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आबादी हुई दोगुनी, पेयजल क्षमता में 35 साल बाद भी नहीं हुआ विस्तार
Updated Fri, 17 Nov 2017 12:06 AM IST
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आबादी दोगुनी, पेयजल क्षमता में 35 साल बाद भी नहीं हुआ सुधार
अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
शहर में हर नहरी टर्न पर पेयजल संकट गहरा जाता है। इसका कारण शहर के दोनों जलघरों की स्टोरेज क्षमता आबादी के अनुरूप आधी होना ही है। जन स्वास्थ्य विभाग के पास 15 दिन की ही स्टोरेज क्षमता है जबकि नहरी टर्न 16 दिन बाद की है। ऐसे में नहरों में पानी आने के तीन-चार दिन बाद तक भी शहर में पेयजल किल्लत विभागीय अधिकारी दूर नहीं कर पाते। करीब 35 साल पूर्व बने जलघर की अब शहर की आबादी के अनुरूप पेयजल क्षमता नहीं रही है। जिस समय जलघर बना उस समय शहर की आबादी करीब 35 हजार थी जो अब बढ़कर 75000 के पार जा चुकी है। लेकिन इसी अनुपात में पानी की क्षमता एवं आपूर्ति नहीं बढ़ी है। विभागीय सूत्रों की ही मानें तो यह स्टोरेज क्षमता कम से कम एक माह की होनी चाहिए तब जाकर शहर में पर्याप्त मात्रा में पानी की आपूर्ति सुनिश्चित होना संभव है। शहर में सर्दियों के मौसम में भी पेयजल संकट बना रहता है।
शहर में इस समय दो जलघर हैं। मेन चंपापुरी जलघर व दूसरा रामनगर जलघर है लेकिन इन दोनो जलघरों की क्षमता मात्र 15 दिन की है। चंपापुरी जलघर की क्षमता 2450 लाख लीटर व रामनगर जलघर की क्षमता 1250 लाख लीटर है। गर्मियों में नहरों में पानी की आपूर्ति का टाइमटेेबल अक्सर गड़बड़ा जाता है जिससे कई बार तो एक माह में नहरी पानी पहुंचता है जिससे शहर ही नहीं गांवों में भी पानी का संकट गहरा जाता है। प्रति व्यक्ति 70 लीटर पानी की आपूर्ति का प्रावधान है। इस समय कमोबेश स्थिति यह है कि पेयजल संकट होने पर शहर में एक दिन छोड़कर पानी की आपूर्ति करनी पड़ती है तब जाकर यह 15 दिन के पानी स्टोरेज से काम चल पाता है। इतना ही नहीं विभाग को जलघर के पानी में ट्यूबवेल का पानी मिलाकर सप्लाई करना पड़ता है तब जाकर यह आपूर्ति संभव हो पाती है।
35 साल पुरानी पेयजल व्यवस्था में है विस्तार की जरूरत
शहर की करीब 35 साल पुरानी पेयजल व्यवस्था में अब मौजूदा हालातों को देखकर काफी विस्तार की जरूरत है यह विस्तार भी आबादी के अनुरूप हो तभी समस्या का समाधान हो सकता है। मेन चंपापुरी जलघर करीब 35 साल पहले बना था इसमें इस समय चार वाटर टैंक हैं जो अपर्याप्त हैं। इन वाटर टैंक की संख्या को और बढ़ाए जाने एवं आपूर्ति विस्तार की जरूरत बनी हुई है। इतना ही नहीं यह जलघर पुराने ढर्रे एवं पुरानी तकनीक पर काम कर रहा है। आधुनिक मशीनें व यंत्र भी जलघर में नहीं हैं जिससे समय- समय पानी की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठते आ रहे हैं। इस जलघर में नहरी पानी डाले जाने के लिए भी आधुनिक तकनीकी प्रबंध नहीं हैं जिससे नहरों में पानी आने पर जलघर भरने में ज्यादा समय लगता है। इसी प्रकार रामनगर जलघर में दो वाटर टैंक हैं। इन जलघर में बधवाना नहर से पानी डाला जाता है। इस जलघर से शहर के 40 प्रतिशत हिस्से में ही पानी की आपूर्ति की जा रही है। इस प्रकार दोनो जलघरों में कुल मिलाकर 15 दिन की ही पानी की आपूर्ति की क्षमता है।
