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अवैध पीवीसी मार्केट पर प्रशासन की चुप्पी बरकरार
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अमर उजाला ब्यूरो
बहादुरगढ़। दिल्ली से सटी बहादुरगढ़ की जमीन पर अवैध रूप से विकसित पीवीसी मार्केट पर प्रशासन की चुप्पी बरकरार है। इस मामले में उपायुक्त ने स्थानीय अधिकारियों से रिपोर्ट भी तलब की थी लेकिन रिपोर्ट अभी तक उपायुक्त तक नहीं पहुंची है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा बंद किए जाने के बाद दिल्ली के साथ लगती बहादुरगढ़ की भूमि पर विकसित हुई पीवीसी मार्केट तेजी से अपना दायरा बढ़ा रही है। दो महीने पहले दो-तीन प्लास्टिक की दुकान खोलकर नींव रखी गई थी लेकिन अब यह मार्केट अपनी जड़े जमा चुकी है। अब तो यह मामला पॉल्यूशन बोर्ड व प्रशासनिक अधिकारियों के संज्ञान में भी आ गया है, इसके बावजूद इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे, जबकि एनजीटी की चुप्पी भी बरकरार है। इधर, नियमों को धत्ता बताकर प्लास्टिक व्यापारी व भू-मालिक मार्केट के विस्तार में लगे हुए हैं। अब तो काफी पीछे गंदे नाले तक दोनों तरफ दुकानें, कारखाने खुल गए हैं। लगभग 100 एकड़ जमीन थी, अब खेती के नाम पर बस यहां आठ से दस एकड़ जमीन ही शेष रह गई है। गत 9 जनवरी को जिला उपायुक्त सोनल गोयल के संज्ञान में मामला आया तो उन्होंने इस संबंध में स्थानीय अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की थी। अधिकारियों को यह रिपोर्ट सोमवार को देनी थी लेकिन अभी तक ऐसा कुछ नहीं हुआ है।
एक किसान ने बताया कि कुछ प्रभावी लोग लगातार मार्केट में आते हैं। प्लास्टिक व्यवसायियों को आश्वासन देते हैं कि वे यहां किसी तरह की कार्रवाई नहीं होने देंगे। खैर, इस मामले में कार्रवाई होती है या नहीं होती, ये तो रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा है। हां, इस अवैध मार्केट का लगातार बढ़ता दायरा एनजीटी, पॉल्यूशन बोर्ड व स्थानीय प्रशासन को नाक दिखा रहा है।
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इस मामले में अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की गई है। अभी रिपोर्ट नहीं आई है। रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
सोनल गोयल, उपायुक्त, झज्जर
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बहादुरगढ़। दिल्ली से सटी बहादुरगढ़ की जमीन पर अवैध रूप से विकसित पीवीसी मार्केट पर प्रशासन की चुप्पी बरकरार है। इस मामले में उपायुक्त ने स्थानीय अधिकारियों से रिपोर्ट भी तलब की थी लेकिन रिपोर्ट अभी तक उपायुक्त तक नहीं पहुंची है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा बंद किए जाने के बाद दिल्ली के साथ लगती बहादुरगढ़ की भूमि पर विकसित हुई पीवीसी मार्केट तेजी से अपना दायरा बढ़ा रही है। दो महीने पहले दो-तीन प्लास्टिक की दुकान खोलकर नींव रखी गई थी लेकिन अब यह मार्केट अपनी जड़े जमा चुकी है। अब तो यह मामला पॉल्यूशन बोर्ड व प्रशासनिक अधिकारियों के संज्ञान में भी आ गया है, इसके बावजूद इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे, जबकि एनजीटी की चुप्पी भी बरकरार है। इधर, नियमों को धत्ता बताकर प्लास्टिक व्यापारी व भू-मालिक मार्केट के विस्तार में लगे हुए हैं। अब तो काफी पीछे गंदे नाले तक दोनों तरफ दुकानें, कारखाने खुल गए हैं। लगभग 100 एकड़ जमीन थी, अब खेती के नाम पर बस यहां आठ से दस एकड़ जमीन ही शेष रह गई है। गत 9 जनवरी को जिला उपायुक्त सोनल गोयल के संज्ञान में मामला आया तो उन्होंने इस संबंध में स्थानीय अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की थी। अधिकारियों को यह रिपोर्ट सोमवार को देनी थी लेकिन अभी तक ऐसा कुछ नहीं हुआ है।
एक किसान ने बताया कि कुछ प्रभावी लोग लगातार मार्केट में आते हैं। प्लास्टिक व्यवसायियों को आश्वासन देते हैं कि वे यहां किसी तरह की कार्रवाई नहीं होने देंगे। खैर, इस मामले में कार्रवाई होती है या नहीं होती, ये तो रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा है। हां, इस अवैध मार्केट का लगातार बढ़ता दायरा एनजीटी, पॉल्यूशन बोर्ड व स्थानीय प्रशासन को नाक दिखा रहा है।
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इस मामले में अधिकारियों से रिपोर्ट तलब की गई है। अभी रिपोर्ट नहीं आई है। रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
सोनल गोयल, उपायुक्त, झज्जर