{"_id":"5c520661bdec22736a768e8b","slug":"101548879457-jhajjar-bahadurgarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"अल्ट्रासाउंड के लिए तीन दिन की वेटिंग, एमआरआई-सिटी के लिए करते हैंपीजीआई रेफर 20-11-14","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अल्ट्रासाउंड के लिए तीन दिन की वेटिंग, एमआरआई-सिटी के लिए करते हैंपीजीआई रेफर 20-11-14
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अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर। जिला मुख्यालय पर 100 बेड का सरकारी अस्पताल तो है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर कुछ खास नहीं है। छोटी हो या कोई बड़ी घटना मरीजों को सुविधाओं के अभाव में रोहतक पीजीआई का रास्ता दिखा ही दिया जाता है। आलम यह है कि अल्ट्रासाउंड के लिए भी तीन दिन की वेटिंग यहां पर चल रही है। यहां पर अल्ट्रासाउंड के लिए मशीन भी एक ही है। अस्पताल के एसएमओ डॉ. संजय सचदेवा सोनोलॉजिस्ट का कार्य भी देखते हैं। वह पहले कार्यालय का काम निपटाते हैं। ऐसे में प्रतिदिन करीब 20 से 25 मरीजों का अल्ट्रासाउंड ही हो पाता है, जबकि करीब 50-60 मरीज पहुंचते हैं। वहीं अधिक समस्या उस दिन आती है, जब वे छुट्टी पर रहते हैं। छुट्टी के दौरान बनने वाली वेटिंग के कारण यहां पर समस्या बढ़ी हुई है। सबसे अधिक परेशानी गर्भवती महिलाओं को होती है। उन्हें अल्ट्रासाउंड के लिए निजी अस्पताल में भेजा जाता है। अगर ओपीडी के बाद किसी मरीज को अल्ट्रासाउंड की आवश्यकता पड़ जाए तो उसे निजी अस्पताल का सहारा ही लेना पड़ता है।
एमआरआई व सिटी स्कैन की नहीं सुविधा
सरकार की ओर से सिटी स्कैन व एमआरआई की सुविधा जिला अस्पतालों में कराने के लिए काफी समय पूर्व घोषणा तो की गई है। लेकिन झज्जर में फिलहाल यह सुविधा मुहैया नहीं करवाई गई है। सिटी स्कैन व एमआरआई के लिए पीपीपी मोड में एमओयू साइन भी हुआ है। लेकिन बताया जा रहा है कि कंपनी नए वित्त वर्ष में ही इस पर कार्य शुरू करेगी। वहीं बजट की कमी के कारण यह दो माह तक नहीं शुरू हो पाएगा।
डायलिसिस यूनिट अधर में
किडनी के रोगियों के लिए डायलिसिस की सुविधा भी सामान्य अस्पताल में नहीं है। दो साल पहले पीपीपी मोड के तहत विभाग की ओर से एमओयू किया गया था। लेकिन आज तक यह योजना सिरे नहीं चढ़ पाई है। विभाग की ओर से अस्पताल में संबंधित कंपनी को जगह भी दी हुई है। लेकिन आज तक यूनिट चालू नहीं हो पाई है। कंपनी ने इस प्रोजेक्ट से वापस खींच लिए हैं।
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वेंटिलेटर का भी अभाव
स्वाइन फ्लू से बचने के लिए यहां पर केवल अलग से वार्ड बनाया गया है। अगर स्थिति बिगड़ती है तो मरीज के लिए वेंटिलेटर की सुविधा यहां पर नहीं है। ऐसी स्थिति में मरीज को रोहतक पीजीआई में रेफर किया जाएगा। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि अगर जान पर बनी तो यहां कोई सहारा नहीं है।
