{"_id":"5c685d68bdec2273a2563e74","slug":"81550343528-jhajjar-bahadurgarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सिविल अस्पताल में नहीं मिला बी नेगेटिव ब्लड ग्रुप, तीन दिन से आयरन के इंजेक्शल लगवा रही युवती","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सिविल अस्पताल में नहीं मिला बी नेगेटिव ब्लड ग्रुप, तीन दिन से आयरन के इंजेक्शल लगवा रही युवती
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अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी। रक्तदान के मामले में प्रदेश में दादरी जिला प्रदेश में भले ही नंबर वन हो लेकिन इसके बावजूद जिलेवासियों को समय पर खून नहीं मिल पा रहा। हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसमें ब्लड न मिलने के चलत युवती को आयरन के इंजेक्षन लगवाने पड़ रहे हैं। उक्त युवती का ब्लड ग्रुप बी नेगेटिव है जो कि अस्पताल के ब्लड स्टोरेज बैंक में पिछले तीन दिनों से नहीं है। वहीं, युवती पिछले तीन दिनों से लगातार इंजेक्षन लगवाने सिविल अस्पताल पहुंच रही है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग अधिकारियों का तर्क है कि सप्ताह में दो बार भिवानी ब्लड बैंक से रक्त लाया जाता है और सोमवार को ही ब्लड मंगवाकर युवती को चढ़वा दिया जाएगा।
शहर निवासी एक युवती आशा ने बताया कि उसमें महज पांच ग्राम ही खून था। गत 13 फरवरी को वह सिविल अस्पताल पहुंची तो जांच के बाद उसे एक यूनिट रक्त चढ़वाने का परामर्श चिकित्सक ने दिया। जब वह ब्लड लेने के लिए सिविल अस्पताल के ब्लड बैंक पहुंची तो यहां बी नेगेटिव ग्रुप नहीं मिला। युवती ने बताया कि यहां तैनात महिला कर्मचारी ने बताया कि अस्पताल इस समय बी नेगेटिव ग्रुप को छोड़कर सभी ग्रुप है। युवती ने बताया कि बी ग्रुप नहीं होने के चलते उसे पांच आयरन इंजेक्शन का कोर्स सिविल अस्पताल में दिया जा रहा है। शनिवार को इस कोर्स का तीसरा दिन था और उसे प्रतिदिन इसके लिए अस्पताल पहुंचना पड़ रहा है। वहीं, जिले में सबसे अधिक रक्तदान शिविर लगाने वाली संस्था बाबा स्वामी दयाल सेवा संघ सचिव व रेडक्रॉस के आजीवन सदस्य रिंपी फौगाट ने बताया कि दादरी में जिला स्तर का ब्लड बैंक नहीं खुलने से मरीजों को इस तरह की परेशानियां आ रही हैं। उन्होंने बताया कि नियमानुसार तो ब्लड स्टोरेज बैंक में सभी ब्लड ग्रुप यूनिट हर समय उपलब्ध होनी चाहिए। अगर आपातकाल में मरीज को चढ़ाने से ब्लड स्टोरेज यूनिट में रक्त की कमी हो जाती है तो इसे कर्मचारी को तत्काल पूरा करना होता है।
हर माह 250 यूनिट रक्त देते हैं युवा दान
रिंपी फौगाट ने बताया कि दादरी जिले में हर माह चार से पांच रक्तदान शिविर आयोजित किए जाते हैं। एक शिविर में औसतन 50 यूनिट रक्तदान होता है और इस लिहाज से युवा प्रति माह 250 यूनिट रक्तदान करते हैं। उन्होंने बताया कि दादरी जिले से प्रतिवर्ष तीन हजार यूनिट से ज्यादा रक्तदान किया जाता है।
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बाक्स: कैंप में कुछ ब्लड ग्रुप लेने से करती है टीम इंकार
रक्तदान शिविर आयोजित कराने में अहम योगदान निभाने वाले रिंपी फौगाट ने बताया कि रक्तदान शिविर में पहुंचने वाली टीम कुछ ब्लड ग्रुप स्टॉक में होने की बात कहते हुए रक्तदाताओं को वापस भेज देते हैं। उन्होंने बताया कि प्रत्येक कैंप में पांच से छह युवाओं को वापिस भेजा जाता है। जब मरीज रक्त लेने के लिए ब्लड बैंक पहुंचता है तो स्टॉक में न होने की बात कहकर उसे वापिस भेज दिया जाता है।
