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उदीयमान सूर्य को अर्घ्य के साथ छठ पूजा संपन्न

Thu, 11 Nov 2021 11:36 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 11 Nov 2021 11:36 PM IST
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Chhath Puja concludes with Arghya to the rising sun
प्रकाश नगर में छठ पूजा पर भगवान सूर्य की आराधना करती व्रती महिलाएं। संवाद - फोटो : Bahadurgarh
बहादुरगढ़। पूर्वांचलवासियों का चार दिवसीय लोकप्रिय त्योहार छठ महापर्व वीरवार को उदय होते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ संपन्न हो गया। शहर में छोटे-बड़े 30 से अधिक घाटों पर श्रद्धालुओं ने पूजा की और उगते सूर्य को अर्घ्य दिया। सबसे अधिक भीड़ महावीर पार्क के निकट नहर किनारे और छोटूराम नगर में रही।
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सैनिक नगर में बिहार नवयुवक पूर्वांचल संघ समिति की ओर से छठ महापर्व के दौरान छठ पूजा एवं जागरण का भव्य आयोजन किया गया। इसमें मुख्यातिथि के तौर पर भाजपा महिला मोर्चा झज्जर जिलाध्यक्ष डॉ. नीना सतपाल राठी ने शिरकत की। इससे पहले उन्होंने पूजा घाट पहुंचकर पूर्वांचलवासियों को पर्व की शुभकामनाएं और रिबन काटकर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए डॉ. नीना ने कहा कि छठ पूजा का हिंदू धर्म में विशेष महत्व है।
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सूर्या रोशनी बहादुरगढ़ के परिसर में छठ घाट पर व्रतियों ने सूर्य को अर्घ्य देकर सनातन धर्म की सैकड़ों साल पुरानी परंपरा का श्रद्धा पूर्वक निर्वहन किया। यहां श्रद्धालुओं ने कहा कि छठ मैया की पूजा करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। डूबते सूर्य को अर्घ्य देने से स्वास्थ्य आदि से संबंधित जीवन की कई समस्याओं से छुटकारा मिलता है। शहर के सेक्टर-9, कसार, लाइन पार की बिहारी कॉलोनी, निजामपुर रोड की बिहारी कालोनी, बाबा हरीदास नगर, पटेलनगर, धर्मविहार और कई अन्य क्षेत्रों में छोटे-बड़े घाटों पर हजारों लोगों ने सूर्य भगवान को अर्घ्य दिया।
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चार दिनों के महापर्व में पहले दिन नहाय खाय से शुरुआत हुई और वीरवार को उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही महापर्व का भव्य समापन हुआ। छठ घाटों पर सुबह 4 बजे से ही लोगों का पहुंचना शुरू हो गया। लोग पहुंचते रहे और छठ घाटों पर प्रसाद के सूप और डालों को सजाकर रखते गए। छठ व्रत करने वाली महिलाएं तालाबों में उतर कर भगवान भास्कर के उगने का इंतजार करती दिखीं। कसार, परनाला और आसपास के गांवों के तालाबों पर भी काफी भीड़ पहुंची थी। पूजा समितियों ने सभी घाटों को बेहतर ढंग से सजाया था। रंगीन बल्बों और झालरों से सजे छठ घाट आकर्षक नजर आ रहे थे। वीरवार को सुबह की उपासना पूर्ण होने के बाद ही व्रतियों ने 36 घंटे का व्रत पूरा कर प्रसाद ग्रहण किया।
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