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हिसार: एक दिन में गेहूं के रेट में 500 रुपये तक आई कमी, आटे के दाम यथावत
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हिसार। गेहूं के निर्यात की उम्मीद में इस बार आढ़तियों ने जमकर खरीदारी की। नतीजा हुआ कि रेट 3085 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया। इसके बाद आटे का भाव भी 38 रुपये किलो तक चढ़ गया, लेकिन सरकार ने जब बाजार में 30 लाख एमटी गेहूं का टेंडर जारी किया तो रेट में करीब 500 रुपये की गिरावट आई। फिर भी आटे का रेट यथावत बना हुआ है। बीते साल गेहूं की पैदावार में करीब 25 प्रतिशत तक की गिरावट आई थी। इसके अलावा रूस-यूक्रेन युद्ध के चलते यूरोपीय देशों में गेहूं की मांग बढ़ी। अपने देश से कई देशों को गेहूं निर्यात भी होने लगा। इसका असर बाजार पर पड़ा। सरकारी खरीद बंद होने के बाद खुले बाजार में गेहूं की कीमत 2500 रुपये प्रति क्विंटल तक बनी रही। हिसार मंडी से जुड़े व्यापारियों ने बताया कि दिसंबर-जनवरी में गेहूं के रेट में जबरदस्त उछाल आया और कीमतें प्रति क्विंटल 3085 रुपये तक पहुंच गई। निर्यात की उम्मीद में हो रही इस खरीदारी से आटे का भाव भी बढ़ने लगा। जनवरी में खुले बाजार में आटा 38 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गया। कीमतें और भी बढ़ने की उम्मीद जताई जाने लगी। इसी बीच केंद्र सरकार ने एकमुश्त 30 हजार मीट्रिक टन गेहूं खुले बाजार के लिए जारी कर दिया गया। इसके लिए सरकार की तरफ से टेंडर जारी करते हुए न्यूनतम रेट 2350 रुपये तय किए गए। व्यापारी नरेश सिंगल बताते हैं कि टेंडर ओपन होते ही गेहूं का बाजार भाव एक दिन में ही 500 रुपये प्रति क्विंटल तक नीचे आ गया। इस वजह से व्यापारियों की लाखों रुपये की पूंजी बाजार में फंस गई।
कम नहीं हुए आटे के रेट
गेहूं की कीमतों में वृद्धि के साथ ही आटे के रेट भी बढ़ गए। दिसंबर में जो आटा 30-32 रुपये प्रति किलो तक था, वह जनवरी में 38 रुपये प्रति किलो के भाव तक पहुंच गया। आटे के अलावा इससे जुड़े अन्य उत्पादों की कीमतें भी बढ़ीं, लेकिन गेहूं के रेट में कमी आने के बावजूद इनकी कीमतों में कोई गिरावट नहीं आई। पीजी संचालक नरेश चुघ ने बताया कि साल भर में आटे की कीमत में करीब 10 रुपये की बढ़ोत्तरी हुई है। गेहूं का रेट बढ़ते ही आटा महंगा तो हो गया, लेकिन कीमत अब कम नहीं हो रही है।
बुधवार को फिर होगा टेंडर
मंडी से जुड़े आढ़तियों ने बताया कि गेहूं का सरकारी टेंडर बुधवार को फिर ओपन होगा। बाजार की कीमत से सरकारी रेट कम होने की वजह से व्यापारियों को फिर घाटा होगा। इसके अलावा अगले महीने से गेहूं की नई फसल भी बाजार में आएगी। इससे अब गेहूं के रेट में बढ़ोत्तरी की संभावना नहीं है।
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कम नहीं हुए आटे के रेट
गेहूं की कीमतों में वृद्धि के साथ ही आटे के रेट भी बढ़ गए। दिसंबर में जो आटा 30-32 रुपये प्रति किलो तक था, वह जनवरी में 38 रुपये प्रति किलो के भाव तक पहुंच गया। आटे के अलावा इससे जुड़े अन्य उत्पादों की कीमतें भी बढ़ीं, लेकिन गेहूं के रेट में कमी आने के बावजूद इनकी कीमतों में कोई गिरावट नहीं आई। पीजी संचालक नरेश चुघ ने बताया कि साल भर में आटे की कीमत में करीब 10 रुपये की बढ़ोत्तरी हुई है। गेहूं का रेट बढ़ते ही आटा महंगा तो हो गया, लेकिन कीमत अब कम नहीं हो रही है।
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बुधवार को फिर होगा टेंडर
मंडी से जुड़े आढ़तियों ने बताया कि गेहूं का सरकारी टेंडर बुधवार को फिर ओपन होगा। बाजार की कीमत से सरकारी रेट कम होने की वजह से व्यापारियों को फिर घाटा होगा। इसके अलावा अगले महीने से गेहूं की नई फसल भी बाजार में आएगी। इससे अब गेहूं के रेट में बढ़ोत्तरी की संभावना नहीं है।
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