आयरन के इंजेक्शन शरीर में एक से डेढ़ ग्राम तक खून की मात्रा बढ़ा देते हैं। अगर ब्लड स्टोरेज यूनिट में बी नेगेटिव ग्रुप नहीं है तो सोमवार को भिवानी ब्लड बैंक से मंगवाकर मरीज को चढ़वा दिया जाएगा। संबंधित कर्मचारी को भी इस संबंध में दिशा-निर्देश दिए जाएंगे। दादरी जिले में ब्लड बैंक खोलने की योजना पर कार्रवाई चल रही है।
संजय गुप्ता, डिप्टी सिविल सर्जन
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चरखी दादरी। रक्तदान के मामले में प्रदेश में दादरी जिला प्रदेश में भले ही नंबर वन हो लेकिन इसके बावजूद जिलेवासियों को समय पर खून नहीं मिल पा रहा। हाल ही में एक ऐसा मामला सामने आया है जिसमें ब्लड न मिलने के चलत युवती को आयरन के इंजेक्षन लगवाने पड़ रहे हैं। उक्त युवती का ब्लड ग्रुप बी नेगेटिव है जो कि अस्पताल के ब्लड स्टोरेज बैंक में पिछले तीन दिनों से नहीं है। वहीं, युवती पिछले तीन दिनों से लगातार इंजेक्षन लगवाने सिविल अस्पताल पहुंच रही है। वहीं, स्वास्थ्य विभाग अधिकारियों का तर्क है कि सप्ताह में दो बार भिवानी ब्लड बैंक से रक्त लाया जाता है और सोमवार को ही ब्लड मंगवाकर युवती को चढ़वा दिया जाएगा।
शहर निवासी एक युवती आशा ने बताया कि उसमें महज पांच ग्राम ही खून था। गत 13 फरवरी को वह सिविल अस्पताल पहुंची तो जांच के बाद उसे एक यूनिट रक्त चढ़वाने का परामर्श चिकित्सक ने दिया। जब वह ब्लड लेने के लिए सिविल अस्पताल के ब्लड बैंक पहुंची तो यहां बी नेगेटिव ग्रुप नहीं मिला। युवती ने बताया कि यहां तैनात महिला कर्मचारी ने बताया कि अस्पताल इस समय बी नेगेटिव ग्रुप को छोड़कर सभी ग्रुप है। युवती ने बताया कि बी ग्रुप नहीं होने के चलते उसे पांच आयरन इंजेक्शन का कोर्स सिविल अस्पताल में दिया जा रहा है। शनिवार को इस कोर्स का तीसरा दिन था और उसे प्रतिदिन इसके लिए अस्पताल पहुंचना पड़ रहा है। वहीं, जिले में सबसे अधिक रक्तदान शिविर लगाने वाली संस्था बाबा स्वामी दयाल सेवा संघ सचिव व रेडक्रॉस के आजीवन सदस्य रिंपी फौगाट ने बताया कि दादरी में जिला स्तर का ब्लड बैंक नहीं खुलने से मरीजों को इस तरह की परेशानियां आ रही हैं। उन्होंने बताया कि नियमानुसार तो ब्लड स्टोरेज बैंक में सभी ब्लड ग्रुप यूनिट हर समय उपलब्ध होनी चाहिए। अगर आपातकाल में मरीज को चढ़ाने से ब्लड स्टोरेज यूनिट में रक्त की कमी हो जाती है तो इसे कर्मचारी को तत्काल पूरा करना होता है।
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हर माह 250 यूनिट रक्त देते हैं युवा दान
रिंपी फौगाट ने बताया कि दादरी जिले में हर माह चार से पांच रक्तदान शिविर आयोजित किए जाते हैं। एक शिविर में औसतन 50 यूनिट रक्तदान होता है और इस लिहाज से युवा प्रति माह 250 यूनिट रक्तदान करते हैं। उन्होंने बताया कि दादरी जिले से प्रतिवर्ष तीन हजार यूनिट से ज्यादा रक्तदान किया जाता है।
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बाक्स: कैंप में कुछ ब्लड ग्रुप लेने से करती है टीम इंकार
रक्तदान शिविर आयोजित कराने में अहम योगदान निभाने वाले रिंपी फौगाट ने बताया कि रक्तदान शिविर में पहुंचने वाली टीम कुछ ब्लड ग्रुप स्टॉक में होने की बात कहते हुए रक्तदाताओं को वापस भेज देते हैं। उन्होंने बताया कि प्रत्येक कैंप में पांच से छह युवाओं को वापिस भेजा जाता है। जब मरीज रक्त लेने के लिए ब्लड बैंक पहुंचता है तो स्टॉक में न होने की बात कहकर उसे वापिस भेज दिया जाता है।
आयरन के इंजेक्शन शरीर में एक से डेढ़ ग्राम तक खून की मात्रा बढ़ा देते हैं। अगर ब्लड स्टोरेज यूनिट में बी नेगेटिव ग्रुप नहीं है तो सोमवार को भिवानी ब्लड बैंक से मंगवाकर मरीज को चढ़वा दिया जाएगा। संबंधित कर्मचारी को भी इस संबंध में दिशा-निर्देश दिए जाएंगे। दादरी जिले में ब्लड बैंक खोलने की योजना पर कार्रवाई चल रही है।
संजय गुप्ता, डिप्टी सिविल सर्जन