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दस करोड़ की नहर चूहों ने की खोखली, सौ एकड़ गेहूं की फसल लबालब
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अमर उजाला ब्यूरो
बौंदकलां। चंडीगढ़ से सीएम मनोहर लाल ने एक माह पहले जिस नहर का उद्घाटन किया था वह पानी छोड़ने के पांच दिन बाद ही टूट गई। इस कारण किसानों की लहलहाती करीब एक सौ एकड़ गेहूं की फसल में पानी भर गया। सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि चूहों ने बिल बना लिए थे, इस कारण मिट्टी का कटाव होने से नहर टूटी है। इसके निर्माण पर करीब दस करोड़ रुपये की लागत आई थी। वहीं, नहर टूटने के करीब डेढ़ घंटे बाद सिंचाई विभाग और राजस्व विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे। नहर टूटने के करीब छह घंटे बाद सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने नहर के क्षतिग्रस्त हिस्से को दुरुस्त करने का काम शुरू किया।
प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने तीन मार्च को ही चंडीगढ़ बैठकर बौंदकलां नहर का उद्घाटन किया था। 30 मार्च को ही नहर में पानी छोड़ा गया था। नहर की क्षमता 124 क्यूसेक है और टूटने से पहले इसमें 120 क्यूसेक पानी चल रहा था। वीरवार दोपहर 12 बजे अचानक से बौंदकलां नहर सिंचाई विभाग के विश्राम गृह से कुछ ही दूरी पर ही टूट गई। नहर का करीब 30 फीट का टुकड़ा टूटने से पानी तेज गति से खेतों की तरफ बहने लगा। नहर टूटने से करीब 100 एकड़ में खेतों में खड़ी गेहूं की फसल जलमग्न हो गई। बता दें कि बौंदकलां क्षेत्र में गेहूं की फसल अंतिम पकाव की ओर है और करीब 15 दिन बाद क्षेत्र में गेहूं कटाई का कार्य शुरू होगा।
इन किसानों को हुआ नुकसान
नहर टूटने के कारण किसान दया किशन की पांच एकड़, भीम चौहान की 9 एकड़, जगदीश व रामप्रसाद की 12 एकड़, बंशी शर्मा व निरजन शर्मा की 12 एकड़, करतार की 10 एकड़, मंगतू की 3 एकड़, जयप्रकाश की 3 एकड़, प्रेमपाल की 5 एकड़, राजा रोहिला की 5 एकड़ गेहूं की फसल समेत अन्य किसानों की फसलों में भी पानी जमा हो गया।
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पिछले साल भी चार बार टूटी थी नहर
नहर टूटने की सूचना गांव में तेजी से फैल गई और इसके बाद किसान खेतों की ओर चल दिए। मौके पर पहुंचे किसानों ने बताया कि यह नहर किसानों के लिए सिरदर्द बनी हुई है। गत वर्ष भी यह नहर चार बार टूटी थी और इसके चलते फसलें जलमग्न हो गई थी। किसानों ने बताया कि इसके बाद भी सिंचाई विभाग ने स्थिति को गंभीरता से नहीं लिया।
मौके पर देरी से पहुंचे अधिकारी
बौंदकलां नहर टूटने के करीब एक घंटा बाद भी वहां मजदूरों को छोड़कर कोई भी अधिकारी नहीं पहुंचा। सिंचाई विभाग के एक्सईएन पवन कुमार विश्राम गृह में थे। उन्होंने कहा कि वे एक बजे ही मौके पर पहुंच गए थे। वहीं, अधिकारियों के मौके पर देरी से पहुंचने के चलते काफी पानी क्षतिग्रस्त हिस्से से बह गया। अधिकारियों ने पहले पीछे से पानी को बंद कराया और नहर में पानी का स्तर कम होने के बाद इसे दुरुस्त कराने का काम शुरू किया।
चूहों ने नहर में बिल बना दिए थे और इसके चलते पानी का रिसाव हुआ है। पानी का रिसाव होने से ही नहर टूटी है। पीछे से नहर में पानी कम करवा दिया है। छह सात घंटे के बाद नहर के क्षतिग्रस्त हिस्से को दुरुस्त कर दिया जाएगा। बिजली निगम को कनेक्शन के लिए कहा गया है। जल्द ही पानी की निकासी के लिए मोटरें चलवा दी जाएंगी। - पवन कुमार, एक्सईएन, सिंचाई विभाग
नहर टूटने से करीब 100 एकड़ गेहूं की फसल जलमग्न हुई है। मैंने इसकी सूचना अधिकारियों को दे दी है। - जसबीर, पटवारी, बौंदकलां
