षा परिणाम के साथ बुक की रेट लिस्ट भी थमा दी है। स्कूलों की ओर से वेंडर के नाम बताए गए हैं। वहां से कॉपी किताब लेने पर 20 से 25 प्रतिशत अतिरिक्त बोझ बढ़ रहा है।
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ए फोर साइज के कागज में पिछले छह महीने में करीब 25 फीसदी तक तेजी आई है। इसके कारण सामान्य से लेकर ब्रांडेड कंपनियों तक की 60, 120, 180 और 240 पेज की कॉपी के दाम बढ़े हैं। वहीं किताबों का बाहर बाजार में पता किया गया तो 10 से 15 प्रतिशत तक का अंतर आ रहा है।
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स्टेशनरी के दाम भी बढ़े

कॉपी किताबों के बाद स्टेशनरी के सामान जैसे पेेंसिल, रबड़, कलर, स्कूल बैग, स्कैच पैन, पेंसिल बॉक्स तक में पांच से 10 फीसदी की वृद्धि हुई है। स्कैच पैन, कलर बॉक्स जो पिछले साल 60 से 80 रुपये में मिला करते थे, अब उनकी कीमत 80 से 110 रुपये हो गई है। जो स्कूल बैग 800 रुपये का था। अब उसी के लिए 1300 से 1500 रुपये चुकाने पड़ रहे हैं।





एनसीईआरटी की भी सभी किताबें नहीं चल रही हैं। यदि वह चलें तो थोड़ा बोझ कम हो। हर साल बच्चों की पढ़ाई महंगी होती जा रही है। एक तरफ फीस बढ़ रही है तो दूसरी तरफ कॉपी-किताबों के साथ स्टेशनरी के दाम।


-जितेंद्र यादव, बसंत विहार



बच्चे का स्कूल बदलने का प्लान बनाया है। स्टेशनरी में 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी हो गई है। हर साल अपै्रल के महीने में घर का बजट बिगड़ जाता है। कॉपी-किताबों के साथ बच्चों का एडमिशन भी कराना होता है। फीस में भी स्कूल हर बार बढ़ोतरी करते हैं। अब महंगाई के माहौल में बच्चों का पढ़ना मुश्किल होता जा रहा है।

-नरेंद्र कुमार, लाइनपार







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-फोटो 84 : जितेंद्र यादव, बसंत विहार

-फोटो 84 : जितेंद्र यादव, बसंत विहार

-फोटो 84 : जितेंद्र यादव, बसंत विहार

-फोटो 84 : जितेंद्र यादव, बसंत विहार

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