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छुछकवास में बाईपास नहीं, हाईवे के लिए बनेगा लिंक रोड
Updated Mon, 08 Jan 2018 01:18 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर।
छुुछकवास गांव में बाईपास बनाने के प्रोजेक्ट की फाइल को ही पीडब्ल्यूडी विभाग ने रद्दी की टोकरी में डाल दिया है। विभाग ने इसके पीछे किसानों द्वारा जमीन नहीं दिया जाना कारण बताया है। इसके बाद साफ हो गया है कि अब छुछकवास में बाईपास नहीं बन पाएगा। वहीं एनएचएआई के झज्जर-दादरी सड़क मार्ग प्रोजेक्ट के बीच में छुछकवास आने के कारण अब गांव में लिंक रोड बनाया जाएगा। इसके चलते झज्जर से दादरी व दादरी से झज्जर जाने वाले लोगों को ही इसका लाभ मिलेगा। लिंक रोड बनने से इस रूट के वाहन चालकों को छुछकवास के चौक पर जानेे की आवश्यकता नहीं रहेगी और वे सीधे बाहर से ही अपने गंतव्य की ओर बढ़ जाएंगे।
जमीन नहीं देने के पीछे रेट भी बना वजह
छुछकवास गांव में बाईपास प्रोजेक्ट के लिए जमीन नहीं देने के पीछे जमीन अधिग्रहण के लिए निर्धारित कलेक्टर रेट भी बड़ी वजह बना है। वर्तमान सरकार द्वारा एक एकड़ की एवज में किसानों को करीब 22 लाख रुपये एकमुश्त व 20 प्रतिशत रॉयल्टी दी जा रही है। वहीं हुड्डा सरकार में इसी बाईपास के निर्माण के लिए किसानों को 84 लाख रुपये प्रति एकड़ तक का ऑफर दिया गया था। उस समय काफी किसान जमीन देने के हक में नहीं थे लेकिन अब कुछ किसानों का मन बना था तो रेट उनकी राह में रोड़ा बन गया।
दो मुख्यमंत्री कर चुके हैं घोषणा
छुछकवास बाईपास के लिए कांग्रेस सरकार में 15 जनवरी 2012 को मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के द्वारा घोषणा की गई थी। सेक्शन-4 के नोटिस भी किसानों को जारी कर दिए गए थे लेकिन किसानों के विरोध के कारण सरकार ने अपने कदम वापस खींच लिए थे। वहीं वर्तमान सरकार के कार्यकाल में जनवरी 2017 में मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने बाईपास के लिए मातनहेल रैली में घोषणा की थी। इसकी बाईपास के लिए कुल 95 एकड़ जमीन एक्वायर की जानी थी और इसकी लंबाई 6.85 किलोमीटर, चौड़ाई 45 मीटर तय की गई थी।
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चौक से गुजरते हैं करीब 10 हजार वाहन
छुछकवास चौक से हर रोज करीब 10 हजार वाहन रोजाना गुजरते हैं जिसमें से 80 फीसदी अकेले ट्रक व डंपर होते हैं। ये झाड़ली प्लांट या फिर दादरी की ओर क्रेशरों पर जाते हैं। दिन में शायद ही ऐसा कोई समय होता है, जब छुछकवास चौक पर चारों तरफ एक-डेढ़ किलोमीटर से कम लंबा जाम लगा हो।
जाम की परेशानी, ग्रामीणों की जुबानी
1. कृषियंत्र बनाने वाली मैकेनिक सलीम खान के अनुसार चौक पर हर समय जाम रहता है तो किसानों को उसकी दुकान तक अपने कृषि उपकरण लेकर पहुंचने के लिए रास्ता ही नहीं मिलता जिसका खामियाजा उसे हर रोज उठाना पड़ रहा है।
2. जाम में फंसी रोडवेज बस के परिचालक नरेंद्र के अनुसार वे झज्जर से कोसली का रूट लेकर जाते हैं। उन्हें आते-जाते समय जाम में फंसना पड़ता है, जिसके चलते उनका कोई भी चक्कर समय पर नहीं पहुंचता। अधिकारी व यात्री उन्हें इसके लिए परेशान करते हैं।
3. चौक पर हार्डवेयर दुकान चलाने वाले सोनू जांगड़ा के अनुसार ट्रकों से उठने वाली धूल के कारण 70 फीसदी दुकानदारों को एलर्जी की बीमारी हो गई है। सर्दी के मौसम में भी उनकी दुकानों में धूल जमी रहती है। जिसके चलते वे काफी परेेेशान हैं।
4. फोटो स्टूडियो संचालक महेंद्र सिंह के अनुसार चौक पर ट्रकों के बढ़ते दबाव के कारण यहां हर रोज हादसे हो रहे हैं। दुपहिया वाहन चालक ट्रकों की चपेट में आकर जान से हाथ धो रहे हैं, प्रशासन को बाईपास की सुध लेनी चाहिए।
