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Jhajjar-Bahadurgarh News: खाड़ी देशों में युद्ध से बहादुरगढ़ उद्योग चिंतित, 70 प्रतिशत निर्यात पर संकट

Mon, 02 Mar 2026 03:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़ Updated Mon, 02 Mar 2026 03:25 AM IST
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Bahadurgarh industry worried due to war in Gulf countries, 70 percent exports in danger
फोटो-65: सुरेंद्र वशिष्ठ
बहादुरगढ़। खाड़ी देशों में चल रही जंग का असर बहादुरगढ़ के उद्योगों पर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। यहां से हर साल करीब 10 हजार करोड़ से अधिक राशि का निर्यात होता है। अकेले फुटवियर का 5 हजार करोड़ से ज्यादा का सालाना निर्यात होता है। इसमें से अकेले 70 प्रतिशत निर्यात खाड़ी देशों में ही है।
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औद्योगिक नगरी बहादुरगढ़ में बने गारमेंट, फुटवियर, ऑटोमोबाइल पार्ट्स, इलेक्ट्रिक सामान, सेरेमिक टाइल्स, बाथवेयर, नॉन-लेदर फुटवियर और कंट्रोल पैनल सहित अनेक उत्पाद खाड़ी देशों को निर्यात होते हैं। फिलहाल कोई आर्डर रद नहीं हैं लेकिन युद्ध लंबा चला तो उद्यमियों को आर्डर रद्द होने की संभावना है।
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उद्यमियों का कहना है कि यदि युद्ध लंबा चला तो ऑर्डर रद्द होने, भुगतान अटकने और माल ढुलाई प्रभावित होने की संभावना बढ़ जाएगी। समुद्री मार्गों पर जोखिम बढ़ने से बीमा व फ्रेट लागत में इजाफा होगा इससे उत्पाद महंगे पड़ेंगे और प्रतिस्पर्धा कमजोर होगी।
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बोले उद्यमी...
बहादुरगढ़ में करीब 5 हजार करोड़ से ज्यादा का नॉन लैदर फुटवियर का निर्यात विभिन्न देशों में होता है। इसमें से 70 प्रतिशत निर्यात खाड़ी देशों में होता है। अगर युद्ध लंबा चला तो फुटवियर उद्योग काफी प्रभावित होगा। सबसे ज्यादा नुकसान भी इसी उद्योग को होगा और यहां की औद्योगिक अर्थव्यवस्था काफी चरमरा जाएगी।

- नरेंद्र छिकारा, वरिष्ठ उपप्रधान, फुटवियर पार्क एसोसिएशन, बहादुरगढ़।

फुटवियर को छोड़कर हमारे अधिकांश उत्पाद केमिकल्स और पेट्रो केमिकल्स पर निर्भर हैं। कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से लागत बढ़ेगी और उत्पादन प्रभावित होगा। अगर निर्यात रुका तो हजारों मजदूरों की रोजी-रोटी पर असर पड़ेगा। फुटवियर और चमड़े के उत्पादों का बड़ा बाजार खाड़ी देश ही हैं। कच्चे माल की आपूर्ति बाधित हुई तो फैक्ट्रियों में उत्पादन रुक सकता है। इससे बैंकों के कर्ज बढ़ेंगे और महंगाई का दबाव भी बढ़ेगा।
- प्रवीण गर्ग, प्रधान, कन्फेडरेशन ऑफ बहादुरगढ़ इंडस्ट्री।



निर्यात होने वाले सामान को पैक करने के लिए पैकेजिंग मेटीरियल की जरूरत पड़ती है। इसी के सहारे पैकेजिंग उद्योग भी चल रहा है। अगर माल ही निर्यात नहीं होगा तो इसका सीधा असर पैकेजिंग उद्योग पर भी पड़ेगा। सरकार निर्यातकों के लिए राहत पैकेज और वैकल्पिक बाजार तलाशने की दिशा में कदम बढ़ाने चाहिए ताकि संभावित संकट से उद्योगों को बचाया जा सके।

- सुरेंद्र वशिष्ठ, पैकेजिंग उद्यमी, बहादुरगढ़।

दुबई जाने से परहेज कर रहे लोग, 22 टिकट रद कराई

बहादुरगढ़ में टूर-ट्रेवलिंग का काम कर रहे चंद्र अरोड़ा ने बताया कि खाड़ी देशों में शुरू हुए युद्ध से खलबली मच गई है। हमारे यहां से ज्यादा लोग दुबई आते-जाते रहते हैं। शनिवार को भी एक ग्रुप को जाना था। यह टूर रद्द हो गया। ऐसे में एक साथ 22 लोगों ने अपनी टिकट रद्द करवाई हैं। अगर युद्ध लंबा चला तो हमारा तो सारा कारोबार ही ठप हो जाएगा। दो दिन में ही लाखों का नुकसान हुआ है। हमारा टूर-ट्रेवलिंग का सारा कारोबार दुबई पर निर्भर है। वहां युद्ध जैसे हालात होने से काफी नुकसान हुआ है।

फोटो-65: सुरेंद्र वशिष्ठ

फोटो-65: सुरेंद्र वशिष्ठ

फोटो-65: सुरेंद्र वशिष्ठ

फोटो-65: सुरेंद्र वशिष्ठ

फोटो-65: सुरेंद्र वशिष्ठ

फोटो-65: सुरेंद्र वशिष्ठ

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