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शहर के दायरे में होगा विस्तार, क्षमता बढ़ोतरी की है दरकार
अब जिला बन जाने पर करीब 50 सरकारी विभागों के कार्यालय और खुलने हैं। इन सभी पेयजल की सुविधा जरूरी होगी तो पानी की खपत भी बढ़ेगी। प्रतिवर्ष करीब 500 से 600 आवासीय मकान भी बढ़ रहे हैं। इस लिहाज से भी पानी की खपत हर साल बढ़ रही है। रेलवे स्टेशन भी जल्द ही बड़े रूप में बनने जा रहा है। यहां भी पानी की खपत में इजाफा होगा। रोडवेज डिपो में भी डिपो बनने के बाद पानी की खपत बढ़ी है। औद्योगिक क्षेत्र को भी लगातार बढ़ावा मिल रहा है। जिले के कई बड़े गांवों में भी जलघरों की पेयजल क्षमता बढ़ाए जाने की जरूरत बनी हुई है। आबादी बढ़ने पर गांवों में भी पानी की खपत लगातार बढ़ रही है। गांवों के लोग ट्यूबवेल व कुआं आदि के जरिए जैसे-तैसे काम चला रहे हैं। कई गांवों में तो किसानों ने खेतों में ट्यूबवेल बोरिंग कर पेयजल लाइन बिछाकर गांवों तक पहुंचा रखी है ताकि पानी की आपूर्ति हो सके।
= कोट
मैंने बुधवार को ही पदभार संभाला है। शहर की पेयजल स्थिति का जल्द ही आंकलन किया जाएगा। इस दौरान जो भी जरूरतें सामने आई उन पर हम तत्काल कागजी कार्रवाई करेंगे। - संजय शर्मा, एसडीओ, जन स्वास्थ्य विभाग
फोटो- 18
चंपापुरी स्थित मुख्य जलघर का फोटो।
फोटो- 19
जलघर का बड़ा वाटर स्टोरेज टैंक।
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अमर उजाला ब्यूरो
चरखी दादरी।
शहर में हर नहरी टर्न पर पेयजल संकट गहरा जाता है। इसका कारण शहर के दोनों जलघरों की स्टोरेज क्षमता आबादी के अनुरूप आधी होना ही है। जन स्वास्थ्य विभाग के पास 15 दिन की ही स्टोरेज क्षमता है जबकि नहरी टर्न 16 दिन बाद की है। ऐसे में नहरों में पानी आने के तीन-चार दिन बाद तक भी शहर में पेयजल किल्लत विभागीय अधिकारी दूर नहीं कर पाते। करीब 35 साल पूर्व बने जलघर की अब शहर की आबादी के अनुरूप पेयजल क्षमता नहीं रही है। जिस समय जलघर बना उस समय शहर की आबादी करीब 35 हजार थी जो अब बढ़कर 75000 के पार जा चुकी है। लेकिन इसी अनुपात में पानी की क्षमता एवं आपूर्ति नहीं बढ़ी है। विभागीय सूत्रों की ही मानें तो यह स्टोरेज क्षमता कम से कम एक माह की होनी चाहिए तब जाकर शहर में पर्याप्त मात्रा में पानी की आपूर्ति सुनिश्चित होना संभव है। शहर में सर्दियों के मौसम में भी पेयजल संकट बना रहता है।