5. बुक शॉप चलाने वाले रामकिशन अग्रवाल के अनुसार झाड़ली प्लांट के अनुसार ट्रकों की संख्या यहां बढ़ गई है। इसके चलते जाम यहां आम बात हो गई है। इतने ट्रैफिक के कारण आस-पड़ोस के गांवों के लोग तो छुछकवास चौक से खरीददारी के लिए आना भी बंद हो गए।
विपक्षी नहीं दे रहे जमीन : सरपंच
छुछकवास गांव के सरपंच महावीर सिंह के अनुसार बाईपास के लिए जमीन अधिग्रहण की राह में कुछ विपक्षी रोड़ा अटका रहे हैं। इसके चलते यह समस्या बनी हुई है। पिछली सरकारी ने घोषणा तो की थी लेकिन उनकी नीयत में खोट था, जिसकी वजह से बाईपास निर्माण का कार्य सिरे नहीं चढ़ पाया।
जमीन मिलती तो जरूर करवाते काम : मलिक
पीडब्ल्यूडी विभाग के एक्सईएन विरेंद्र मलिक के अनुसार जमीन नहीं मिलने के कारण बाईपास प्रोजेक्ट पर कार्य नहीं हुआ। 70 फीसदी किसानों का सहमति पत्र जरूरी है, जोकि गांव से नहीं मिला। एनएचएआई के द्वारा अपने प्रोजेक्ट में अब यहां एक लिंक रोड बनाया जाएगा जिससे झज्जर-दादरी जाने वाले लोगों को काफी फायदा मिलेगा।
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जानबूझकर रद्द किया प्रोजेक्ट: सांसद
छुछकवास गांव के बाईपास के लिए उन्होंने प्रोजेक्ट तैयार किया था। लेकिन वर्तमान सरकार ने एनएचआई के नए प्रोजेक्ट में यहां आवश्यकता नहीं दिखाते हुए बाईपास को रद्द करवाया है। नए प्रोजेक्ट में अब केवल लिंक रोड बनाया जा रहा है। सरकार ने उनके द्वारा गोद लिए गांव सांसद आदर्श ग्राम के साथ भेदभाव किया है।
-दीपेंद्र हुड्डा, सांसद, रोहतक-झज्जर।
छुछकवास में अब बाईपास नहीं, हाईवे के लिए बनेगा लिंक रोड
-जमीन नहीं मिलने के चलते रद्दी की टोकरी में पहुंची प्रोजेक्ट की फाइल
सांसद का दावा: सरकार ने जानबूझकर रिजेक्ट करवाया है प्रोजेक्ट
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झज्जर।
छुुछकवास गांव में बाईपास बनाने के प्रोजेक्ट की फाइल को ही पीडब्ल्यूडी विभाग ने रद्दी की टोकरी में डाल दिया है। विभाग ने इसके पीछे किसानों द्वारा जमीन नहीं दिया जाना कारण बताया है। इसके बाद साफ हो गया है कि अब छुछकवास में बाईपास नहीं बन पाएगा। वहीं एनएचएआई के झज्जर-दादरी सड़क मार्ग प्रोजेक्ट के बीच में छुछकवास आने के कारण अब गांव में लिंक रोड बनाया जाएगा। इसके चलते झज्जर से दादरी व दादरी से झज्जर जाने वाले लोगों को ही इसका लाभ मिलेगा। लिंक रोड बनने से इस रूट के वाहन चालकों को छुछकवास के चौक पर जानेे की आवश्यकता नहीं रहेगी और वे सीधे बाहर से ही अपने गंतव्य की ओर बढ़ जाएंगे।
जमीन नहीं देने के पीछे रेट भी बना वजह
छुछकवास गांव में बाईपास प्रोजेक्ट के लिए जमीन नहीं देने के पीछे जमीन अधिग्रहण के लिए निर्धारित कलेक्टर रेट भी बड़ी वजह बना है। वर्तमान सरकार द्वारा एक एकड़ की एवज में किसानों को करीब 22 लाख रुपये एकमुश्त व 20 प्रतिशत रॉयल्टी दी जा रही है। वहीं हुड्डा सरकार में इसी बाईपास के निर्माण के लिए किसानों को 84 लाख रुपये प्रति एकड़ तक का ऑफर दिया गया था। उस समय काफी किसान जमीन देने के हक में नहीं थे लेकिन अब कुछ किसानों का मन बना था तो रेट उनकी राह में रोड़ा बन गया।
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दो मुख्यमंत्री कर चुके हैं घोषणा
