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Jhajjar-Bahadurgarh News: नेशनल और स्टेट हाईवे पर जान जोखिम में डाल रहे पशु
Thu, 04 Dec 2025 01:52 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, झज्जर/बहादुरगढ़
Updated Thu, 04 Dec 2025 01:52 AM IST
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03jjrp04- रोहतक रोड पर गोवंश को विचरण करवाते पशुपालक। ऐसे में कई बार हादसे हो जाते हैं। संवाद
झज्जर। शहर की सड़कों की तरह नेशनल व स्टेट हाईवे भी लोगों के लिए सुरक्षित नहीं हैं। हर साल आठ से दस मौत पशुओं के कारण हो रही हैं। खास तौर पर घटना उन स्टेट हाईवे पर हो रहीं हैं जहां बेसहारा गोवंश की संख्या सबसे ज्यादा है। नेशनल हाईवे पर कुत्ते, बिल्ली के कारण हादसे हो रहे हैं तो स्टेट हाईवे पर कुत्ते, नीलगाय, बेसहारा गोवंश के कारण हादसे हो रहे हैं।
नेशनल हाईवे पर प्रतिदिन दो से तीन पशुओं के वाहनों के आगे आने के कारण हादसे हो रहे हैं। यह हादसे गंभीर नहीं होते, लेकिन इसमें पशुओं की जान भी जा रही हैं। रेवाड़ी-झज्जर-रोहतक नेशनल हाईवे-352 पर प्रतिदिन दो हादसे पशुओं के कारण हो रहे हैं। झज्जर से रोहतक 28 किलोमीटर में दोनों तरफ प्रतिदिन एक-दो हादसे बड़े वाहनों और पशुओं के बीच होते हैं।
झज्जर-गुरुग्राम, झज्जर-बहादुरगढ़ रोड स्टेट हाईवे हैं। यहां पर कुत्तों और बेसहारा गोवंश की संख्या सबसे ज्यादा है। बेसहारा गोवंश तो डिवाइडर पर बैठने के अलावा सड़कों के बीच घूमते रहते हैं, जो हादसों का कारण बन रहे हैं। इस साल अब तक तीन लोगों की जान बेसहारा पशुओं के कारण जा चुकी है।
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नप पकड़ रही गोवंश, फिर भी संख्या नहीं हो रही कम
नगर परिषद ने बेसहारा गोवंश को पकड़ने के लिए टेंडर लगाया हुआ है। अब तक 700 के करीबन पशु पकड़कर गोशाला में छोड़ा जा चुका है। उसके बावजूद शहर की सड़कों के अलावा स्टेट हाईवे पर बेसहारा पशुओं की संख्या कम नहीं हो रही।
नेशनल हाईवे पर हादसे के बाद कोई नहीं उठाता पशु
नेशनल हाईवे पर वाहनों की चपेट में आने से पशुओं की मौत हो जाती है। हाईवे से पशुओं को उठाने के लिए कोई संस्था, नगर परिषद या फिर एनएचएआई कोई कार्रवाई नहीं करती। पशुओं के शव सड़क पर पड़े-पड़े सड़ जाते हैं, लेकिन उनको कोई नहीं दफनाता।
पिछले कुछ समय में पशुओं के कारण जिले में हुए हादसे...
- 9 जुलाई 2024 को सुरेहती निवासी परविंद्र की झज्जर-कोसली रोड पर स्थित एचपी गैस गोदाम के पास मोटरसाइकिल के सामने पशु आने के कारण संतुलन बिगड़ा। सड़क पर गिरने से उनकी मौत हो गई थी।
- करीबन एक साल पहले गांव गोयला कलां के पास एक बेसहारा पशु हाइवा डंपर के सामने आ गया था जिससे ड्राइवर ने डंपर से संतुलन खो दिया और वह पलट गया था। हादसे में 32 वर्षीय नीरज निवासी गांव कबलाना की मौत हो गई थी।
- 16 अगस्त 2024 को बादली रोड पर बाइक के सामने बेसहारा पशु आने से मातनहेल निवासी 44 वर्षीय सुनील की मौत हो गई थी।
- मई 2025 में बहादुरगढ़ के बादली रोड पर दो बेसहारा पशु आपस में लड़ रहे थे। इनमें से एक पशु वहां से गुजर रही कार के ऊपर से कूद गया था। इसमें कार चालक की जान बाल-बाल बची थी लेकिन कार में काफी नुकसान हुआ था।
- 31 अगस्त 2025 को बहराणा से डीघल जाते समय बीच रास्ते में अचानक सामने आई गाय को बचाने के चक्कर में ऑटो पलट गया। इस हादसे में बहराणा निवासी जयपाल ने दम तोड़ दिया।
- 18 अक्तूबर को राहुल निवासी उखलचना (कोट) की जटवाड़ा गांव के पास उसकी गाड़ी के आगे भैंसा आने से मौत हो गई थी।
