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Jhajjar-Bahadurgarh News: माता-पिता की छोटी-छोटी बातों से डांट-फटकार के बाद घर से भाग रहे बच्चे
Fri, 12 Jul 2024 06:26 AM IST
रोहतक ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Fri, 12 Jul 2024 06:26 AM IST
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ऑपरेशन मुस्कान के तहत झज्जर पुलिस ने गुमशुदा दो सगे भाइयों को मुंबई से बरामद करके किया परिजनों
झज्जर। किशोरावस्था में पहुंचने वाले बच्चों में सहनशक्ति खत्म होती जा रही है। यही वजह है कि माता-पिता या किसी बड़े द्वारा बच्चों को छोटी-छोटी बात पर डांटने पर वह घर से भाग रहे हैं। पिछले 15 दिन में ऐसे 10 से अधिक मामले आ चुके हैं, जिसमें किशोरावस्था के बच्चे घर से भाग गए हैं। हालांकि, पुलिस ने ऑपरेशन मुस्कान के तहत बच्चों को बरामद कर लिया है।
भागने वाले बच्चों से जब भागने का कारण जाना जाता है तो चौकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं कि माता-पिता या घर के किसी सदस्य के डांट फटकार के कारण उन्होंने ऐसा कदम उठाया। उनकी बरामदगी होने के बाद बच्चों की काउंसलिंग कराई जा रही है ताकि बच्चे भविष्य में ऐसा कदम नहीं उठाए। पुलिस की मानें तो जनवरी से अब तक उनके पास गुमशुदगी के 300 के करीबन मामले आए हैं। इसमें 250 लोगों को बरामद भी किया गया है। इसमें से काफी मामले बच्चे व किशोरों के भागने के हैं।
परिजनों ने डांटा तो खाटू श्याम पहुंचा किशोर
पिछले दिनों सिलानी गेट निवासी एक किशोर घर से सामान लेने गया तो वह वापस नहीं लौटा। वह बस व ट्रेनों के जरिये खाटू श्याम पहुंच गया। वहां पहुंचकर उसने घर के नंबर पर मिस कॉल दी। परिजनों ने कॉल किया तो फोन उठाने वाले ने बच्चे के बारे में बताया। परिजनों ने उसे आरपीएफ के सुपुर्द करने की बात कही तो बच्चा वहां से भाग गया। बाद में बच्चे को रेवाड़ी से बरामद किया गया। पूछताछ में सामने आया कि माता-पिता के डांटने पर उसने ऐसा किया था।
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एक बेटे को डांटा तो संगे भाई घर से निकलकर मुंबई पहुंचे
बेरी क्षेत्र में भी ऐसा ही मामला सामने आया, जहां जब बच्चों की मां ने अपने एक बेटे को धमका दिया तो इस बात को मन में रखकर दोनों सगे भाई घर से निकल गए। वह यहां से सीधे मुंबई पहुंच गए। वहां स्थानीय पुलिस ने इसकी सूचना परिजनों को दी। बाद में बेरी पुलिस पहुंची और पुलिस की टीम ने मुंबई से बच्चों को बरामद किया। दोनों बच्चों को काउंसिलिंग के बाद उनके परिजनों के हवाले कर दिया गया।
स्कूल जाने के लिए धमकाया तो घर से लापता हुआ छात्र
गांव भिंडावास से 7वीं कक्षा के छात्र ने दो दिन पहले जब स्कूल में जाने से मना किया तो उसकी मां ने बेटे को धमका दिया। उसके बाद वह अपनी मर्जी से बिना बताए घर से चला गया। परिजनों ने छात्र की आसपास व रिश्तेदारियों में तलाश भी की। बच्चे के पिता दिहाड़ी मजदूरी का काम करते हैं।
अभी गर्मियों की छुट्टियां खत्म हुई हैं। पीछे बच्चे काफी फ्री रहे। काेई फिजिकल एक्टीविटी नहीं की। केवल गेम्स, मोबाइल, टीवी में रहे। एकदम स्कूल जाने पर वह दबाव महसूस करते हैं। साथ ही किशोरावस्था में बच्चों में सहनशक्ति खत्म हो रही है। इसका मुख्य कारण एकल परिवार, शहरीकरण और बच्चों पर बुजुर्गों की देखरेख नहीं है। मां-बाप बच्चों को पूरा समय नहीं दे पा रहे। अधिकतर माता-पिता ड्यूटी करते हैं और बच्चों को समय नहीं दे पाते। इस कारण बच्चे के मन की बात बाहर नहीं आ पाती और वह ऐसे कदम उठा लेता है। इसलिए माता-पिता को अपने बच्चे को समय देकर उसकी बात सुननी चाहिए।
