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वायरल वीडियो क ो ग्रामीणों ने बताया आधा सच
Updated Sat, 18 Aug 2018 01:00 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़। सोशल साइट्स पर वीडियो डालकर नवीन दलाल और द्रवेश शाहपुर ने भले ही उमर खालिद पर जानलेवा हमले की जिम्मेदारी ली हो, मगर उक्त वायरल वीडियो को नवीन के परिजनों और ग्रामीणों ने आधा सच बताया है। ग्रामीण का तर्क है कि समर्पित होकर मूक प्राणियों (गोवंश) की सेवा करने वाला नवीन ऐसा नहीं कर सकता। हो सकता है किसी के दबाव में नवीन और उसके साथी ने यह बात कबूल की हो। इस मामले में दिल्ली पुलिस लगातार यहां के ग्रामीणों से संपर्क साध रही है, जबकि स्थानीय पुलिस शांत है।
दरअसल, गांव मांडोठी का 28 वर्षीय नवीन पिछले करीब पांच-छह साल से गोसेवा में सक्रिय है। वह गोरक्षक सेना नाम से एक संगठन चलाता है। गांव शाहपुर का द्रवेश नवीन का निकटतम मित्र है। घर पर नवीन के पिता, दादी और उसकी पत्नी है। वीडियो वायरल होने के बाद गांव मांडोठी का यह युवक सुर्खियों में बना हुआ है। इस मामले में नवीन के गांव मांडोठी के लगभग 20 लोगों से बात की गई। कुछ ने वीडियो को बनावटी बताया तो कुछ ने कहा कि दबाव देकर यह वीडियो बनवाया गया है। कुछ ऐसे भी थे, जिन्होंने कहा कि गलत के साथ ऐसा किया तो क्या गलत है। गांव के निवासी विक्की ने कहा कि गोवंश को तस्करों से बचाने के लिए जो शख्स रात-रात घर से बाहर रहता है वो अपराध क्यों करेगा। बकौल विक्की, उक्त वीडियो उसने भी देखी है। वीडियो में नवीन रुक-रुक कर बोल रहा है। ऐसा प्रतीत हो रहा है मानों कोई जबरदस्ती उनसे वीडियो शूट करा रहा है। गांव के सरपंच प्रतिनिधि सतपाल चिट्टी ने कहा कि इस मामले में कोई स्थानीय पुलिसकर्मी तो उनके पास नहीं आया, लेकिन दिल्ली पुलिस कर्मचारी आए थे। उन्होंने नवीन के बारे में जानकारी मांगी थी। सतपाल ने कहा कि नवीन की छवि गांव में सही है।
दादी को सता रही पोते की चिंता
शुक्रवार को नवीन के घर पर केवल उनकी दादी ज्ञानो देवी थी। वीडियो के बारे में पूछा गया तो वो बोलीं कि उन्हें इस बारे में कुछ नहीं पता। हां, चार-पांच दिन पहले वो घर से निकला था। तब उसने कहा था कि जरूरी काम जा रहा हूं, शाम तक आऊंगा लेकिन अभी तक नहीं आया है। गोरक्षा से जुड़ा होने के कारण वो कई-कई दिन घर से बाहर रहता है, हम सोचे कि वो इसी वजह से घर से बाहर चल रहा है। उन्हें नहीं पता कि इस वीडियो में कितनी सच्चाई है, लेकिन पोते की चिंता बेहद सता रही है।
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संत गोपालदास ने किया नवीन को प्रत्याशी घोषित
नवीन दलाल गोचरण भूमि के लिए आंदोलन करने वाले संत गोपालदास का करीबी रहा है। कुछ समय पहले गोतस्करों का ट्रक पकड़ने पर पुलिस द्वारा नवीन की पिटाई किए जाने से यहां मामला काफी तूल पकड़ गया था। तब संत गोपालदास ने यहां आकर नवीन का समर्थन किया था। उस दौरान संत गोपालदास ने कहा था कि वह गोरक्षा के लिए खुद की पार्टी बनाएंगे और अगले विधानसभा चुनाव में नवीन दलाल बहादुरगढ़ में पार्टी के प्रत्याशी होंगे।
ये है मामला
गौरतलब है कि गत सोमवार को जेएनयू के छात्र उमर खालिद पर दिल्ली में जानलेवा हमला हुआ था। 15 अगस्त को फेसबुक पर वीडियो अपलोड कर बहादुरगढ़ खंड के गांव मांडोठी निवासी नवीन दलाल और शाहपुर के द्रवेश ने उक्त हमले की जिम्मेदारी ली थी। वीडियो में दोनों ने शुक्रवार 17 अगस्त को पंजाब के सराभा गांव में क्रांतिकारी करतार सिंह सराभा के निवास पर आत्मसमर्पण करने की बात कही थी। शुक्रवार की देर शाम तक गिरफ्तारी तो नहीं हो पाई थी।
अधिकारी बोले
वीडियो मैने देखा है, उसके पीछे कितनी सच्चाई है यह जांच का विषय है। इस संबंध में दिल्ली पुलिस की ओर से उनसे अभी तक संपर्क नहीं किया गया है। न ही किसी की ओर से शिकायत दी गई है।
