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हर दो माह बाद जन स्वास्थ्य विभाग को मिल रहा नया एक्सईएन, पेयजल प्रोजेक्ट अटके
Updated Sat, 08 Sep 2018 01:06 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी। हर दो माह बाद जन स्वास्थ्य विभाग को नया एक्सईएन मिल रहा है। एक्सईएन के बार-बार तबादलों से जिले के पेयजल प्रोजेक्ट सिरे नहीं चढ़ पा रहे हैं। शहर के पेयजल की क्षमता बढ़ाने पर कुछ दिन पहले प्लानिंग पर मंथन शुरू हुआ था, लेकिन अब यह भी बीच में ही लटक गया है। इसी प्रकार शहर के 164 लाख के पाइप लाइन प्रोजेक्ट के अलावा गांवों में भी पाइप लाइनों के प्रोजेक्ट अटके हुए हैं।
मूलभूत सुविधाएं पेयजल व सीवरेज का जिम्मा जनस्वास्थ्य विभाग का ही है। पेयजल के नए प्रोजेक्ट तैयार करना, पानी की गुणवत्ता पर ध्यान देना, सीवरेज सिस्टम को दुरूस्त रखना, जरूरत के अनुसार सीवरेज की नई लाइनें बिछाए जाने का कार्य इसी विभाग का है। आमतौर पर अधिकतर लोगों की शिकायतें इसी विभाग से ज्यादा रहती हैं। कभी दूषित पानी कीी आपूर्ति तो कभी पेयजल संकट संबंधी शिकायतें बनी रहती हैं। खासकर शहर में पेयजल संबंधी शिकायत ज्यादा बनी रहती हैं। मौजूदा समय में बरसाती पानी निकासी की समस्या भी विकट रूप लिए हुए हैं।
जनवरी में तत्कालीन एक्सईएन को सस्पेंड करने के बाद इस सीट पर एक्सईएन टिक नहीं पा रहे हैं। बार-बार इस पद के अधिकारियों के तबादले हो रहे हैं। आठ माह के दौरान अब चौथा एक्सईएन ज्वाइन करने जा रहा है। ऐसे में कार्यालय में फाइलों का कामकाज आगे नहीं बढ़ पा रहा है। इस कारण निचले स्तर के अधिकारियों को गाइडलाइन एवं निर्देश नहीं मिल पाते।
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164 लाख का प्रोजेक्ट दो साल से अटका
इस समय शहर का 164 लाख रुपये का पाइप लाइन बिछाए जाने का प्रोजेक्ट बीच में ठप पड़ा है। शहर में इस बजट राशि से 13 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन बिछाई जानी है। जोकि मात्र 500 मीटर लाइन ही बिछाई जा सकी है। मौजूदा एक्सईएन का हाल ही में तबादला हो जाने पर पाइप मंगवाने के लिए कागजी प्रक्रिया पूरी करने वाला कोई अधिकारी नहीं है। पाइप न होने की वजह से यह काम अटका पड़ा है। अधिकारियों की अनुमति के बिना पाइप नहीं मिल पाते। शहर के इस पेयजल प्रोजेक्ट की मुश्किल से दो साल में मंजूरी मिली थी। वह भी नगर पार्षदों की काफी जददेाजहद के बाद तैयार हो सका था।
38.50 लाख का बिरही कलां पेयजल प्रोजेक्ट बाधित
एक्सईएन के बिना गांव बिरही कलां पेयजल प्रोजेक्ट का काम भी रुका हुआ है। यहां 38.50 लाख रुपये की लागत से पेयजल लाइनें बिछाई जानी हैं। इसी प्रकार बाढड़ा क्षेत्र के खोरड़ा में भी पाइप लाइन का प्रोजेक्ट रुका हुआ है। अधिकारियों के बिना इन प्रोजेक्टों की ठीक से पैरवी नहीं हो पा रही है। कागज कार्रवाई व पत्र व्यवहार न होने से काम ठप हो जाता है।
शहर की पेयजल क्षमता बढ़ाने का मसला ठंडे बस्ते में
हाल ही में तबादला हुए एक्सईएन ने शहर की पेयजल क्षमता बढ़ाने पर नई प्लानिंग पर काम शुरू किया था। इस पर मंथन चल रहा था। ताकि शहर की पेयजल स्टोरेज क्षमता को बढ़ाया जा सके। इसके लिए नए वाटर टैंक निर्माण की योजना पर काम खाका तैयार होना था, लेकिन एक्सईएन का तबादला होने पर यह काम भी ठप हो गया। विभागीय विशेषज्ञों का मानना है कि जब कोई दूसरा अधिकारी आता है तो उसे विषय को समझने में काफी समय लग जाता है तब तक काफी देरी हो जाती है।
वर्जन
जल्द ही नया एक्सईएन ज्वाइन करने वाला है। अधिकारी लग्नशीलता के साथ अपने काम में जुटे हैं। सभी प्रोजेक्ट समय पर पूरे करवाए जाएंगे। लोगों को परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
