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परिचालक लाइसेंस की खिड़की बंद होने पर आवेदकों ने काटा बवाल
Updated Thu, 22 Jun 2017 02:43 AM IST
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परिचालक लाइसेंस बनवाने आए आवेदक खिड़की बंद मिलने पर भड़के
अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
परिचालक लाइसेंस बनवाने के लिए लघु सचिवालय पहुंचे आवेदकों ने खिड़की बंद मिलने पर विरोध प्रदर्शन किया। आवेदकों ने अधिकारियों व कर्मचारियों पर मनमानी के आरोप जड़ते हुए करीब एक घंटे तक हंगामा किया। रेडक्रॉस सोसायटी के सदस्यों ने मौके पर पहुंचकर प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत कर खिड़की खुलवाकर आवेदन लेने की प्रक्रिया शुरू करवाई। इस दौरान यह मामला एडीसी और एसडीएम के संज्ञान में भी आवेदक लेकर आए।
रेडक्रॉस सोसायटी सदस्य रिंपी फौगाट ने बताया कि लघु सचिवालय में परिचालक लाइसेंस बनाने के लिए एक खिड़की बनाई गई है। बुधवार सुबह कर्मचारियों ने खिड़की को बंद कर आवेदन लेने से मना कर दिया। इस दौरान मौके पर मौजूद करीब 200 आवेदकों का गुस्सा फूट पड़ा और वो यहां तैनात कर्मचारियों से बहस करते नजर आए। आवेदकों ने बताया कि इससे पहले जिला प्रशासन ने प्रोविजनल के साथ-साथ एफएबी फॉर्म को भी अनिवार्य किया था। आवेदकों ने बताया कि इस शर्त को पूरा करने के बाद भी उनकी फाइल जमा करने से कर्मचारियों ने इंकार कर दिया। आवेदकों ने बताया कि एक्सपायर हो चुके उनके हैवी ड्राइविंग लाइसेंस भी जिला प्रशासन रिन्यू नहीं कर रहा। आवेदकों ने बताया कि लाइसेंस की वैधता खत्म होने के दो साल बाद तक इन्हें रिन्यू करवा सकते हैं जबकि प्रशासन वैधता खत्म होते ही नए लाइसेंस की प्रक्रिया शुरू करने का तर्क दे रहा है।
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अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
परिचालक लाइसेंस बनवाने के लिए लघु सचिवालय पहुंचे आवेदकों ने खिड़की बंद मिलने पर विरोध प्रदर्शन किया। आवेदकों ने अधिकारियों व कर्मचारियों पर मनमानी के आरोप जड़ते हुए करीब एक घंटे तक हंगामा किया। रेडक्रॉस सोसायटी के सदस्यों ने मौके पर पहुंचकर प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत कर खिड़की खुलवाकर आवेदन लेने की प्रक्रिया शुरू करवाई। इस दौरान यह मामला एडीसी और एसडीएम के संज्ञान में भी आवेदक लेकर आए।
रेडक्रॉस सोसायटी सदस्य रिंपी फौगाट ने बताया कि लघु सचिवालय में परिचालक लाइसेंस बनाने के लिए एक खिड़की बनाई गई है। बुधवार सुबह कर्मचारियों ने खिड़की को बंद कर आवेदन लेने से मना कर दिया। इस दौरान मौके पर मौजूद करीब 200 आवेदकों का गुस्सा फूट पड़ा और वो यहां तैनात कर्मचारियों से बहस करते नजर आए। आवेदकों ने बताया कि इससे पहले जिला प्रशासन ने प्रोविजनल के साथ-साथ एफएबी फॉर्म को भी अनिवार्य किया था। आवेदकों ने बताया कि इस शर्त को पूरा करने के बाद भी उनकी फाइल जमा करने से कर्मचारियों ने इंकार कर दिया। आवेदकों ने बताया कि एक्सपायर हो चुके उनके हैवी ड्राइविंग लाइसेंस भी जिला प्रशासन रिन्यू नहीं कर रहा। आवेदकों ने बताया कि लाइसेंस की वैधता खत्म होने के दो साल बाद तक इन्हें रिन्यू करवा सकते हैं जबकि प्रशासन वैधता खत्म होते ही नए लाइसेंस की प्रक्रिया शुरू करने का तर्क दे रहा है।
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