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बौंदकलां। चंडीगढ़ से सीएम मनोहर लाल ने एक माह पहले जिस नहर का उद्घाटन किया था वह पानी छोड़ने के पांच दिन बाद ही टूट गई। इस कारण किसानों की लहलहाती करीब एक सौ एकड़ गेहूं की फसल में पानी भर गया। सिंचाई विभाग के अधिकारियों का कहना है कि चूहों ने बिल बना लिए थे, इस कारण मिट्टी का कटाव होने से नहर टूटी है। इसके निर्माण पर करीब दस करोड़ रुपये की लागत आई थी। वहीं, नहर टूटने के करीब डेढ़ घंटे बाद सिंचाई विभाग और राजस्व विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मौके पर पहुंचे। नहर टूटने के करीब छह घंटे बाद सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने नहर के क्षतिग्रस्त हिस्से को दुरुस्त करने का काम शुरू किया।
प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने तीन मार्च को ही चंडीगढ़ बैठकर बौंदकलां नहर का उद्घाटन किया था। 30 मार्च को ही नहर में पानी छोड़ा गया था। नहर की क्षमता 124 क्यूसेक है और टूटने से पहले इसमें 120 क्यूसेक पानी चल रहा था। वीरवार दोपहर 12 बजे अचानक से बौंदकलां नहर सिंचाई विभाग के विश्राम गृह से कुछ ही दूरी पर ही टूट गई। नहर का करीब 30 फीट का टुकड़ा टूटने से पानी तेज गति से खेतों की तरफ बहने लगा। नहर टूटने से करीब 100 एकड़ में खेतों में खड़ी गेहूं की फसल जलमग्न हो गई। बता दें कि बौंदकलां क्षेत्र में गेहूं की फसल अंतिम पकाव की ओर है और करीब 15 दिन बाद क्षेत्र में गेहूं कटाई का कार्य शुरू होगा।
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इन किसानों को हुआ नुकसान
नहर टूटने के कारण किसान दया किशन की पांच एकड़, भीम चौहान की 9 एकड़, जगदीश व रामप्रसाद की 12 एकड़, बंशी शर्मा व निरजन शर्मा की 12 एकड़, करतार की 10 एकड़, मंगतू की 3 एकड़, जयप्रकाश की 3 एकड़, प्रेमपाल की 5 एकड़, राजा रोहिला की 5 एकड़ गेहूं की फसल समेत अन्य किसानों की फसलों में भी पानी जमा हो गया।
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पिछले साल भी चार बार टूटी थी नहर
नहर टूटने की सूचना गांव में तेजी से फैल गई और इसके बाद किसान खेतों की ओर चल दिए। मौके पर पहुंचे किसानों ने बताया कि यह नहर किसानों के लिए सिरदर्द बनी हुई है। गत वर्ष भी यह नहर चार बार टूटी थी और इसके चलते फसलें जलमग्न हो गई थी। किसानों ने बताया कि इसके बाद भी सिंचाई विभाग ने स्थिति को गंभीरता से नहीं लिया।
मौके पर देरी से पहुंचे अधिकारी
बौंदकलां नहर टूटने के करीब एक घंटा बाद भी वहां मजदूरों को छोड़कर कोई भी अधिकारी नहीं पहुंचा। सिंचाई विभाग के एक्सईएन पवन कुमार विश्राम गृह में थे। उन्होंने कहा कि वे एक बजे ही मौके पर पहुंच गए थे। वहीं, अधिकारियों के मौके पर देरी से पहुंचने के चलते काफी पानी क्षतिग्रस्त हिस्से से बह गया। अधिकारियों ने पहले पीछे से पानी को बंद कराया और नहर में पानी का स्तर कम होने के बाद इसे दुरुस्त कराने का काम शुरू किया।
चूहों ने नहर में बिल बना दिए थे और इसके चलते पानी का रिसाव हुआ है। पानी का रिसाव होने से ही नहर टूटी है। पीछे से नहर में पानी कम करवा दिया है। छह सात घंटे के बाद नहर के क्षतिग्रस्त हिस्से को दुरुस्त कर दिया जाएगा। बिजली निगम को कनेक्शन के लिए कहा गया है। जल्द ही पानी की निकासी के लिए मोटरें चलवा दी जाएंगी। - पवन कुमार, एक्सईएन, सिंचाई विभाग
नहर टूटने से करीब 100 एकड़ गेहूं की फसल जलमग्न हुई है। मैंने इसकी सूचना अधिकारियों को दे दी है। - जसबीर, पटवारी, बौंदकलां