- मंदीप कुमार, एसडीओ, जनस्वास्थ्य विभाग।
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चरखी दादरी। हर दो माह बाद जन स्वास्थ्य विभाग को नया एक्सईएन मिल रहा है। एक्सईएन के बार-बार तबादलों से जिले के पेयजल प्रोजेक्ट सिरे नहीं चढ़ पा रहे हैं। शहर के पेयजल की क्षमता बढ़ाने पर कुछ दिन पहले प्लानिंग पर मंथन शुरू हुआ था, लेकिन अब यह भी बीच में ही लटक गया है। इसी प्रकार शहर के 164 लाख के पाइप लाइन प्रोजेक्ट के अलावा गांवों में भी पाइप लाइनों के प्रोजेक्ट अटके हुए हैं।
मूलभूत सुविधाएं पेयजल व सीवरेज का जिम्मा जनस्वास्थ्य विभाग का ही है। पेयजल के नए प्रोजेक्ट तैयार करना, पानी की गुणवत्ता पर ध्यान देना, सीवरेज सिस्टम को दुरूस्त रखना, जरूरत के अनुसार सीवरेज की नई लाइनें बिछाए जाने का कार्य इसी विभाग का है। आमतौर पर अधिकतर लोगों की शिकायतें इसी विभाग से ज्यादा रहती हैं। कभी दूषित पानी कीी आपूर्ति तो कभी पेयजल संकट संबंधी शिकायतें बनी रहती हैं। खासकर शहर में पेयजल संबंधी शिकायत ज्यादा बनी रहती हैं। मौजूदा समय में बरसाती पानी निकासी की समस्या भी विकट रूप लिए हुए हैं।
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जनवरी में तत्कालीन एक्सईएन को सस्पेंड करने के बाद इस सीट पर एक्सईएन टिक नहीं पा रहे हैं। बार-बार इस पद के अधिकारियों के तबादले हो रहे हैं। आठ माह के दौरान अब चौथा एक्सईएन ज्वाइन करने जा रहा है। ऐसे में कार्यालय में फाइलों का कामकाज आगे नहीं बढ़ पा रहा है। इस कारण निचले स्तर के अधिकारियों को गाइडलाइन एवं निर्देश नहीं मिल पाते।
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164 लाख का प्रोजेक्ट दो साल से अटका
इस समय शहर का 164 लाख रुपये का पाइप लाइन बिछाए जाने का प्रोजेक्ट बीच में ठप पड़ा है। शहर में इस बजट राशि से 13 किलोमीटर लंबी पाइप लाइन बिछाई जानी है। जोकि मात्र 500 मीटर लाइन ही बिछाई जा सकी है। मौजूदा एक्सईएन का हाल ही में तबादला हो जाने पर पाइप मंगवाने के लिए कागजी प्रक्रिया पूरी करने वाला कोई अधिकारी नहीं है। पाइप न होने की वजह से यह काम अटका पड़ा है। अधिकारियों की अनुमति के बिना पाइप नहीं मिल पाते। शहर के इस पेयजल प्रोजेक्ट की मुश्किल से दो साल में मंजूरी मिली थी। वह भी नगर पार्षदों की काफी जददेाजहद के बाद तैयार हो सका था।
38.50 लाख का बिरही कलां पेयजल प्रोजेक्ट बाधित
एक्सईएन के बिना गांव बिरही कलां पेयजल प्रोजेक्ट का काम भी रुका हुआ है। यहां 38.50 लाख रुपये की लागत से पेयजल लाइनें बिछाई जानी हैं। इसी प्रकार बाढड़ा क्षेत्र के खोरड़ा में भी पाइप लाइन का प्रोजेक्ट रुका हुआ है। अधिकारियों के बिना इन प्रोजेक्टों की ठीक से पैरवी नहीं हो पा रही है। कागज कार्रवाई व पत्र व्यवहार न होने से काम ठप हो जाता है।
शहर की पेयजल क्षमता बढ़ाने का मसला ठंडे बस्ते में
हाल ही में तबादला हुए एक्सईएन ने शहर की पेयजल क्षमता बढ़ाने पर नई प्लानिंग पर काम शुरू किया था। इस पर मंथन चल रहा था। ताकि शहर की पेयजल स्टोरेज क्षमता को बढ़ाया जा सके। इसके लिए नए वाटर टैंक निर्माण की योजना पर काम खाका तैयार होना था, लेकिन एक्सईएन का तबादला होने पर यह काम भी ठप हो गया। विभागीय विशेषज्ञों का मानना है कि जब कोई दूसरा अधिकारी आता है तो उसे विषय को समझने में काफी समय लग जाता है तब तक काफी देरी हो जाती है।
वर्जन
जल्द ही नया एक्सईएन ज्वाइन करने वाला है। अधिकारी लग्नशीलता के साथ अपने काम में जुटे हैं। सभी प्रोजेक्ट समय पर पूरे करवाए जाएंगे। लोगों को परेशानी नहीं होने दी जाएगी।
- मंदीप कुमार, एसडीओ, जनस्वास्थ्य विभाग।