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दो घंटे प्रदर्शन के बाद गिरफ्तारी, 15 मिनट बाद रिहा
Updated Sat, 16 Jun 2018 02:04 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर। जेल भरो आंदोलन के तहत आशा वर्करों ने शुक्रवार को दमखम दिखाया। लघु सचिवालय के बाहर करीब दो घंटे तक प्रदर्शन के बाद आशा वर्कर सचिवालय में पहुंची। जहां पर करीब दस मिनट तक नारेबाजी करने के बाद गिरफ्तारी के लिए कहा। जिस पर ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने रोडवेज बसों लगवा कर गिरफ्तारी ली। गिरफ्तारी के बाद सभी आशा वर्कर्स को पुलिस लाइन ले जाया गया। जहां पर सभी सामूहिक लिस्ट लेकर निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया। जेल भरो आंदोलन के दौरान जिले भर के 587 आशा वर्करों ने अपनी गिरफ्तारी दी। वहीं इनके साथ सर्व कर्मचारी संघ के 24, मिड डे मिल वर्कर के 20, किसान सभा के चार कार्यकर्ताओं ने भी अपनी गिरफ्तारी दी।
17 बसें मंगवाई, 6 रही खाली
प्रशासन के द्वारा पिछली बार के आंदोलन से सबक लेते हुए इस बार गिरफ्तारी के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए थे। पिछले बार आंदोलन के दौरान गिरफ्तारी के लिए केवल 6 बसें बुलाई गई थी, लेकिन बाद में कर्मचारियों की संख्या ज्यादा होने के कारण 8 बसें और बुलानी पड़ी थी। आशा वर्करों की गिरफ्तारी के लिए इस बार 17 बसें बुलाई गई थी, जिनमें से 6 खाली रह गई।
सर्व कर्मचारी संघ 28 को देगा गिरफ्तारियां
सर्व कर्मचारी संघ के नेता जयपाल गुढा ने आशा वर्कर को संबोधित करते हुए कहा कि उनके साथ सरकार ने अन्याय किया है, जिसके खिलाफ सर्व कर्मचारी संघ के सदस्य 28 जून को प्रदेश भर में अपनी गिरफ्तारियां देंगे। उन्होंने कहा कि सरकार समझौता तो दबाव में आकर कर लेती है लेकिन लागू करने में गड़बड़ी करती है। वहीं किसान सभा के दिलबाग दलाल ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में सुरक्षित डिलीवरी जिम्मेदारी आशाओं पर है लेकिन फिर भी सरकार इनके कार्य का महत्व नहीं समझ रही।
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नोटिफिकेशन में की सरकार ने गड़बड़ी
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए जिला सचिव किरण बरहाना ने कहा कि सरकार ने उनसे एक फरवरी को समझौता किया था कि सभी को एक समान वेतनवृद्धि का फायदा दिया जाएगा लेकिन बाद में जब नोटिफिकेशन जारी किया गया तो उसमें सरकार ने धोखा कर दिया। सरकारी नोटिफिकेशन में आशा वर्करों को दो हिस्सों में बांटने का कार्य किया है। सरकार चाहती है कि आशा वर्कर की मजबूत यूनियन कमजोर पड़ जाए लेकिन सरकारी ऐसी मंशा पूरी नहीं होगी।
धनखड़ बोले: ये दिल मांगे मोर
संवाद भवन में कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए कृषि मंत्री ओपी धनखड़ से जब आशा वर्कर के आंदोलन को लेकर सवाल किया गया तो वो बोले कि ये दिल मांगे मोर। इसके मतलब को उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा कि हर कर्मचारी चाहता है कि उसे जो मिल रहा है, उससे ज्यादा उसे मिलना चाहिए। लेकिन सरकार की भी कुछ सीमाएं होती हैं, जिन्हें देखकर ही सरकार को कदम उठाने पड़ते हैं।
आशा वर्कर ने गिरफ्तारी के लिए कहा तो 587 आशा वर्कर सहित 635 कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस लाइन में निजी मुचलके पर सभी को रिहा कर दिया गया है।