छुछकवास बाईपास के लिए कांग्रेस सरकार में 15 जनवरी 2012 को मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा के द्वारा घोषणा की गई थी। सेक्शन-4 के नोटिस भी किसानों को जारी कर दिए गए थे लेकिन किसानों के विरोध के कारण सरकार ने अपने कदम वापस खींच लिए थे। वहीं वर्तमान सरकार के कार्यकाल में जनवरी 2017 में मुख्यमंत्री मनोहरलाल ने बाईपास के लिए मातनहेल रैली में घोषणा की थी। इसकी बाईपास के लिए कुल 95 एकड़ जमीन एक्वायर की जानी थी और इसकी लंबाई 6.85 किलोमीटर, चौड़ाई 45 मीटर तय की गई थी।
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चौक से गुजरते हैं करीब 10 हजार वाहन
छुछकवास चौक से हर रोज करीब 10 हजार वाहन रोजाना गुजरते हैं जिसमें से 80 फीसदी अकेले ट्रक व डंपर होते हैं। ये झाड़ली प्लांट या फिर दादरी की ओर क्रेशरों पर जाते हैं। दिन में शायद ही ऐसा कोई समय होता है, जब छुछकवास चौक पर चारों तरफ एक-डेढ़ किलोमीटर से कम लंबा जाम लगा हो।
जाम की परेशानी, ग्रामीणों की जुबानी
1. कृषियंत्र बनाने वाली मैकेनिक सलीम खान के अनुसार चौक पर हर समय जाम रहता है तो किसानों को उसकी दुकान तक अपने कृषि उपकरण लेकर पहुंचने के लिए रास्ता ही नहीं मिलता जिसका खामियाजा उसे हर रोज उठाना पड़ रहा है।
2. जाम में फंसी रोडवेज बस के परिचालक नरेंद्र के अनुसार वे झज्जर से कोसली का रूट लेकर जाते हैं। उन्हें आते-जाते समय जाम में फंसना पड़ता है, जिसके चलते उनका कोई भी चक्कर समय पर नहीं पहुंचता। अधिकारी व यात्री उन्हें इसके लिए परेशान करते हैं।
3. चौक पर हार्डवेयर दुकान चलाने वाले सोनू जांगड़ा के अनुसार ट्रकों से उठने वाली धूल के कारण 70 फीसदी दुकानदारों को एलर्जी की बीमारी हो गई है। सर्दी के मौसम में भी उनकी दुकानों में धूल जमी रहती है। जिसके चलते वे काफी परेेेशान हैं।
4. फोटो स्टूडियो संचालक महेंद्र सिंह के अनुसार चौक पर ट्रकों के बढ़ते दबाव के कारण यहां हर रोज हादसे हो रहे हैं। दुपहिया वाहन चालक ट्रकों की चपेट में आकर जान से हाथ धो रहे हैं, प्रशासन को बाईपास की सुध लेनी चाहिए।
5. बुक शॉप चलाने वाले रामकिशन अग्रवाल के अनुसार झाड़ली प्लांट के अनुसार ट्रकों की संख्या यहां बढ़ गई है। इसके चलते जाम यहां आम बात हो गई है। इतने ट्रैफिक के कारण आस-पड़ोस के गांवों के लोग तो छुछकवास चौक से खरीददारी के लिए आना भी बंद हो गए।
विपक्षी नहीं दे रहे जमीन : सरपंच
छुछकवास गांव के सरपंच महावीर सिंह के अनुसार बाईपास के लिए जमीन अधिग्रहण की राह में कुछ विपक्षी रोड़ा अटका रहे हैं। इसके चलते यह समस्या बनी हुई है। पिछली सरकारी ने घोषणा तो की थी लेकिन उनकी नीयत में खोट था, जिसकी वजह से बाईपास निर्माण का कार्य सिरे नहीं चढ़ पाया।
जमीन मिलती तो जरूर करवाते काम : मलिक
पीडब्ल्यूडी विभाग के एक्सईएन विरेंद्र मलिक के अनुसार जमीन नहीं मिलने के कारण बाईपास प्रोजेक्ट पर कार्य नहीं हुआ। 70 फीसदी किसानों का सहमति पत्र जरूरी है, जोकि गांव से नहीं मिला। एनएचएआई के द्वारा अपने प्रोजेक्ट में अब यहां एक लिंक रोड बनाया जाएगा जिससे झज्जर-दादरी जाने वाले लोगों को काफी फायदा मिलेगा।
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जानबूझकर रद्द किया प्रोजेक्ट: सांसद
छुछकवास गांव के बाईपास के लिए उन्होंने प्रोजेक्ट तैयार किया था। लेकिन वर्तमान सरकार ने एनएचआई के नए प्रोजेक्ट में यहां आवश्यकता नहीं दिखाते हुए बाईपास को रद्द करवाया है। नए प्रोजेक्ट में अब केवल लिंक रोड बनाया जा रहा है। सरकार ने उनके द्वारा गोद लिए गांव सांसद आदर्श ग्राम के साथ भेदभाव किया है।
-दीपेंद्र हुड्डा, सांसद, रोहतक-झज्जर।
छुछकवास में अब बाईपास नहीं, हाईवे के लिए बनेगा लिंक रोड
-जमीन नहीं मिलने के चलते रद्दी की टोकरी में पहुंची प्रोजेक्ट की फाइल
सांसद का दावा: सरकार ने जानबूझकर रिजेक्ट करवाया है प्रोजेक्ट