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Jhajjar-Bahadurgarh News: दो महीने में ही माइनर से निकलने की कंक्रीट
Thu, 04 Jan 2024 01:09 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Thu, 04 Jan 2024 01:09 AM IST
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साल्हावास। गांव खानपुर स्थित झोलरी माइनर पर दो महीने पहले ही माइनर को सीसी से बनाने व पुलों का निर्माण कार्य पूरा किया गया है, लेकिन अभी से पुलों से कंक्रीट बिखरने लगी है। जिससे आवागमन बाधित हो रहा हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि पुलों का ढलान सही ढंग से नहीं किया गया। घटिया सामग्री लगाने का आरोप भी उन्होंने लगाया है।
झोलरी माइनर पर खानपुर कलां में तीन पुलों को निर्माण किया गया, जिनमें से खानपुर कलां से खोरडा मार्ग पर बना पुल व खानपुर कलां से गोठडा मार्ग पर बना पुल खस्ता हो रहें हैं। दोनों ही पुलों से कंक्रीट निकल रहे हैं। नहरी पुल की मियाद कम से कम 25 से 30 वर्ष होती है जबकि ये दोनों ही पुल मात्र दो महीने में ही टूटने शुरू हो गए हैं। कंक्रीट से वाहन चालकों तो आर्थिक नुकसान हो ही रहा है। पैदल आवागमन करने वाले लोगों के लिए तो यह परेशानी का सबब बन चुका है। झोलरी माइनर से होते हुए रास्ता खोरडा गांव की तरफ जाता है जो आगे चरखी दादरी तक का मुख्य मार्ग है। इस माइनर के पुल से प्रतिदिन सैकड़ों वाहनों का आवागमन होता है। झज्जर व चरखी दादरी को जोड़ने वाले लिंक रोड पर इस प्रकार के पुल बनाना एक तरह से दो जिलों के लोगों के लिए परेशानी पैदा करना है। दूसरी तरफ झोलरी माइनर पर ही खानपुर कलां से गोठडा मार्ग पर भी पुल से कंक्रीट निकल रही है। ग्रामीणों की मांग है कि झोलरी माइनर पर बने इन दोनों पुलों को ठीक किया जाए।
माइनर का नाम झामरी माइनर करवाने की मांग
ग्रामीण रमेश शर्मा, अत्तर सिंह, पूनम शर्मा आदि ने बताया कि वास्तव में यह माइनर झामरी माइनर है, लेकिन लंबे समय से इसका नाम सिंचाई विभाग के रिकॉर्ड में झोलरी माइनर लिखा हुआ है जो गलत है। खानपुर कला से आगे यह माइनर झामरी सीमा तक जाती है इसलिए इसका नाम झामरी माइनर ही होना चाहिए। झोलरी रेवाड़ी जिले का गांव है, जो इस माइनर के आसपास भी नहीं है, लेकिन फिर भी पता नहीं क्यों इसका नाम झोलरी माइनर कर रखा है जबकि वास्तव में यह झामरी माइनर ही है।
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वर्जन
पुलों पर कंक्रीट बिखरने के बारे में जानकारी मिली है। मौका मुआयना कर लिया है। जल्द ही दोनों पुलों को दुरुस्त करवा दिया जाएगा। यदि ग्राम पंचायत की तरफ से माइनर का नाम बदलने के बारे में प्रस्ताव मिलता है तो विभाग उसे सरकार के संज्ञान में लाएगा।
सुंदर सिंह, उप विभागीय अधिकारी, सिंचाई विभाग चरखी दादरी
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झोलरी माइनर पर खानपुर कलां में तीन पुलों को निर्माण किया गया, जिनमें से खानपुर कलां से खोरडा मार्ग पर बना पुल व खानपुर कलां से गोठडा मार्ग पर बना पुल खस्ता हो रहें हैं। दोनों ही पुलों से कंक्रीट निकल रहे हैं। नहरी पुल की मियाद कम से कम 25 से 30 वर्ष होती है जबकि ये दोनों ही पुल मात्र दो महीने में ही टूटने शुरू हो गए हैं। कंक्रीट से वाहन चालकों तो आर्थिक नुकसान हो ही रहा है। पैदल आवागमन करने वाले लोगों के लिए तो यह परेशानी का सबब बन चुका है। झोलरी माइनर से होते हुए रास्ता खोरडा गांव की तरफ जाता है जो आगे चरखी दादरी तक का मुख्य मार्ग है। इस माइनर के पुल से प्रतिदिन सैकड़ों वाहनों का आवागमन होता है। झज्जर व चरखी दादरी को जोड़ने वाले लिंक रोड पर इस प्रकार के पुल बनाना एक तरह से दो जिलों के लोगों के लिए परेशानी पैदा करना है। दूसरी तरफ झोलरी माइनर पर ही खानपुर कलां से गोठडा मार्ग पर भी पुल से कंक्रीट निकल रही है। ग्रामीणों की मांग है कि झोलरी माइनर पर बने इन दोनों पुलों को ठीक किया जाए।
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माइनर का नाम झामरी माइनर करवाने की मांग
ग्रामीण रमेश शर्मा, अत्तर सिंह, पूनम शर्मा आदि ने बताया कि वास्तव में यह माइनर झामरी माइनर है, लेकिन लंबे समय से इसका नाम सिंचाई विभाग के रिकॉर्ड में झोलरी माइनर लिखा हुआ है जो गलत है। खानपुर कला से आगे यह माइनर झामरी सीमा तक जाती है इसलिए इसका नाम झामरी माइनर ही होना चाहिए। झोलरी रेवाड़ी जिले का गांव है, जो इस माइनर के आसपास भी नहीं है, लेकिन फिर भी पता नहीं क्यों इसका नाम झोलरी माइनर कर रखा है जबकि वास्तव में यह झामरी माइनर ही है।
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पुलों पर कंक्रीट बिखरने के बारे में जानकारी मिली है। मौका मुआयना कर लिया है। जल्द ही दोनों पुलों को दुरुस्त करवा दिया जाएगा। यदि ग्राम पंचायत की तरफ से माइनर का नाम बदलने के बारे में प्रस्ताव मिलता है तो विभाग उसे सरकार के संज्ञान में लाएगा।
सुंदर सिंह, उप विभागीय अधिकारी, सिंचाई विभाग चरखी दादरी