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कारगिल शहीद लीला राम की पत्नी तारा देवी बोली: दुश्मन के घर में घु़सकर लेना चाहिए शहादत का बदला
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अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर। अब सरकार को किसी बात का इंतजार नहीं करना चाहिए और सेना को खुली छूट देकर दुश्मन के घर में घुसकर उसे ठोकना चाहिए। दुश्मन के नापाक इरादों को कामयाब नहीं होने देना चाहिए। क्योंकि देश बहुत शहादत दे चुका है अब तो आरपार की होनी चाहिए। दुश्मन हमें जख्म देता रहेगा और हम कब तक उन्हें सहलाते रहेंगे। एक दिन तो आरपार का फैसला करना ही होगा तो इंतजार किस बात का है। यह कहना है कारगिल शहीद जटवाड़ा गांव निवासी लीलाराम की धर्मपत्नी तारा देवी का। उनका कहना है कि उनके पति ने कारगिल युद्ध के दौरान शहादत दी थी। उन्हें पता है कि उन्होंने दुश्मन की तरफ से दिए जख्मों को कैसे सहा है। जिस दिन कोई भी देश का बेटा शहीद होता है तो उनके जख्म भी हरे हो जाते है। आतंकी देश पर हमले पर हमले कर रहे हैं और सरकारें फिर भी शांति और बातचीत से मामले का हल निकालने का राग अलापती रही है। पुलवामा में इतना बड़ा आतंकी हमला हो गया है। देश के जवानों ने अपने प्राणों की आहृति दी है। वे उन्हें श्रद्धांजलि देती हैं।
25 जून 1999 को शहीद हुए थे लीलाराम
तारा देवी का कहना है कि 25 जून 1999 को उनके पति लीला राम जम्मू-कश्मीर के राजौरी सेक्टर में तैनात थे। कारगिल युद्ध के दौरान दुश्मन से लोहा लेते हुए लीलाराम वीरगति को प्राप्त हुए थे। उस समय उनके पास दो बेटे थे राजेया कुमार सात साल का और राकेश कुमार पांच साल का था। उस समय उनके सिर से पिता का साया उठ गया था। उन्होंने पति की शहादत के बाद बच्चों का पालन पोषण किया और अनेक बाधाओं को भी पार किया है।
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झज्जर। अब सरकार को किसी बात का इंतजार नहीं करना चाहिए और सेना को खुली छूट देकर दुश्मन के घर में घुसकर उसे ठोकना चाहिए। दुश्मन के नापाक इरादों को कामयाब नहीं होने देना चाहिए। क्योंकि देश बहुत शहादत दे चुका है अब तो आरपार की होनी चाहिए। दुश्मन हमें जख्म देता रहेगा और हम कब तक उन्हें सहलाते रहेंगे। एक दिन तो आरपार का फैसला करना ही होगा तो इंतजार किस बात का है। यह कहना है कारगिल शहीद जटवाड़ा गांव निवासी लीलाराम की धर्मपत्नी तारा देवी का। उनका कहना है कि उनके पति ने कारगिल युद्ध के दौरान शहादत दी थी। उन्हें पता है कि उन्होंने दुश्मन की तरफ से दिए जख्मों को कैसे सहा है। जिस दिन कोई भी देश का बेटा शहीद होता है तो उनके जख्म भी हरे हो जाते है। आतंकी देश पर हमले पर हमले कर रहे हैं और सरकारें फिर भी शांति और बातचीत से मामले का हल निकालने का राग अलापती रही है। पुलवामा में इतना बड़ा आतंकी हमला हो गया है। देश के जवानों ने अपने प्राणों की आहृति दी है। वे उन्हें श्रद्धांजलि देती हैं।
25 जून 1999 को शहीद हुए थे लीलाराम
तारा देवी का कहना है कि 25 जून 1999 को उनके पति लीला राम जम्मू-कश्मीर के राजौरी सेक्टर में तैनात थे। कारगिल युद्ध के दौरान दुश्मन से लोहा लेते हुए लीलाराम वीरगति को प्राप्त हुए थे। उस समय उनके पास दो बेटे थे राजेया कुमार सात साल का और राकेश कुमार पांच साल का था। उस समय उनके सिर से पिता का साया उठ गया था। उन्होंने पति की शहादत के बाद बच्चों का पालन पोषण किया और अनेक बाधाओं को भी पार किया है।
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