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हौसलों को मिली उड़ान तो अफसर बनी ढाकला गांव की बेटी
Updated Mon, 10 Sep 2018 01:52 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर। कहते हैं कि उन्हीं के हौसलों को उड़ान मिलती है जो अपने सपने को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत व परिश्रम के बल पर बुलंदी को छूने का रास्ता खुद अख्त्यार करते हैं। ऐसा ही हुआ झज्जर जिले के गांव ढाकला निवासी आशीष धनखड़ के साथ। जिन्होंने चिकित्सा के क्षेत्र में जाने के लिए एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू की लेकिन बीच में पिता की अचानक दिल का दौरा पड़ने की वजह से मौत हो जाने के कारण उसने अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़कर सेना में जाने की तैयारी शुरू कर दी। पिता की मौत के बाद आशीष ने हिसार में अपनी मां राजबाला व बहना एकता के साथ एक किराए के मकान में रहकर लेफ्टिनेंट बनने की तैयारी शुरू की। उसका हौसला बढ़ाया उसकी मौसी सुशीला व मौसा सुखबीर ने। जिन्होंने विषम परिस्थितियों में आशीष के अंदर वह जज्बा पैदा किया जिसकी वजह से न सिर्फ उसके हौसले को उड़ान मिली बल्कि उसका सेना में बड़ा अफसर बनने का सपना भी पूरा हुआ। आशीष के पिता रामचंद्र सेना में बतौर हवलदार रिटायर्ड हुए थे। उनका भी सपना था कि बेटा बड़ा होकर सेना में जाए और देश की सेवा करे। आशीष ने बीते शनिवार को ही चेन्नई में ऑफीसर की ट्रेनिंग पूरी की है। आशीष के लेफ्टिनेंट बनने पर जहां उसकी मां राजबाला व बहन एकता खुश हैं वहीं उसकी मौसी सुशीला व मौसा सुखबीर भी काफी प्रफुल्लित है। गांव ढाकला में परिवार के लोगों को बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।
बधाई देने वालों में विशेष रूप से चाचा परमेंद्र धनखड़ उर्फ ढीला, दादा सत्यवान, चाचा वजीर सिंह, रविंद्र, मोनू, राकेश, कालू, सोमबीर आदि प्रमुख रूप से शामिल हैं। उधर प्रदेश के कृषि मंत्री ओपी धनखड़ ने भी आशीष धनखड़ व उसके पूरे परिवार को आशीष की इस उपलब्धि पर बधाई दी है और आशीष के उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
झज्जर। कहते हैं कि उन्हीं के हौसलों को उड़ान मिलती है जो अपने सपने को पूरा करने के लिए कड़ी मेहनत व परिश्रम के बल पर बुलंदी को छूने का रास्ता खुद अख्त्यार करते हैं। ऐसा ही हुआ झज्जर जिले के गांव ढाकला निवासी आशीष धनखड़ के साथ। जिन्होंने चिकित्सा के क्षेत्र में जाने के लिए एमबीबीएस की पढ़ाई शुरू की लेकिन बीच में पिता की अचानक दिल का दौरा पड़ने की वजह से मौत हो जाने के कारण उसने अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़कर सेना में जाने की तैयारी शुरू कर दी। पिता की मौत के बाद आशीष ने हिसार में अपनी मां राजबाला व बहना एकता के साथ एक किराए के मकान में रहकर लेफ्टिनेंट बनने की तैयारी शुरू की। उसका हौसला बढ़ाया उसकी मौसी सुशीला व मौसा सुखबीर ने। जिन्होंने विषम परिस्थितियों में आशीष के अंदर वह जज्बा पैदा किया जिसकी वजह से न सिर्फ उसके हौसले को उड़ान मिली बल्कि उसका सेना में बड़ा अफसर बनने का सपना भी पूरा हुआ। आशीष के पिता रामचंद्र सेना में बतौर हवलदार रिटायर्ड हुए थे। उनका भी सपना था कि बेटा बड़ा होकर सेना में जाए और देश की सेवा करे। आशीष ने बीते शनिवार को ही चेन्नई में ऑफीसर की ट्रेनिंग पूरी की है। आशीष के लेफ्टिनेंट बनने पर जहां उसकी मां राजबाला व बहन एकता खुश हैं वहीं उसकी मौसी सुशीला व मौसा सुखबीर भी काफी प्रफुल्लित है। गांव ढाकला में परिवार के लोगों को बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।
बधाई देने वालों में विशेष रूप से चाचा परमेंद्र धनखड़ उर्फ ढीला, दादा सत्यवान, चाचा वजीर सिंह, रविंद्र, मोनू, राकेश, कालू, सोमबीर आदि प्रमुख रूप से शामिल हैं। उधर प्रदेश के कृषि मंत्री ओपी धनखड़ ने भी आशीष धनखड़ व उसके पूरे परिवार को आशीष की इस उपलब्धि पर बधाई दी है और आशीष के उज्ज्वल भविष्य की कामना की है।
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