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Jhajjar-Bahadurgarh News: गुप्त नवरात्र की अष्टमी पर मां भीमेश्वरी देवी मंदिर में गूंजे जयकारे

Fri, 04 Jul 2025 12:41 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़ Updated Fri, 04 Jul 2025 12:41 AM IST
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Cheers echoed in Maa Bhimeshwari Devi temple on Ashtami of Gupt Navratri.
03jjrp08- बेरी ​स्थित माता भीमेश्वरी देवी मंदिर में पूजा करते पुजारी। संवाद
बेरी। आषाढ़ माह के गुप्त नवरात्र में अष्टमी के दिन बेरी स्थित मां भीमेश्वरी मंदिर में भक्तों का सैलाब उमड़ा। मंदिर में अलसुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतार लगनी शुरू हो गई थी। परंपरानुसार भक्तों ने पवित्र सरोवर से मिट्टी निकालकर व स्नान करके अपने परिवार के लिए मंगल कामना की।
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अलसुबह करीब पांच बजे मां भीमेश्वरी की प्रतिमा को भीतर वाले भवन से बाहर वाले भवन में लाया गया, जहां वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच मां का स्नान हुआ और भक्तों ने मंगला आरती की। मां भीमेश्वरी के दर्शनों का यह सिलसिला देर शाम तक जारी रहा। नवविवाहित जोड़ों ने गठजोड़े की जात लगाकर और नवजात बच्चों के बाल उतरवाकर भक्तों ने पूजा की।
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पुजारी ने मंत्रोच्चारण के साथ मां का स्नान करवाया और मंगला आरती करके मां के दर्शन भक्तों के लिए खोल दिए गए। बाहर वाले भवन में मां के दर्शनों का सिलसिला दोपहर तक जारी रहा। पुजारी कुलदीप वशिष्ठ ने बताया कि गुप्त नवरात्र में देवी की अराधना का अलग महत्व होता है। वर्ष में दो बार गुप्त नवरात्र आते हैं।
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धागा बांधकर मांगी मन्नतें
नवविवाहित जोड़ों ने गठजोड़े की जात, बच्चों के बाल उतरवाकर भक्तों ने पूजा अर्चना की। वहीं महिलाओं ने मां के मंदिर में पीपल के पेड़ पर धागा बांधकर मन्नत मागी। मंदिर के पुजारी कुलदीप वशिष्ठ का कहना है कि हर माह अष्टमी के दिन मां के दरबार में भक्त दर्शन करने के लिए आते हैं।



प्राचीन है मां भीमेश्वरी देवी मंदिर का इतिहास
मां भीमेश्वरी देवी मंदिर का इतिहास अति प्राचीन है। विद्वानों के अनुसार मां की मूर्ति को पांडु पुत्र भीम पाकिस्तान के हिंगजाल पर्वत से लेकर आए थे। भीम ने मां को अपने साथ चलने के लिए कहा तो मां ने पांडु पुत्र से कहा कि मैं तुम्हारे साथ तो चलूंगी, लेकिन तुम मुझे अपनी गोद में रखोगे। रास्ते में जहां भी उतारोगे, मैं उस स्थान से आगे नहीं जाऊंगी। भीम ने मां का कहना माना और गोद में उठाकर युद्ध भूमि की तरफ चल पड़ा। जब भीम मां को लेकर बेरी कस्बे से गुजर रहा था तो भीम को लघुशंका के लिए उन्हें अपने कंधे से उतार दिया। बाद में माता को वापस चलने के लिए अपनी गोद में उठाने लगा तो वह नहीं उठ पाई। तभी मां भीमेश्वरी की यहां स्थापना हुई और महाभारत के युद्ध के बाद यहां मंदिर की स्थापना कर दी गई।

03jjrp08- बेरी स्थित माता भीमेश्वरी देवी मंदिर में पूजा करते पुजारी। संवाद

03jjrp08- बेरी स्थित माता भीमेश्वरी देवी मंदिर में पूजा करते पुजारी। संवाद

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