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डायलिसिस यूनिट, सिटी स्कैन-एमआरआई के लिए पीपीपी मोड के तहत बातचीत चल रही है। वहीं वेंटिलेटर के लिए विभाग को लिखा जाएगा। अल्ट्रासाउंड के लिए गर्भवती महिलाओं को कोई दिक्कत नहीं आने दी जा रही। सरकारी खर्च पर उनका निजी अस्पताल से जांच करवाई जा रही है।
आरएस पूनिया, सीएमओ, झज्जर।
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झज्जर। जिला मुख्यालय पर 100 बेड का सरकारी अस्पताल तो है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर कुछ खास नहीं है। छोटी हो या कोई बड़ी घटना मरीजों को सुविधाओं के अभाव में रोहतक पीजीआई का रास्ता दिखा ही दिया जाता है। आलम यह है कि अल्ट्रासाउंड के लिए भी तीन दिन की वेटिंग यहां पर चल रही है। यहां पर अल्ट्रासाउंड के लिए मशीन भी एक ही है। अस्पताल के एसएमओ डॉ. संजय सचदेवा सोनोलॉजिस्ट का कार्य भी देखते हैं। वह पहले कार्यालय का काम निपटाते हैं। ऐसे में प्रतिदिन करीब 20 से 25 मरीजों का अल्ट्रासाउंड ही हो पाता है, जबकि करीब 50-60 मरीज पहुंचते हैं। वहीं अधिक समस्या उस दिन आती है, जब वे छुट्टी पर रहते हैं। छुट्टी के दौरान बनने वाली वेटिंग के कारण यहां पर समस्या बढ़ी हुई है। सबसे अधिक परेशानी गर्भवती महिलाओं को होती है। उन्हें अल्ट्रासाउंड के लिए निजी अस्पताल में भेजा जाता है। अगर ओपीडी के बाद किसी मरीज को अल्ट्रासाउंड की आवश्यकता पड़ जाए तो उसे निजी अस्पताल का सहारा ही लेना पड़ता है।
एमआरआई व सिटी स्कैन की नहीं सुविधा
सरकार की ओर से सिटी स्कैन व एमआरआई की सुविधा जिला अस्पतालों में कराने के लिए काफी समय पूर्व घोषणा तो की गई है। लेकिन झज्जर में फिलहाल यह सुविधा मुहैया नहीं करवाई गई है। सिटी स्कैन व एमआरआई के लिए पीपीपी मोड में एमओयू साइन भी हुआ है। लेकिन बताया जा रहा है कि कंपनी नए वित्त वर्ष में ही इस पर कार्य शुरू करेगी। वहीं बजट की कमी के कारण यह दो माह तक नहीं शुरू हो पाएगा।
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डायलिसिस यूनिट अधर में
किडनी के रोगियों के लिए डायलिसिस की सुविधा भी सामान्य अस्पताल में नहीं है। दो साल पहले पीपीपी मोड के तहत विभाग की ओर से एमओयू किया गया था। लेकिन आज तक यह योजना सिरे नहीं चढ़ पाई है। विभाग की ओर से अस्पताल में संबंधित कंपनी को जगह भी दी हुई है। लेकिन आज तक यूनिट चालू नहीं हो पाई है। कंपनी ने इस प्रोजेक्ट से वापस खींच लिए हैं।
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वेंटिलेटर का भी अभाव
स्वाइन फ्लू से बचने के लिए यहां पर केवल अलग से वार्ड बनाया गया है। अगर स्थिति बिगड़ती है तो मरीज के लिए वेंटिलेटर की सुविधा यहां पर नहीं है। ऐसी स्थिति में मरीज को रोहतक पीजीआई में रेफर किया जाएगा। ऐसे में अंदाजा लगाया जा सकता है कि अगर जान पर बनी तो यहां कोई सहारा नहीं है।
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डायलिसिस यूनिट, सिटी स्कैन-एमआरआई के लिए पीपीपी मोड के तहत बातचीत चल रही है। वहीं वेंटिलेटर के लिए विभाग को लिखा जाएगा। अल्ट्रासाउंड के लिए गर्भवती महिलाओं को कोई दिक्कत नहीं आने दी जा रही। सरकारी खर्च पर उनका निजी अस्पताल से जांच करवाई जा रही है।
आरएस पूनिया, सीएमओ, झज्जर।