सतबीर सिवाच, ड्यूटी मजिस्ट्रेट।
झज्जर। जेल भरो आंदोलन के तहत आशा वर्करों ने शुक्रवार को दमखम दिखाया। लघु सचिवालय के बाहर करीब दो घंटे तक प्रदर्शन के बाद आशा वर्कर सचिवालय में पहुंची। जहां पर करीब दस मिनट तक नारेबाजी करने के बाद गिरफ्तारी के लिए कहा। जिस पर ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने रोडवेज बसों लगवा कर गिरफ्तारी ली। गिरफ्तारी के बाद सभी आशा वर्कर्स को पुलिस लाइन ले जाया गया। जहां पर सभी सामूहिक लिस्ट लेकर निजी मुचलके पर रिहा कर दिया गया। जेल भरो आंदोलन के दौरान जिले भर के 587 आशा वर्करों ने अपनी गिरफ्तारी दी। वहीं इनके साथ सर्व कर्मचारी संघ के 24, मिड डे मिल वर्कर के 20, किसान सभा के चार कार्यकर्ताओं ने भी अपनी गिरफ्तारी दी।
17 बसें मंगवाई, 6 रही खाली
प्रशासन के द्वारा पिछली बार के आंदोलन से सबक लेते हुए इस बार गिरफ्तारी के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए थे। पिछले बार आंदोलन के दौरान गिरफ्तारी के लिए केवल 6 बसें बुलाई गई थी, लेकिन बाद में कर्मचारियों की संख्या ज्यादा होने के कारण 8 बसें और बुलानी पड़ी थी। आशा वर्करों की गिरफ्तारी के लिए इस बार 17 बसें बुलाई गई थी, जिनमें से 6 खाली रह गई।
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सर्व कर्मचारी संघ 28 को देगा गिरफ्तारियां
सर्व कर्मचारी संघ के नेता जयपाल गुढा ने आशा वर्कर को संबोधित करते हुए कहा कि उनके साथ सरकार ने अन्याय किया है, जिसके खिलाफ सर्व कर्मचारी संघ के सदस्य 28 जून को प्रदेश भर में अपनी गिरफ्तारियां देंगे। उन्होंने कहा कि सरकार समझौता तो दबाव में आकर कर लेती है लेकिन लागू करने में गड़बड़ी करती है। वहीं किसान सभा के दिलबाग दलाल ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में सुरक्षित डिलीवरी जिम्मेदारी आशाओं पर है लेकिन फिर भी सरकार इनके कार्य का महत्व नहीं समझ रही।
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नोटिफिकेशन में की सरकार ने गड़बड़ी
प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए जिला सचिव किरण बरहाना ने कहा कि सरकार ने उनसे एक फरवरी को समझौता किया था कि सभी को एक समान वेतनवृद्धि का फायदा दिया जाएगा लेकिन बाद में जब नोटिफिकेशन जारी किया गया तो उसमें सरकार ने धोखा कर दिया। सरकारी नोटिफिकेशन में आशा वर्करों को दो हिस्सों में बांटने का कार्य किया है। सरकार चाहती है कि आशा वर्कर की मजबूत यूनियन कमजोर पड़ जाए लेकिन सरकारी ऐसी मंशा पूरी नहीं होगी।
धनखड़ बोले: ये दिल मांगे मोर
संवाद भवन में कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए कृषि मंत्री ओपी धनखड़ से जब आशा वर्कर के आंदोलन को लेकर सवाल किया गया तो वो बोले कि ये दिल मांगे मोर। इसके मतलब को उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा कि हर कर्मचारी चाहता है कि उसे जो मिल रहा है, उससे ज्यादा उसे मिलना चाहिए। लेकिन सरकार की भी कुछ सीमाएं होती हैं, जिन्हें देखकर ही सरकार को कदम उठाने पड़ते हैं।
आशा वर्कर ने गिरफ्तारी के लिए कहा तो 587 आशा वर्कर सहित 635 कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस लाइन में निजी मुचलके पर सभी को रिहा कर दिया गया है।
सतबीर सिवाच, ड्यूटी मजिस्ट्रेट।