फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Jhajjar/Bahadurgarh News ›   Bullad Pehelwan acquitted in nine-year-old Geico case, court finds evidence insufficient

Jhajjar-Bahadurgarh News: नौ साल पुराने जीको कंपनी प्रकरण में बुल्लड़ पहलवान बरी, अदालत ने साक्ष्यों को माना अपर्याप्त

Fri, 12 Jun 2026 04:54 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़ Updated Fri, 12 Jun 2026 04:54 AM IST
विज्ञापन
Bullad Pehelwan acquitted in nine-year-old Geico case, court finds evidence insufficient
बहादुरगढ़। जीको कंपनी से जुड़े करीब नौ वर्ष पुराने मामले में प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी आशिमा गर्ग की अदालत ने वीरेंद्र उर्फ बुल्लड़ पहलवान को आरोपों से बरी कर दिया। अदालत ने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपी के खिलाफ पुख्ता सबूत पेश नहीं कर सका।
विज्ञापन

अदालत के समक्ष अभियोजन पक्ष का आरोप था कि घटना के दौरान आरोपी ने सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाई तथा ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों के साथ आपराधिक बल का प्रयोग किया। हालांकि सुनवाई के दौरान पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के बयानों में इन आरोपों की पुष्टि नहीं हो सकी।
विज्ञापन


बहादुरगढ़ के थाना शहर में 28 जुलाई 2017 को दर्ज मामले में आरोप था कि जीको कंपनी में हुई एक श्रमिक की मौत के बाद उसे मुआवजा दिलाने के लिए चल रहे धरने के दौरान आरोपी ने सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाई और ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों के साथ आपराधिक बल का प्रयोग किया।
विज्ञापन
विज्ञापन

हालांकि सुनवाई के दौरान पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों के बयानों से इन आरोपों की पुष्टि नहीं हो सकी। अदालत ने अपने आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष का कोई भी गवाह यह साबित नहीं कर पाया कि आरोपी ने किसी को चोट पहुंचाई, सरकारी कार्य में व्यवधान डाला या बल प्रयोग किया।

फैसले में यह भी उल्लेख किया गया कि मामले के एक प्रमुख गवाह ने बयान दिया कि घटनास्थल पर भीड़ को हटाया नहीं गया था और लोगों का आना-जाना लगातार जारी था। वहीं रिकॉर्ड पर पेश किए गए फोटोग्राफ भारतीय साक्ष्य अधिनियम के तहत आवश्यक प्रमाण-पत्र के अभाव में स्वीकार्य नहीं पाए गए।

यह था मामला
बुल्लड़ पहलवान के अधिवक्ता बीएस डागर ने बताया कि करीब नौ वर्ष पहले कबीर बस्ती निवासी प्रदीप की जीको कंपनी में गैस ड्रम फटने से मृत्यु हो गई थी। घटना के बाद मृतक के परिजनों और स्थानीय लोगों ने मुआवजे की मांग को लेकर धरना शुरू किया था। बढ़ते तनाव के बीच पुलिस के अनुरोध पर बुल्लड़ पहलवान ने मध्यस्थता कर पीड़ित परिवार और कंपनी प्रबंधन के बीच समझौता करवाया जिसके बाद आंदोलन समाप्त हो गया था।

अभियोजन पक्ष पुलिस अधिकारियों की गवाही पर रहा निर्भर
अदालत ने यह भी माना कि पूरे मामले में अभियोजन पक्ष केवल पुलिस अधिकारियों की गवाही पर निर्भर रहा। घटना कंपनी परिसर में हुई थी इसके बावजूद कंपनी कर्मचारियों या अन्य स्वतंत्र व्यक्तियों को गवाह नहीं बनाया गया। आरोपी की घटनास्थल पर मौजूदगी साबित करने के लिए भी कोई स्वतंत्र साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया और उसकी गिरफ्तारी भी मौके से नहीं हुई थी। न्यायालय ने कहा कि आपराधिक मामलों में दोष सिद्ध करने की जिम्मेदारी अभियोजन पक्ष की होती है। यदि उपलब्ध साक्ष्यों से दो संभावित निष्कर्ष निकलते हैं तो आरोपी के पक्ष में जाने वाले दृष्टिकोण को स्वीकार किया जाना चाहिए। इसी आधार पर अदालत ने वीरेंद्र उर्फ बुल्लड़ पहलवान को संदेह का लाभ देते हुए आरोपों से बरी कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed