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सरकारी स्कूलों में ठिठुर रहा बचपन
Updated Thu, 21 Dec 2017 01:35 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़।
इन दिनों पड़ रही कड़ाके की ठंड और सरकारी स्कूलों में ठिठुर रहा बचपन! जी हां। हम बात कर रहे हैं सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले उन बच्चों की जो टाट-पट्टी पर बैठकर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। लेकिन न तो सरकार उनकी तरफ कोई ध्यान दे रही है और न ही प्रशासनिक अधिकारी। ऐसे में छोटे-छोटे बच्चे टाट-पट्टी पर बैठकर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
परनाला स्कूल में खुले आसमान के नीचे बैठकर पढ़ते हैं बच्चे
अमर उजाला टीम ने शहर के कई सरकारी स्कूलों का मुआयना किया। सबसे पहले टीम परनाला गांव में स्थित प्राइमरी स्कूल में पहुंची। यहां बच्चे कमरों की कमी के चलते बाहर खुले आसमान के नीचे बैठे दिखाई दिए। वहीं, दूसरी ओर कक्षा में भी बच्चे टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ते नजर आए। इस पर यहां मौजूद अध्यापकों ने सरकार द्वारा दी जा रही सुविधाओं के अनुसार ही बच्चों को पढ़ाने की बात कही। सूत्रों ने बताया है कि यह स्कूल पूर्व में शिक्षा विभाग की तरफ से कंडम घोषित किया गया था। मगर यहां के अध्यापकों ने पैसा इकट्ठा करके इसकी मरम्मत कराई।
पांच कमरों में पढ़ रहे 374 बच्चे
परनाला स्कूल के बाद टीम लाइनपार स्थित वत्स कॉलोनी और शंकर गार्डन स्थित प्राइमरी स्कूल में पहुंची। दोनों जगह बच्चे टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ते दिखाई दिए। शंकर गार्डन स्कूल में दो शिफ्टों में बच्चों को शिक्षा दी जा रही है। सुबह की शिफ्ट में 221 बच्चे पढ़ाई करते हैं तो दोपहर की शिफ्ट में 153 बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं।
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बेकार पड़ा कई स्कूलों मेें फर्नीचर
स्कूलों में जगह की कमी के कारण फर्नीचर बेकार पड़ा है। इसके चलते सर्दी के मौसम में बच्चे जमीन पर बैठकर शिक्षा प्राप्त करने को मजबूर है। स्कूलों में आज तक सभी बच्चों को बैठने के लिए कोई डेस्क नसीब नहीं हुआ, जिस कारण बच्चे कड़ाके की सर्दी में भी जमीन पर बैठकर पढ़ते हैं। जोकि देश का भविष्य कहलाने वालों के साथ खिलवाड़ है।
सरकार और शिक्षा विभाग के दावे हवा
हरियाणा सरकार और शिक्षा विभाग शिक्षा का स्तर ऊंचा उठाने के दावे कर रहा है। लेकिन जमीनी स्तर पर उक्त दावे आज तक पूरे नहीं हो सके। क्षेत्र के कई सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को टाट-पट्टी पर बैठने को मजबूर होना पड़ रहा है। कुछ स्कूलों में टाट भी खस्ता हालत में है। दूसरी तरफ कई स्कूलों में फर्नीचर बेकार पड़ा कंडम हो रहा है क्योंकि वहां पर जगह की कमी है। इसके चलते वह बच्चों के कोई काम नहीं आ रहा।
सरकार जल्द करे स्कूलों में डेस्क की व्यवस्था
सरकारी स्कूलों में शिक्षा प्राप्त करने वाले बच्चों के अभिभावक देवेंद्र सांगवान, सरूप सिंह, रजनीश सिंह आदि ने सरकार और शिक्षा विभाग से स्कूलों में डेस्कों का प्रबंध कराने की मांग की है। ताकि बच्चे कड़ाके की सर्दी से बच सकें।
क्या कहते हैं स्कूल मुख्याध्यापक
इस संबंध में जब सरकारी स्कूलों के मुख्याध्यापकों से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि स्कूल की ओर से समय-समय पर उच्चाधिकारियों को इस बारे में अवगत कराया जाता है। कड़ाके की सर्दी को देखते हुए डेस्क की व्यवस्था कराना आवश्यक है।
क्या कहते हैं अधिकारी
खंड शिक्षा अधिकारी मदन चोपड़ा का कहना है कि उन्होंने शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों से स्कूलों में डेस्कों की व्यवस्था कराने के लिए मांग की है। उम्मीद है जल्द स्कूलों में डेस्कों की व्यवस्था हो जाएगी। जहां पर स्पेस की कमी है, वहां इसे दूर किया जाएगा। बच्चों को शिक्षा देने के लिए सरकार पूरी तरह से गंभीर है।
