अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़। शहर के सेक्टर 6 और 7 के बीच वाले रोड पर दूषित पानी की निकासी के लिए पाइप लाइन बिछाने और बाद में इस पानी को एकत्रित करके नहर में छोड़ने का मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। कोर्ट ने नगर परिषद को नोटिस जारी करके जवाब मांगा है। अब अप्रैल में इस मामले पर सुनवाई होगी। लोगों का कहना है कि प्रशासन खुद पीने के पानी को दूषित करने पर तुला हुआ हैं, जो निंदनीय है। पहले भी प्रशासन की ओर से पटेल नगर और सेक्टर-6 के बीचोंबीच गंदे पानी की पाइप लाइन बिछाकर एक बूस्टर पंप बनाया गया है। जहां से इस गंदे पानी को नहर में सरेआम डाला जा रहा है। उसी प्रकार की व्यवस्था अब सेक्टर-7 के पास की जा रही है, जो सरासर गलत हैं। जो बूस्टर पंप बनाए गए हैं उसके अलावा एक और नया बनाए जाने की कार्यवाही की जा रही हैं। इनमें जो गंदा पानी एकत्रित होता हैं, उसमें बदबू आती हैं। इससे आस-पास के एरिया में सांस लेना तक मुश्किल हो जाता हैं। सबसे गलत तो इस पानी को नहर में छोड़ना है। लोगों ने बताया कि प्रशासन इस कार्य को पहले भी बरसाती पानी की निकासी बताकर पल्ला झाड़ लेता है, लेकिन ओवर फ्लो सीवरेज का पानी इन पाइपों और बूस्टर पंपों के जरिये नहर में डालकर पीने के पानी को जहर बनाया जा रहा है। इस तरह के गंदे पानी की निकासी के लिए वेस्ट जुआं ड्रेन व मुंगेशपुर ड्रेन या अन्य किसी नाले में, जो शहर के बरसाती पानी के साथ गंदे पानी को शहर से बाहर करते हैं, उसके पानी को पेयजल आपूर्ति नहर में डालना गलत है। कश्मीरी लाल, ओमप्रकाश, बिजेंद्र सिंह, श्रीचंद्र छिल्लर, शमशेर दलाल ने बताया कि प्रशासन और सरकार ने इस मामले में कदम नहीं उठाया तो अब हाई कोर्ट में याचिका दायर करनी पड़ी।