गोवंश को शहर से पकड़ने का अभियान जारी है। शहर की सड़कों से उनको पकड़कर गोशाला में छोड़ा जा रहा है।
- जिले सिंह सैनी, चेयरमैन नगर परिषद
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नेशनल हाईवे पर प्रतिदिन दो से तीन पशुओं के वाहनों के आगे आने के कारण हादसे हो रहे हैं। यह हादसे गंभीर नहीं होते, लेकिन इसमें पशुओं की जान भी जा रही हैं। रेवाड़ी-झज्जर-रोहतक नेशनल हाईवे-352 पर प्रतिदिन दो हादसे पशुओं के कारण हो रहे हैं। झज्जर से रोहतक 28 किलोमीटर में दोनों तरफ प्रतिदिन एक-दो हादसे बड़े वाहनों और पशुओं के बीच होते हैं।
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झज्जर-गुरुग्राम, झज्जर-बहादुरगढ़ रोड स्टेट हाईवे हैं। यहां पर कुत्तों और बेसहारा गोवंश की संख्या सबसे ज्यादा है। बेसहारा गोवंश तो डिवाइडर पर बैठने के अलावा सड़कों के बीच घूमते रहते हैं, जो हादसों का कारण बन रहे हैं। इस साल अब तक तीन लोगों की जान बेसहारा पशुओं के कारण जा चुकी है।
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नप पकड़ रही गोवंश, फिर भी संख्या नहीं हो रही कम
नगर परिषद ने बेसहारा गोवंश को पकड़ने के लिए टेंडर लगाया हुआ है। अब तक 700 के करीबन पशु पकड़कर गोशाला में छोड़ा जा चुका है। उसके बावजूद शहर की सड़कों के अलावा स्टेट हाईवे पर बेसहारा पशुओं की संख्या कम नहीं हो रही।
नेशनल हाईवे पर हादसे के बाद कोई नहीं उठाता पशु
नेशनल हाईवे पर वाहनों की चपेट में आने से पशुओं की मौत हो जाती है। हाईवे से पशुओं को उठाने के लिए कोई संस्था, नगर परिषद या फिर एनएचएआई कोई कार्रवाई नहीं करती। पशुओं के शव सड़क पर पड़े-पड़े सड़ जाते हैं, लेकिन उनको कोई नहीं दफनाता।
पिछले कुछ समय में पशुओं के कारण जिले में हुए हादसे...
- 9 जुलाई 2024 को सुरेहती निवासी परविंद्र की झज्जर-कोसली रोड पर स्थित एचपी गैस गोदाम के पास मोटरसाइकिल के सामने पशु आने के कारण संतुलन बिगड़ा। सड़क पर गिरने से उनकी मौत हो गई थी।
- करीबन एक साल पहले गांव गोयला कलां के पास एक बेसहारा पशु हाइवा डंपर के सामने आ गया था जिससे ड्राइवर ने डंपर से संतुलन खो दिया और वह पलट गया था। हादसे में 32 वर्षीय नीरज निवासी गांव कबलाना की मौत हो गई थी।
- 16 अगस्त 2024 को बादली रोड पर बाइक के सामने बेसहारा पशु आने से मातनहेल निवासी 44 वर्षीय सुनील की मौत हो गई थी।
- मई 2025 में बहादुरगढ़ के बादली रोड पर दो बेसहारा पशु आपस में लड़ रहे थे। इनमें से एक पशु वहां से गुजर रही कार के ऊपर से कूद गया था। इसमें कार चालक की जान बाल-बाल बची थी लेकिन कार में काफी नुकसान हुआ था।
- 31 अगस्त 2025 को बहराणा से डीघल जाते समय बीच रास्ते में अचानक सामने आई गाय को बचाने के चक्कर में ऑटो पलट गया। इस हादसे में बहराणा निवासी जयपाल ने दम तोड़ दिया।
- 18 अक्तूबर को राहुल निवासी उखलचना (कोट) की जटवाड़ा गांव के पास उसकी गाड़ी के आगे भैंसा आने से मौत हो गई थी।
गोवंश को शहर से पकड़ने का अभियान जारी है। शहर की सड़कों से उनको पकड़कर गोशाला में छोड़ा जा रहा है।
- जिले सिंह सैनी, चेयरमैन नगर परिषद

03jjrp04- रोहतक रोड पर गोवंश को विचरण करवाते पशुपालक। ऐसे में कई बार हादसे हो जाते हैं। संवाद

03jjrp04- रोहतक रोड पर गोवंश को विचरण करवाते पशुपालक। ऐसे में कई बार हादसे हो जाते हैं। संवाद

03jjrp04- रोहतक रोड पर गोवंश को विचरण करवाते पशुपालक। ऐसे में कई बार हादसे हो जाते हैं। संवाद