शहर में इस समय दो जलघर हैं। मेन चंपापुरी जलघर व दूसरा रामनगर जलघर है लेकिन इन दोनो जलघरों की क्षमता मात्र 15 दिन की है। चंपापुरी जलघर की क्षमता 2450 लाख लीटर व रामनगर जलघर की क्षमता 1250 लाख लीटर है। गर्मियों में नहरों में पानी की आपूर्ति का टाइमटेेबल अक्सर गड़बड़ा जाता है जिससे कई बार तो एक माह में नहरी पानी पहुंचता है जिससे शहर ही नहीं गांवों में भी पानी का संकट गहरा जाता है। प्रति व्यक्ति 70 लीटर पानी की आपूर्ति का प्रावधान है। इस समय कमोबेश स्थिति यह है कि पेयजल संकट होने पर शहर में एक दिन छोड़कर पानी की आपूर्ति करनी पड़ती है तब जाकर यह 15 दिन के पानी स्टोरेज से काम चल पाता है। इतना ही नहीं विभाग को जलघर के पानी में ट्यूबवेल का पानी मिलाकर सप्लाई करना पड़ता है तब जाकर यह आपूर्ति संभव हो पाती है।
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35 साल पुरानी पेयजल व्यवस्था में है विस्तार की जरूरत
शहर की करीब 35 साल पुरानी पेयजल व्यवस्था में अब मौजूदा हालातों को देखकर काफी विस्तार की जरूरत है यह विस्तार भी आबादी के अनुरूप हो तभी समस्या का समाधान हो सकता है। मेन चंपापुरी जलघर करीब 35 साल पहले बना था इसमें इस समय चार वाटर टैंक हैं जो अपर्याप्त हैं। इन वाटर टैंक की संख्या को और बढ़ाए जाने एवं आपूर्ति विस्तार की जरूरत बनी हुई है। इतना ही नहीं यह जलघर पुराने ढर्रे एवं पुरानी तकनीक पर काम कर रहा है। आधुनिक मशीनें व यंत्र भी जलघर में नहीं हैं जिससे समय- समय पानी की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठते आ रहे हैं। इस जलघर में नहरी पानी डाले जाने के लिए भी आधुनिक तकनीकी प्रबंध नहीं हैं जिससे नहरों में पानी आने पर जलघर भरने में ज्यादा समय लगता है। इसी प्रकार रामनगर जलघर में दो वाटर टैंक हैं। इन जलघर में बधवाना नहर से पानी डाला जाता है। इस जलघर से शहर के 40 प्रतिशत हिस्से में ही पानी की आपूर्ति की जा रही है। इस प्रकार दोनो जलघरों में कुल मिलाकर 15 दिन की ही पानी की आपूर्ति की क्षमता है।
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शहर के दायरे में होगा विस्तार, क्षमता बढ़ोतरी की है दरकार
अब जिला बन जाने पर करीब 50 सरकारी विभागों के कार्यालय और खुलने हैं। इन सभी पेयजल की सुविधा जरूरी होगी तो पानी की खपत भी बढ़ेगी। प्रतिवर्ष करीब 500 से 600 आवासीय मकान भी बढ़ रहे हैं। इस लिहाज से भी पानी की खपत हर साल बढ़ रही है। रेलवे स्टेशन भी जल्द ही बड़े रूप में बनने जा रहा है। यहां भी पानी की खपत में इजाफा होगा। रोडवेज डिपो में भी डिपो बनने के बाद पानी की खपत बढ़ी है। औद्योगिक क्षेत्र को भी लगातार बढ़ावा मिल रहा है। जिले के कई बड़े गांवों में भी जलघरों की पेयजल क्षमता बढ़ाए जाने की जरूरत बनी हुई है। आबादी बढ़ने पर गांवों में भी पानी की खपत लगातार बढ़ रही है। गांवों के लोग ट्यूबवेल व कुआं आदि के जरिए जैसे-तैसे काम चला रहे हैं। कई गांवों में तो किसानों ने खेतों में ट्यूबवेल बोरिंग कर पेयजल लाइन बिछाकर गांवों तक पहुंचा रखी है ताकि पानी की आपूर्ति हो सके।
= कोट
मैंने बुधवार को ही पदभार संभाला है। शहर की पेयजल स्थिति का जल्द ही आंकलन किया जाएगा। इस दौरान जो भी जरूरतें सामने आई उन पर हम तत्काल कागजी कार्रवाई करेंगे। - संजय शर्मा, एसडीओ, जन स्वास्थ्य विभाग
फोटो- 18
चंपापुरी स्थित मुख्य जलघर का फोटो।
फोटो- 19
जलघर का बड़ा वाटर स्टोरेज टैंक।