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::::पैरा एशियन गेम्स में रामपाल के रजत पदक जीतने पर खुशी का माहौल
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झज्जर। माछरौली निवासी रामपाल ने चीन में चल रही पैरा एशियन गेम्स में पुरुषों की ऊंची कूद टी47 स्पर्धा में रजत पदक जीता है। पदक जीतने पर परिवार व गांव में खुशी का माहौल है। रामपाल पिछले छह माह से पैरा एशियन गेम्स की तैयारी कर रहे थे और वह इस दौरान घर भी नहीं आए। उनका तीन साल का बेटा भी है। बेटे और परिवार से दूर रहकर वह लगातार पैरा एशियन गेम्स की तैयारी में जुटे थे। उनकी तैयारी का नतीजा रहा कि वह गेम्स में रजत पदक जीते। हालांकि उनको इस बार स्वर्ण की उम्मीद थी, लेकिन रजत पदक जीतकर उन्होंने देश का गौरव बढ़ाया है।
रामपाल इस समय खेल विभाग में उप निदेशक के पद पर कार्यरत हैं। पिछली बार भी उन्होंने पैरा एशियन गेम्स में रजत पदक जीता था। वह एक या दो नवंबर को भारत वापस लौटेंगे। उनको मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित किया जाएगा। इसके बाद वह दिल्ली में होने वाले गेम्स में भाग लेंगे। रामपाल को अपनी मां के हाथ की खोया खीर (छेनाखीर) बहुत पसंद है। जब भी वे घर आते हैं, तो इसका लुत्फ जरूर उठाते हैं। गांव माछरौली निवासी रामपाल के भाई रामकेश ने बताया कि उनके शुरुआत में परिवार की आर्थिक स्थिति भी अधिक मजबूत नहीं थी, इसलिए रामपाल कई परेशानियों से जूझते हुए आज इस मुकाम तक पहुंचे हैं।
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रामपाल इस समय खेल विभाग में उप निदेशक के पद पर कार्यरत हैं। पिछली बार भी उन्होंने पैरा एशियन गेम्स में रजत पदक जीता था। वह एक या दो नवंबर को भारत वापस लौटेंगे। उनको मुख्यमंत्री द्वारा सम्मानित किया जाएगा। इसके बाद वह दिल्ली में होने वाले गेम्स में भाग लेंगे। रामपाल को अपनी मां के हाथ की खोया खीर (छेनाखीर) बहुत पसंद है। जब भी वे घर आते हैं, तो इसका लुत्फ जरूर उठाते हैं। गांव माछरौली निवासी रामपाल के भाई रामकेश ने बताया कि उनके शुरुआत में परिवार की आर्थिक स्थिति भी अधिक मजबूत नहीं थी, इसलिए रामपाल कई परेशानियों से जूझते हुए आज इस मुकाम तक पहुंचे हैं।
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