फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Jhajjar/Bahadurgarh News ›   फोटो समेत : हकीकत से कोसों दूर हैं बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण के दावे

फोटो समेत : हकीकत से कोसों दूर हैं बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण के दावे

Thu, 08 Jun 2017 01:27 AM IST
Updated Thu, 08 Jun 2017 01:27 AM IST
विज्ञापन
फोटो समेत : हकीकत से कोसों दूर हैं बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण के दावे
मनीष कुमार
विज्ञापन

बहादुरगढ़।
बायो मेडिकल वेस्ट के सही निस्तारण के बेशक कितने ही दावे किए जाते हों, मगर बहादुरगढ़ शहर में हकीकत इससे कोसों दूर है। यहां के अस्पताल, क्लीनिक एवं लैब बायो मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट के नियमों की खुलकर धज्जियां उड़ा रहे हैं। बायो मेडिकल वेस्ट को इंसीनेरेटर में डिस्पोज करने की बजाय खुले में जलाया जा रहा है। शहर के कई स्थानों पर कचरे के ढेरों में भी यह वेस्ट देखा जा सकता है। इन हालातों से जहां प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड बेखबर है, वहीं स्वास्थ्य विभाग भी कोई कार्यवाही नहीं कर रहा।
जिले में झज्जर शहर में 100 बेड, बहादुरगढ़ में 100 बेड और बेरी में 50 बेड का अस्पताल है। इसके अलावा जिले में छह सीएचसी और 12 पीएचसी हैं। दर्जनभर बड़े निजी अस्पताल (10 बहादुरगढ़ में) व कई दर्जनों क्लीनिक व पैथलॉजी लैब हैं। इन अस्पतालों में रोजाना हजारों की संख्या में लोग उपचार के लिए आते हैं। इस कारण अस्पतालों से भारी मात्रा में बायो मेडिकल वेस्ट निकलता है। अकेले बहादुरगढ़ का मेडिकल वेस्ट जिले भरे में आधे से अधिक है। मगर यहां मेडिकल वेस्ट के सही निस्तारण करने की बजाय नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। शहर में कुछ ऐसे अस्पताल भी हैं जिनका बायो मेडिकल वेस्ट कंपनी को नहीं जाता। ये सभी अस्पताल अपना वेस्ट खुले स्थानों और नालों में डाल रहे हैं। यही नहीं प्लास्टिक सिरिंज और कांच का वेस्टेज कबाड़ियों को बेच दिया जाता है। इसके अलावा काफी संख्या में बगैर अनुमति के चल रहे क्लीनिक अवैध रूप से वेस्ट को खुले कचरे में डाल रहे हैं।
विज्ञापन

होता है नुकसान
सफाई कर्मी राजेंद्र ने बताया कि शहर के सरकारी अस्पताल का अधिकतर मेडिकल वेस्ट अस्पताल के बाहर बने डंपिंग प्वाइंट पर डाल दिया जाता है। इससे कर्मचारियों को काम करने में बेहद दिक्कतें हो रही हैं। कई बार तो सिरिंज चोटिल कर देती हैं। कुछ समय पहले एक कर्मचारी के पांव में सिरिंज की सुई लग गई थी, जिससे वह तीन महीने में ठीक हो पाया था। अहम बात ये कि शहर के गोउपचार केंद्रों में आप्रेशन के दौरान गोवंश के पेट से सिरिंज आदि भी निकाले जा चुके हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

...और यहां जलाया जा रहा मेडिकल वेस्ट
सेक्टर-9 बाईपास के नजदीक वेस्ट जुआं ड्रेन के किनारे खाली पड़े स्थान को तो बायो मेडिकल वेस्ट जलाने का स्थाई केंद्र बना दिया गया है। यहां लंबे समय से यह अवैध काम कर वातावरण को दूषित किया जा रहा है। जलने से बेशक पट्टियां, सिरिंज और दस्ताने आदि राख हो जाते हैं, मगर सैंपलों से भरी शीशियां रह जाती हैं। बुधवार की सुबह भी यहां भारी मात्रा में जला हुआ बायो मेडिकल वेस्ट मौजूद था। यहां के निवासी रितेश ने बताया कि पिछले काफी समय से रात के अंधेरे में यहां कचरा जलाया जाता है। उक्त कचरे में दवाओं की शीशी, ब्लड, यूरीन आदि सैंपलों से भरी शीशियां, सिरिंज और खून से सनी पट्टियां जलाई जाती हैं। जिस वक्त इन्हें जलाया जाता है, उस समय बेहद दुर्गंध उठती है। जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है।

1400 किलो वेस्ट उठता है रोजाना
रोहतक की एसडी बायोमेडिकल वेस्ट प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को जिले के सरकारी अस्पतालों, सीएचसी और पीएचसी आदि का बायो मेडिकल वेस्ट उठाने का ठेका मिला हुआ है। इसके अलावा निजी अस्पतालों व क्लीनिकों से भी इसी कंपनी की गाड़ियां वेस्ट उठाने आती हैं। कंपनियों के वाहन अलग-अलग रंग वाले डिब्बों में भरकर वेस्ट को निस्तारण के लिए ले जाते हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी के मुताबिक, उक्त कंपनी रोहतक, बहादुरगढ़ और झज्जर से रोजाना 1400 किलो वेस्ट उठाती है।

बायो मेडिकल वेस्ट के नियम
बायोमेडिकल वेस्ट उठाने वाली एजेंसी ने हॉस्पिटलों एवं मेडिकल संस्थानों में तीन रंग वाले बिन (डिब्बे) रखे हैं। लाल रंग वाले बिन में मेडिकल के प्लास्टिक वेस्ट रखे जाते हैं। पीले रंग के बिन में इंसीनेरेट (जलाने वाले) वेस्ट को रखा जाता है। ब्लड बैग, मांस के हिस्से, सर्जरी के दौरान निकलने वाले वेस्ट को इनमें रखा जाता है। कांच, निडल आदि वेस्ट को नीले रंग के बिन में रखा जाता है। प्लास्टिक वेस्ट को ऑटो क्लेव कर छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़कर री- साइकिलिंग के लिए भेजा जाता है। खास बात ये कि पीले रंग वाले बॉक्स में रखे जाने वाले सर्जरी वेस्ट को इंसीनेरेटर (बगैर हवा के जलाना) किया जाता है।

होगी कार्रवाई
सरकारी अस्पतालों का बायो मेडिकल वेस्ट उठाने के लिए एक कंपनी को ठेका दिया गया है। उक्त कंपनी के कर्मचारी रोजाना अस्पतालों से यह वेस्ट उठा लेते हैं। निजी अस्पताल और क्लीनिक संचालकों को भी बायो मेडिकल वेस्ट का सही से निस्तारण कराने के निर्देश दिए गए हैं। यदि कहीं नियमों का पालन नहीं हो रहा है तो वे जांच कराएंगे, जो दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।

डॉ. रमेश धनखड़, सीएमओ, जिला झज्जर।

करेंगे इंस्पेक्शन
उनके संज्ञान में अभी इस तरह का क ोई मामला नहीं आया है। बृहस्पतिवार को ही टीम सहित मौके का इंस्पेक्शन करेंगे। यदि मेडिकल वेस्ट मिलता है तो वेस्ट डालने वालों का पता लगाकर उनके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी।
- नवनीत भारद्वाज, एसडीओ, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, बहादुरगढ़।



- कहीं कचरे में तो कहीं खुले में डालकर जलाया जा रहा बायो मेडिकल वेस्ट
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed