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टॉयलेट सर्वे में गड़बड़ी का आरोप, पार्षदों ने दी डीसी को शिकायत 18-41-08
Updated Sat, 12 Aug 2017 01:33 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
झज्जर।
शहर को ओडीएफ बनाने को लेकर चलाए जा रहे टॉयलेट सर्वे में शहर के दो पार्षदों व एक पूर्व चेयरमैन ने भी गड़बड़ी की आशंका जताई है। खास बात यह है कि सर्वे पर सवाल उठाने वालो में से एक पार्षद भाजपा के मंडल प्रधान भी हैं। पार्षदों ने डीसी को दी शिकायत में आरोप लगाया है कि वार्ड नंबर 3 व 14 में चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए ऐसे लोगों के नाम शामिल किए गए हैं। जिनके घर पहले से शौचालय था। ऐसा करके नपा के अधिकारी उन्हें बेवजह लाभ पहुंचा रहे हैं और सरकारी खजाने से लूट की जा रही है। पार्षदों ने शिकायत के साथ वह लिस्ट भी डीसी को सौंपी हैं, जो नपा के द्वारा सर्वे में तैयार की गई है।
पुरानी लिस्टों पर जताया संदेह
डीसी को शिकायत देने वाले पार्षद सरजीत गुर्जर, महाबीर गुर्जर व पूर्व चेयरमैन दिनेश यादव ने बताया कि पूर्व में किए सर्वे के आधार जो ग्रांट सरकार के द्वारा रिलीज की गई है। उसमें से करीब 40 फीसदी लोगों के घर उस पैसे से शौचालय नहीं बनाए गए। क्योंकि उनके घर पहले से ही शौचालय थे। जबकि उनके द्वारा दूसरे लोगों के शौचालय के सामने खड़े होकर फोटो करवाए गए हैं। अगर प्रशासन के द्वारा सही जांच करवाई गई तो काफी अधिकारी इसके लपेटे में आ सकते हैं।
दो मामलों की पहले से जांच जारी
नपा के कार्यों को लेकर अब सवाल खड़े होना आम बात हो गई है। नपा के दो मामलों की पहले ही जांच चल रही है। नपा के द्वारा गोशालाओं में डी प्लान के पैसे से लगाई गई हाईमास्ट लाईटें के मामले में जब बिल अधिक पाए गए तो एडीसी ने इसकी जांच खोल दीी। जांच की जिम्मेदारी पंचायती राज के एक्सईएन युनूस खान को दी गई है। वहीं, टाइल घोटाले को लेकर भी नपा के ही एमई को जांच का जिम्मा सौंपा गया है। अब सवाल ये भी खड़े हो रहे हैं कि जिन अधिकारियों की नाक के नीचे से लाखों की टाइलें चली गई, क्या वे सही जांच कर पाएंगे।
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हर काम में भेदभाव : यादव
मामले को लेकर वार्ड-7 की पार्षद व्याख्या यादव ने बताया कि नपा के अधिकारियों और चेयरमैन द्वारा हर मामले में भेदभाव किया जा रहा है। जोकि लोकतांत्रिक प्रणाली के लिए घातक है। शह को ओडीएफ बनाने का प्लान बना रहे अधिकारियों को समझना चाहिए कि कम से कम टॉयलेट सर्वे में तो भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए।
वर्जन
पार्षदों के द्वारा की गई शिकायत के बारे में उन्हें जानकारी नहीं है। टॉयलेट सर्वे सक्षम युवाओं के द्वारा किया गया है, जिसको नपा के अधिकारियों के द्वारा भी क्रॉस चेक किया जाता है। उन्हें गड़बड़ी की संभावना इसमें नजर नहीं आती। फिर भी अगर किसी को संदेह है तो इसकी फिर से जांच करवा दी जाएगी।
- नरेंद्र सैनी, सचिव नपा झज्जर।
- वार्ड-3 और 14 के लाभपात्रों पर उठाए सवाल, सीएम विंडो पर दर्ज करवाई शिकायत
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झज्जर।
शहर को ओडीएफ बनाने को लेकर चलाए जा रहे टॉयलेट सर्वे में शहर के दो पार्षदों व एक पूर्व चेयरमैन ने भी गड़बड़ी की आशंका जताई है। खास बात यह है कि सर्वे पर सवाल उठाने वालो में से एक पार्षद भाजपा के मंडल प्रधान भी हैं। पार्षदों ने डीसी को दी शिकायत में आरोप लगाया है कि वार्ड नंबर 3 व 14 में चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए ऐसे लोगों के नाम शामिल किए गए हैं। जिनके घर पहले से शौचालय था। ऐसा करके नपा के अधिकारी उन्हें बेवजह लाभ पहुंचा रहे हैं और सरकारी खजाने से लूट की जा रही है। पार्षदों ने शिकायत के साथ वह लिस्ट भी डीसी को सौंपी हैं, जो नपा के द्वारा सर्वे में तैयार की गई है।
पुरानी लिस्टों पर जताया संदेह
डीसी को शिकायत देने वाले पार्षद सरजीत गुर्जर, महाबीर गुर्जर व पूर्व चेयरमैन दिनेश यादव ने बताया कि पूर्व में किए सर्वे के आधार जो ग्रांट सरकार के द्वारा रिलीज की गई है। उसमें से करीब 40 फीसदी लोगों के घर उस पैसे से शौचालय नहीं बनाए गए। क्योंकि उनके घर पहले से ही शौचालय थे। जबकि उनके द्वारा दूसरे लोगों के शौचालय के सामने खड़े होकर फोटो करवाए गए हैं। अगर प्रशासन के द्वारा सही जांच करवाई गई तो काफी अधिकारी इसके लपेटे में आ सकते हैं।
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दो मामलों की पहले से जांच जारी
नपा के कार्यों को लेकर अब सवाल खड़े होना आम बात हो गई है। नपा के दो मामलों की पहले ही जांच चल रही है। नपा के द्वारा गोशालाओं में डी प्लान के पैसे से लगाई गई हाईमास्ट लाईटें के मामले में जब बिल अधिक पाए गए तो एडीसी ने इसकी जांच खोल दीी। जांच की जिम्मेदारी पंचायती राज के एक्सईएन युनूस खान को दी गई है। वहीं, टाइल घोटाले को लेकर भी नपा के ही एमई को जांच का जिम्मा सौंपा गया है। अब सवाल ये भी खड़े हो रहे हैं कि जिन अधिकारियों की नाक के नीचे से लाखों की टाइलें चली गई, क्या वे सही जांच कर पाएंगे।
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हर काम में भेदभाव : यादव
मामले को लेकर वार्ड-7 की पार्षद व्याख्या यादव ने बताया कि नपा के अधिकारियों और चेयरमैन द्वारा हर मामले में भेदभाव किया जा रहा है। जोकि लोकतांत्रिक प्रणाली के लिए घातक है। शह को ओडीएफ बनाने का प्लान बना रहे अधिकारियों को समझना चाहिए कि कम से कम टॉयलेट सर्वे में तो भेदभाव नहीं किया जाना चाहिए।
वर्जन
पार्षदों के द्वारा की गई शिकायत के बारे में उन्हें जानकारी नहीं है। टॉयलेट सर्वे सक्षम युवाओं के द्वारा किया गया है, जिसको नपा के अधिकारियों के द्वारा भी क्रॉस चेक किया जाता है। उन्हें गड़बड़ी की संभावना इसमें नजर नहीं आती। फिर भी अगर किसी को संदेह है तो इसकी फिर से जांच करवा दी जाएगी।
- नरेंद्र सैनी, सचिव नपा झज्जर।
- वार्ड-3 और 14 के लाभपात्रों पर उठाए सवाल, सीएम विंडो पर दर्ज करवाई शिकायत