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बहादुरगढ़।
इन दिनों पड़ रही कड़ाके की ठंड और सरकारी स्कूलों में ठिठुर रहा बचपन! जी हां। हम बात कर रहे हैं सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले उन बच्चों की जो टाट-पट्टी पर बैठकर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। लेकिन न तो सरकार उनकी तरफ कोई ध्यान दे रही है और न ही प्रशासनिक अधिकारी। ऐसे में छोटे-छोटे बच्चे टाट-पट्टी पर बैठकर शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
परनाला स्कूल में खुले आसमान के नीचे बैठकर पढ़ते हैं बच्चे
अमर उजाला टीम ने शहर के कई सरकारी स्कूलों का मुआयना किया। सबसे पहले टीम परनाला गांव में स्थित प्राइमरी स्कूल में पहुंची। यहां बच्चे कमरों की कमी के चलते बाहर खुले आसमान के नीचे बैठे दिखाई दिए। वहीं, दूसरी ओर कक्षा में भी बच्चे टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ते नजर आए। इस पर यहां मौजूद अध्यापकों ने सरकार द्वारा दी जा रही सुविधाओं के अनुसार ही बच्चों को पढ़ाने की बात कही। सूत्रों ने बताया है कि यह स्कूल पूर्व में शिक्षा विभाग की तरफ से कंडम घोषित किया गया था। मगर यहां के अध्यापकों ने पैसा इकट्ठा करके इसकी मरम्मत कराई।
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पांच कमरों में पढ़ रहे 374 बच्चे
परनाला स्कूल के बाद टीम लाइनपार स्थित वत्स कॉलोनी और शंकर गार्डन स्थित प्राइमरी स्कूल में पहुंची। दोनों जगह बच्चे टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ते दिखाई दिए। शंकर गार्डन स्कूल में दो शिफ्टों में बच्चों को शिक्षा दी जा रही है। सुबह की शिफ्ट में 221 बच्चे पढ़ाई करते हैं तो दोपहर की शिफ्ट में 153 बच्चे शिक्षा ग्रहण करते हैं।
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बेकार पड़ा कई स्कूलों मेें फर्नीचर
स्कूलों में जगह की कमी के कारण फर्नीचर बेकार पड़ा है। इसके चलते सर्दी के मौसम में बच्चे जमीन पर बैठकर शिक्षा प्राप्त करने को मजबूर है। स्कूलों में आज तक सभी बच्चों को बैठने के लिए कोई डेस्क नसीब नहीं हुआ, जिस कारण बच्चे कड़ाके की सर्दी में भी जमीन पर बैठकर पढ़ते हैं। जोकि देश का भविष्य कहलाने वालों के साथ खिलवाड़ है।
सरकार और शिक्षा विभाग के दावे हवा
हरियाणा सरकार और शिक्षा विभाग शिक्षा का स्तर ऊंचा उठाने के दावे कर रहा है। लेकिन जमीनी स्तर पर उक्त दावे आज तक पूरे नहीं हो सके। क्षेत्र के कई सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को टाट-पट्टी पर बैठने को मजबूर होना पड़ रहा है। कुछ स्कूलों में टाट भी खस्ता हालत में है। दूसरी तरफ कई स्कूलों में फर्नीचर बेकार पड़ा कंडम हो रहा है क्योंकि वहां पर जगह की कमी है। इसके चलते वह बच्चों के कोई काम नहीं आ रहा।
सरकार जल्द करे स्कूलों में डेस्क की व्यवस्था
सरकारी स्कूलों में शिक्षा प्राप्त करने वाले बच्चों के अभिभावक देवेंद्र सांगवान, सरूप सिंह, रजनीश सिंह आदि ने सरकार और शिक्षा विभाग से स्कूलों में डेस्कों का प्रबंध कराने की मांग की है। ताकि बच्चे कड़ाके की सर्दी से बच सकें।
क्या कहते हैं स्कूल मुख्याध्यापक
इस संबंध में जब सरकारी स्कूलों के मुख्याध्यापकों से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि स्कूल की ओर से समय-समय पर उच्चाधिकारियों को इस बारे में अवगत कराया जाता है। कड़ाके की सर्दी को देखते हुए डेस्क की व्यवस्था कराना आवश्यक है।
क्या कहते हैं अधिकारी
खंड शिक्षा अधिकारी मदन चोपड़ा का कहना है कि उन्होंने शिक्षा विभाग के उच्चाधिकारियों से स्कूलों में डेस्कों की व्यवस्था कराने के लिए मांग की है। उम्मीद है जल्द स्कूलों में डेस्कों की व्यवस्था हो जाएगी। जहां पर स्पेस की कमी है, वहां इसे दूर किया जाएगा। बच्चों को शिक्षा देने के लिए सरकार पूरी तरह से गंभीर है।