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Jhajjar-Bahadurgarh News: नहाय खाय के साथ छठ पर्व शुरू, खरना आज
Sun, 26 Oct 2025 01:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Sun, 26 Oct 2025 01:41 AM IST
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-फोटो 54 : बाजार में छठ पर्व के सामान की खरीदारी करती महिलाएं। संवाद
बहादुरगढ़। सूर्योपासना का महापर्व छठ शनिवार को नहाय-खाय के साथ शुरु हो गया। सुबह महिलाओं ने स्नान कर घर की सफाई की। इसके बाद छठ गीतों के साथ चने की दाल, लौकी की सब्जी और चावल खाकर व्रत की शरुआत की। पूर्वांचल परिवार अध्यक्ष प्रदीप सिन्हा ने बताया कि इस व्रत में सफाई और परंपरा का विशेष ध्यान रखा जाता है।
रविवार से घर के अन्य सदस्यों का उस कमरे में प्रवेश बंद होगा जिसमें व्रती महिलाएं या पुरुष रहेंगे और छठ के सामान रखने के साथ पकवान तैयार किए जाएंगे। नहाय-खाय के साथ शुरु होने वाले इस पर्व पर बाजारों में शनिवार को लौकी और चने की दाल की दुकानों पर भीड़ रही। रविवार को निर्जला व्रत (खरना) रखकर शाम को गुड़ की खीर, रोटी व फल खाएंगे।
सोमवार को निर्जला व्रत रखकर डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देंगे व मंगलवार को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर परिवार के मंगल की कामना करेंगे।
मिट्टी के चूल्हे पर बनता है प्रसाद
हर साल छठ का व्रत रखने वाली स्नेहा ने बताया कि इस व्रत के लिए शुद्धता का बहुत ज्यादा ख्याल रखा जाता है। इसके साथ ही यह पर्व परंपरा के साथ ही मनाया जाता है। प्रसाद बनाने के लिए मिट्टी के चूल्हे का प्रयोग किया जाता है, क्योंकि यह नया होता है और मिट्टी को शुद्ध माना जाता है। कई लोग चूल्हे पर नहीं बना पाते हैं तो उन्हें गैस के नए चूल्हे पर प्रसाद बनाना होता है।
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रविवार से घर के अन्य सदस्यों का उस कमरे में प्रवेश बंद होगा जिसमें व्रती महिलाएं या पुरुष रहेंगे और छठ के सामान रखने के साथ पकवान तैयार किए जाएंगे। नहाय-खाय के साथ शुरु होने वाले इस पर्व पर बाजारों में शनिवार को लौकी और चने की दाल की दुकानों पर भीड़ रही। रविवार को निर्जला व्रत (खरना) रखकर शाम को गुड़ की खीर, रोटी व फल खाएंगे।
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सोमवार को निर्जला व्रत रखकर डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देंगे व मंगलवार को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर परिवार के मंगल की कामना करेंगे।
मिट्टी के चूल्हे पर बनता है प्रसाद
हर साल छठ का व्रत रखने वाली स्नेहा ने बताया कि इस व्रत के लिए शुद्धता का बहुत ज्यादा ख्याल रखा जाता है। इसके साथ ही यह पर्व परंपरा के साथ ही मनाया जाता है। प्रसाद बनाने के लिए मिट्टी के चूल्हे का प्रयोग किया जाता है, क्योंकि यह नया होता है और मिट्टी को शुद्ध माना जाता है। कई लोग चूल्हे पर नहीं बना पाते हैं तो उन्हें गैस के नए चूल्हे पर प्रसाद बनाना होता है।

-फोटो 54 : बाजार में छठ पर्व के सामान की खरीदारी करती महिलाएं। संवाद
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