- डॉ. ब्रह्मदीप सिंह, मनोचिकित्सक एवं सिविल सर्जन, झज्जर
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भागने वाले बच्चों से जब भागने का कारण जाना जाता है तो चौकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं कि माता-पिता या घर के किसी सदस्य के डांट फटकार के कारण उन्होंने ऐसा कदम उठाया। उनकी बरामदगी होने के बाद बच्चों की काउंसलिंग कराई जा रही है ताकि बच्चे भविष्य में ऐसा कदम नहीं उठाए। पुलिस की मानें तो जनवरी से अब तक उनके पास गुमशुदगी के 300 के करीबन मामले आए हैं। इसमें 250 लोगों को बरामद भी किया गया है। इसमें से काफी मामले बच्चे व किशोरों के भागने के हैं।
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परिजनों ने डांटा तो खाटू श्याम पहुंचा किशोर
पिछले दिनों सिलानी गेट निवासी एक किशोर घर से सामान लेने गया तो वह वापस नहीं लौटा। वह बस व ट्रेनों के जरिये खाटू श्याम पहुंच गया। वहां पहुंचकर उसने घर के नंबर पर मिस कॉल दी। परिजनों ने कॉल किया तो फोन उठाने वाले ने बच्चे के बारे में बताया। परिजनों ने उसे आरपीएफ के सुपुर्द करने की बात कही तो बच्चा वहां से भाग गया। बाद में बच्चे को रेवाड़ी से बरामद किया गया। पूछताछ में सामने आया कि माता-पिता के डांटने पर उसने ऐसा किया था।
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एक बेटे को डांटा तो संगे भाई घर से निकलकर मुंबई पहुंचे
बेरी क्षेत्र में भी ऐसा ही मामला सामने आया, जहां जब बच्चों की मां ने अपने एक बेटे को धमका दिया तो इस बात को मन में रखकर दोनों सगे भाई घर से निकल गए। वह यहां से सीधे मुंबई पहुंच गए। वहां स्थानीय पुलिस ने इसकी सूचना परिजनों को दी। बाद में बेरी पुलिस पहुंची और पुलिस की टीम ने मुंबई से बच्चों को बरामद किया। दोनों बच्चों को काउंसिलिंग के बाद उनके परिजनों के हवाले कर दिया गया।
स्कूल जाने के लिए धमकाया तो घर से लापता हुआ छात्र
गांव भिंडावास से 7वीं कक्षा के छात्र ने दो दिन पहले जब स्कूल में जाने से मना किया तो उसकी मां ने बेटे को धमका दिया। उसके बाद वह अपनी मर्जी से बिना बताए घर से चला गया। परिजनों ने छात्र की आसपास व रिश्तेदारियों में तलाश भी की। बच्चे के पिता दिहाड़ी मजदूरी का काम करते हैं।
अभी गर्मियों की छुट्टियां खत्म हुई हैं। पीछे बच्चे काफी फ्री रहे। काेई फिजिकल एक्टीविटी नहीं की। केवल गेम्स, मोबाइल, टीवी में रहे। एकदम स्कूल जाने पर वह दबाव महसूस करते हैं। साथ ही किशोरावस्था में बच्चों में सहनशक्ति खत्म हो रही है। इसका मुख्य कारण एकल परिवार, शहरीकरण और बच्चों पर बुजुर्गों की देखरेख नहीं है। मां-बाप बच्चों को पूरा समय नहीं दे पा रहे। अधिकतर माता-पिता ड्यूटी करते हैं और बच्चों को समय नहीं दे पाते। इस कारण बच्चे के मन की बात बाहर नहीं आ पाती और वह ऐसे कदम उठा लेता है। इसलिए माता-पिता को अपने बच्चे को समय देकर उसकी बात सुननी चाहिए।
- डॉ. ब्रह्मदीप सिंह, मनोचिकित्सक एवं सिविल सर्जन, झज्जर