- जसबीर सिंह, सदर थाना प्रभारी, बहादुरगढ़।
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बहादुरगढ़। सोशल साइट्स पर वीडियो डालकर नवीन दलाल और द्रवेश शाहपुर ने भले ही उमर खालिद पर जानलेवा हमले की जिम्मेदारी ली हो, मगर उक्त वायरल वीडियो को नवीन के परिजनों और ग्रामीणों ने आधा सच बताया है। ग्रामीण का तर्क है कि समर्पित होकर मूक प्राणियों (गोवंश) की सेवा करने वाला नवीन ऐसा नहीं कर सकता। हो सकता है किसी के दबाव में नवीन और उसके साथी ने यह बात कबूल की हो। इस मामले में दिल्ली पुलिस लगातार यहां के ग्रामीणों से संपर्क साध रही है, जबकि स्थानीय पुलिस शांत है।
दरअसल, गांव मांडोठी का 28 वर्षीय नवीन पिछले करीब पांच-छह साल से गोसेवा में सक्रिय है। वह गोरक्षक सेना नाम से एक संगठन चलाता है। गांव शाहपुर का द्रवेश नवीन का निकटतम मित्र है। घर पर नवीन के पिता, दादी और उसकी पत्नी है। वीडियो वायरल होने के बाद गांव मांडोठी का यह युवक सुर्खियों में बना हुआ है। इस मामले में नवीन के गांव मांडोठी के लगभग 20 लोगों से बात की गई। कुछ ने वीडियो को बनावटी बताया तो कुछ ने कहा कि दबाव देकर यह वीडियो बनवाया गया है। कुछ ऐसे भी थे, जिन्होंने कहा कि गलत के साथ ऐसा किया तो क्या गलत है। गांव के निवासी विक्की ने कहा कि गोवंश को तस्करों से बचाने के लिए जो शख्स रात-रात घर से बाहर रहता है वो अपराध क्यों करेगा। बकौल विक्की, उक्त वीडियो उसने भी देखी है। वीडियो में नवीन रुक-रुक कर बोल रहा है। ऐसा प्रतीत हो रहा है मानों कोई जबरदस्ती उनसे वीडियो शूट करा रहा है। गांव के सरपंच प्रतिनिधि सतपाल चिट्टी ने कहा कि इस मामले में कोई स्थानीय पुलिसकर्मी तो उनके पास नहीं आया, लेकिन दिल्ली पुलिस कर्मचारी आए थे। उन्होंने नवीन के बारे में जानकारी मांगी थी। सतपाल ने कहा कि नवीन की छवि गांव में सही है।
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दादी को सता रही पोते की चिंता
शुक्रवार को नवीन के घर पर केवल उनकी दादी ज्ञानो देवी थी। वीडियो के बारे में पूछा गया तो वो बोलीं कि उन्हें इस बारे में कुछ नहीं पता। हां, चार-पांच दिन पहले वो घर से निकला था। तब उसने कहा था कि जरूरी काम जा रहा हूं, शाम तक आऊंगा लेकिन अभी तक नहीं आया है। गोरक्षा से जुड़ा होने के कारण वो कई-कई दिन घर से बाहर रहता है, हम सोचे कि वो इसी वजह से घर से बाहर चल रहा है। उन्हें नहीं पता कि इस वीडियो में कितनी सच्चाई है, लेकिन पोते की चिंता बेहद सता रही है।
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नवीन दलाल गोचरण भूमि के लिए आंदोलन करने वाले संत गोपालदास का करीबी रहा है। कुछ समय पहले गोतस्करों का ट्रक पकड़ने पर पुलिस द्वारा नवीन की पिटाई किए जाने से यहां मामला काफी तूल पकड़ गया था। तब संत गोपालदास ने यहां आकर नवीन का समर्थन किया था। उस दौरान संत गोपालदास ने कहा था कि वह गोरक्षा के लिए खुद की पार्टी बनाएंगे और अगले विधानसभा चुनाव में नवीन दलाल बहादुरगढ़ में पार्टी के प्रत्याशी होंगे।
ये है मामला
गौरतलब है कि गत सोमवार को जेएनयू के छात्र उमर खालिद पर दिल्ली में जानलेवा हमला हुआ था। 15 अगस्त को फेसबुक पर वीडियो अपलोड कर बहादुरगढ़ खंड के गांव मांडोठी निवासी नवीन दलाल और शाहपुर के द्रवेश ने उक्त हमले की जिम्मेदारी ली थी। वीडियो में दोनों ने शुक्रवार 17 अगस्त को पंजाब के सराभा गांव में क्रांतिकारी करतार सिंह सराभा के निवास पर आत्मसमर्पण करने की बात कही थी। शुक्रवार की देर शाम तक गिरफ्तारी तो नहीं हो पाई थी।
अधिकारी बोले
वीडियो मैने देखा है, उसके पीछे कितनी सच्चाई है यह जांच का विषय है। इस संबंध में दिल्ली पुलिस की ओर से उनसे अभी तक संपर्क नहीं किया गया है। न ही किसी की ओर से शिकायत दी गई है।
- जसबीर सिंह, सदर थाना प्रभारी, बहादुरगढ़।